सेवा ही मेरे सार्वजनिक जीवन का मूल मंत्र पीएम मोदी ने सेवा यात्रियों से किया संवाद
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को गुजरात के वडनगर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक ‘सेवा यात्रा’ कर रहे प्रतिभागियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने ‘जनता जनार्दन’ की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में वर्तमान जिम्मेदारी तक लोगों और राष्ट्र की सेवा उनके सार्वजनिक जीवन का मूल सिद्धांत रही है।
प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रियों से बातचीत करते हुए कहा कि उनका जीवन लोगों के आशीर्वाद से आगे बढ़ा है और जनसेवा उनका प्रमुख मंत्र रहा है। उन्होंने अपनी सार्वजनिक यात्रा को ‘जन सेवा से देश सेवा’ की यात्रा बताते हुए कहा कि जिम्मेदारियां और पद बदल सकते हैं, लेकिन सेवा की भावना उनके लिए केंद्रीय रही है।
मोदी ने कहा कि जब फैसले ‘सेवा भाव’ के साथ लिए जाते हैं तो ‘नागरिक देवो भव:’ की भावना स्वाभाविक रूप से शासन व्यवस्था का हिस्सा बनती है। इस अवधारणा में नागरिकों को नीतियों और शासन के केंद्र में रखने पर जोर दिया जाता है। प्रधानमंत्री इससे पहले भी ‘नागरिक देवो भव:’ को सरकार के कामकाज का महत्वपूर्ण सिद्धांत बताते रहे हैं।
वडनगर से वाराणसी के बीच चल रही सेवा यात्रा 17 सितंबर को शुरू हुई थी। यह प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चलाए जा रहे व्यापक ‘सेवा संकल्प अभियान’ का हिस्सा है। यात्रा के दौरान प्रतिभागी अलग-अलग राज्यों, जिलों, तहसीलों और गांवों से गुजरते हुए जनसेवा और जनभागीदारी से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।
यात्रा में युवा प्रतिभागियों की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया है। सेवा यात्री अलग-अलग स्थानों पर स्थानीय लोगों से संपर्क करने के साथ स्वच्छता अभियान, सामाजिक सेवा और जनकल्याण से संबंधित गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। स्कूलों, अस्पतालों, नर्सिंग होम और अन्य सामुदायिक स्थानों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। आकाशवाणी के अनुसार यात्रा का उद्देश्य सेवा, संपर्क, युवा भागीदारी, सामाजिक कल्याण और सांस्कृतिक जुड़ाव को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रियों के अनुभव भी सुने। उन्होंने यात्रा में शामिल युवाओं से कहा कि सेवा को जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाना चाहिए और अपने कार्यों के माध्यम से सेवा का संदेश आगे पहुंचाना चाहिए। बातचीत में युवाओं की राष्ट्र निर्माण और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी का विषय भी प्रमुखता से सामने आया।
मोदी ने कहा कि लोगों की सेवा और राष्ट्र की सेवा को अलग-अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक शासन व्यवस्था में लिए जाने वाले फैसलों का उद्देश्य नागरिकों के जीवन को आसान बनाना होना चाहिए। हाल में रोजगार मेले के दौरान भी प्रधानमंत्री ने सरकारी कर्मचारियों से ‘नागरिक देवो भव:’ के सिद्धांत को अपने कामकाज में अपनाने की बात कही थी और नागरिक सेवा को राष्ट्र सेवा से जोड़ा था।
प्रधानमंत्री ने ‘जनता जनार्दन’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए अपनी सरकार की सेवा आधारित कार्यशैली की बात कही। इससे पहले एक सरकारी कार्यक्रम में भी उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार जनता को ‘जनार्दन’ के रूप में देखती है और शासन को नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से काम करना चाहिए।
सेवा यात्रा का संबंध प्रधानमंत्री मोदी के जीवन से जुड़े दो प्रमुख स्थानों से भी है। गुजरात का वडनगर उनका जन्मस्थान है, जबकि वाराणसी उनका लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है। इस अभियान के तहत वडनगर और वाराणसी को जोड़ते हुए मोटरसाइकिल यात्राएं निकाली गई हैं। 17 सितंबर को शुरू हुई यात्रा में प्रतिभागी विभिन्न मार्गों से आगे बढ़ते हुए लोगों से संवाद और सेवा संबंधी कार्यक्रम कर रहे हैं।
यात्रा केवल मोटरसाइकिल अभियान तक सीमित नहीं रखी गई है। इसके माध्यम से सामाजिक सेवा, युवा भागीदारी, जनसंपर्क, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामुदायिक गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। विभिन्न स्थानों पर यात्रा में शामिल प्रतिभागी स्थानीय समुदायों के साथ संवाद कर रहे हैं और सेवा से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने युवाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें समाज और देश के लिए काम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ संवाद में सेवा को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखने, बल्कि इसे जीवन और कार्यशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने जन्मदिन पर मिले संदेशों के जवाब में भी हाल में कहा था कि देशभर के लोगों से मिले स्नेह और आशीर्वाद से उन्हें लोगों की सेवा करने की नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने सेवा गतिविधियों में लगे लोगों की सराहना करते हुए विकसित भारत के निर्माण के लिए मिलकर काम करने की अपील की थी।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत निकाली जा रही यात्रा का कार्यक्रम आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार वडनगर-वाराणसी यात्रा 7 अक्टूबर तक चलने वाली है। इस दौरान प्रतिभागी विभिन्न स्थानों पर सेवा और जनभागीदारी से जुड़ी गतिविधियां करते हुए अपनी यात्रा आगे बढ़ाएंगे।
गुरुवार के संवाद में प्रधानमंत्री का मुख्य जोर जनसेवा, नागरिक-केंद्रित शासन और युवाओं की भागीदारी पर रहा। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘जन सेवा’ से ‘देश सेवा’ तक की उनकी यात्रा में लोगों की सेवा केंद्रीय तत्व रही है। साथ ही उन्होंने सेवा यात्रियों को अपने कार्यों के जरिए समाज में सेवा की भावना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।