नई दिल्ली। अवैध हथियारों की तस्करी और कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के मामले में वकील दीपक खत्री को अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने शाहबाज अंसारी के कथित अवैध हथियार सिंडिकेट से जुड़े मामले में दीपक खत्री की जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए अवैध हथियारों की आपूर्ति और अन्य आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने का आरोप है।दीपक खत्री का नाम इस मामले में सामने आने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी का कथित तौर पर शाहबाज अंसारी से संपर्क था। शाहबाज अंसारी को इस हथियार आपूर्ति नेटवर्क का प्रमुख बताया गया है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
IGI एयरपोर्ट से गिरफ्तार हुए थे दीपक खत्री
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दीपक नंदा उर्फ दीपक खत्री को 25 अगस्त 2026 को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर पकड़ा गया था। उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किए जाने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उन्हें अवैध हथियारों की आपूर्ति और कथित जबरन वसूली से जुड़े UAPA मामले में गिरफ्तार किया।दीपक खत्री को लेकर यह भी चर्चा रही है कि वह जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की कानूनी टीम से जुड़े होने का दावा करते थे। पुलिस का आरोप है कि उनका संपर्क बांग्लादेश में मौजूद हथियार आपूर्तिकर्ता शाहबाज अंसारी से था। जांच एजेंसी इस संपर्क और कथित हथियार नेटवर्क में उनकी भूमिका की पड़ताल कर रही है।
शाहबाज अंसारी के नेटवर्क की जांच में सामने आए कई नाम
दिल्ली पुलिस की जांच में शाहबाज अंसारी के कथित अंतरराष्ट्रीय हथियार नेटवर्क का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए आधुनिक हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति की जा रही थी। जांच एजेंसी का दावा है कि हथियारों को अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने के लिए कई स्तरों पर संपर्क और मध्यस्थों का इस्तेमाल किया जाता था।इस मामले में हर्षपाल सिंह रूबल और निशांत अरोड़ा सहित कई अन्य लोगों के नाम भी जांच के दौरान सामने आए हैं। पुलिस का आरोप है कि इनके माध्यम से हथियारों की आपूर्ति और नेटवर्क के संचालन में मदद की जाती थी। हालांकि, अलग-अलग आरोपियों की भूमिका और उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों का निर्धारण अदालत में होने वाली सुनवाई के दौरान किया जाएगा।
33 पिस्तौल और 368 कारतूस बरामद करने का दावा
दिल्ली पुलिस ने इस मामले की जांच के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध हथियार और गोला-बारूद बरामद करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के पास से 33 अवैध सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल, दो सबमशीन गन और 368 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे।जांच एजेंसी ने अदालत को बताया था कि इन हथियारों का इस्तेमाल सार्वजनिक आयोजनों और बड़ी सभाओं के दौरान अंधाधुंध गोलीबारी करके दहशत फैलाने के लिए किए जाने की आशंका थी। पुलिस ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रकरण बताते हुए जांच को आगे बढ़ाया।मामले में पुलिस ने 24 अगस्त 2026 को 18 गिरफ्तार आरोपियों और एक फरार कथित सरगना शाहबाज अंसारी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जाने की जानकारी भी अदालत को दी थी।
UAPA के तहत दर्ज है मामला
इस पूरे प्रकरण में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के अलावा अवैध हथियारों की आपूर्ति और जबरन वसूली से संबंधित आरोप भी शामिल हैं। UAPA के तहत दर्ज मामलों में जमानत का फैसला सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में अलग कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाता है।इस कानून की धारा 43D(5) के तहत यदि अदालत को आरोपों के प्रथम दृष्टया सही होने का आधार दिखाई देता है, तो आरोपी को जमानत देने पर प्रतिबंध लागू हो सकता है। ऐसे मामलों में अदालत जांच एजेंसी की ओर से पेश सामग्री और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करती है।दीपक खत्री की जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्हें फिलहाल इस मामले में राहत नहीं मिली है। हालांकि, अदालत के विस्तृत आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं होने के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि जमानत खारिज करने के पीछे अदालत ने कौन-से विशिष्ट आधार दिए हैं।
शाहबाज अंसारी और अन्य आरोपियों की तलाश भी जांच का हिस्सा
इस मामले में शाहबाज अंसारी और रेहान अंसारी को लेकर भी दिल्ली पुलिस ने अदालत में गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की थी। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी इस मामले में फरार थे। राउज एवेन्यू कोर्ट में इस संबंध में आवेदन पेश किया गया था।अक्टूबर 2026 में मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत की न्यायाधीश के सुनवाई से अलग होने के बाद केस को दूसरी अदालत में स्थानांतरित किया गया था। इसके बाद विशेष NIA अदालत में मामले की सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर
दीपक खत्री की जमानत याचिका खारिज होना इस मामले की कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब आरोपी के पास कानून के तहत उपलब्ध अन्य न्यायिक विकल्पों का सहारा लेने का रास्ता है। वहीं जांच एजेंसी की ओर से हथियारों की कथित आपूर्ति, नेटवर्क से जुड़े लोगों और वित्तीय लेन-देन जैसे पहलुओं की पड़ताल जारी रह सकती है।इस मामले में पुलिस के आरोपों और अदालत में पेश साक्ष्यों के आधार पर आगे की सुनवाई होगी। फिलहाल यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जांच में कथित अंतरराष्ट्रीय हथियार आपूर्ति नेटवर्क, कई आरोपियों की गिरफ्तारी और बड़ी संख्या में हथियारों की बरामदगी का दावा किया गया है।यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जमानत याचिका खारिज होना आरोपी की दोषसिद्धि नहीं है। मामले में अंतिम फैसला न्यायिक सुनवाई और साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही होगा।
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