नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जिन-जिन राज्यों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ी और छेड़छाड़ हुई है, वहां के चुनाव रद्द किए जाने चाहिए और नए सिरे से निष्पक्ष चुनाव कराए जाने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने SIR प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म करने की मांग भी उठाई है।संजय सिंह का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी परिणामों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि SIR के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनके मुताबिक, जब मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाता है।उनके बयान ने एक बार फिर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में संशोधन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर चल रही बहस को तेज कर दिया है।
संजय सिंह ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
संजय सिंह ने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि चुनाव आयुक्तों के बीच SIR से जुड़े फैसलों को लेकर कई बार असहमति सामने आई थी। उनके अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग मौकों पर इस प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई थी।संजय सिंह ने दावा किया कि रिपोर्ट में 14 बार असहमति दर्ज होने का उल्लेख है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग के भीतर उठाई गई आपत्तियों के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एकतरफा तरीके से फैसले लिए।उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच ही प्रक्रिया को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं, तो आम मतदाता इस पूरी व्यवस्था पर भरोसा कैसे कर सकता है?हालांकि, ये संजय सिंह के आरोप और उनके द्वारा मीडिया रिपोर्ट के आधार पर रखे गए दावे हैं। इन्हें चुनाव आयोग द्वारा प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
50 हजार वोट हटे और जीत का अंतर 5 हजार', उठाए सवाल
AAP सांसद ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक विधानसभा क्षेत्र में यदि 50 हजार मतदाताओं के नाम हटा दिए जाते हैं और चुनाव में जीत का अंतर महज 5 हजार से 8 हजार वोटों का रहता है, तो ऐसे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।संजय सिंह ने बिहार चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि SIR के बाद चुनाव का वास्तविक महत्व प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाताओं के नाम हटाने और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है।उन्होंने दावा किया कि SIR के तहत करीब 60 लाख नाम हटाए गए, 33 लाख नए नाम जोड़े गए और 27 लाख नाम लंबित रखे गए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए गए, उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा और इसके लिए जवाबदेह अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?संजय सिंह ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम होना प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान अधिकार के लिए जरूरी है।
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
AAP सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव आयोग के नेतृत्व पर भरोसे को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए उनके इस्तीफे की बात कही।संजय सिंह का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की जिम्मेदारी निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना है। ऐसे में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि किसी चुनाव क्षेत्र में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं या चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हुई है, तो वहां के चुनाव रद्द करके दोबारा मतदान कराया जाना चाहिए। उनका मानना है कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता सबसे जरूरी है।
बिहार से लेकर दिल्ली और महाराष्ट्र तक उठाए सवाल
संजय सिंह ने बिहार के साथ-साथ दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन राज्यों में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई तरह की अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं।उन्होंने कहा कि यदि चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जाते हैं और इसके कारण पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित होते हैं, तो चुनाव परिणामों की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी है।उनका कहना था कि सिर्फ चुनाव परिणाम घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि प्रत्येक पात्र मतदाता को मतदान का अवसर मिला हो। संजय सिंह ने देश में नए सिरे से निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग करते हुए SIR प्रक्रिया को समाप्त करने की बात दोहराई।
SIR को लेकर विपक्ष का विरोध तेज
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों का विरोध लगातार बढ़ रहा है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।5 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी तीन प्रमुख मांगें रखी थीं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR प्रक्रिया को रद्द करना और चुनाव बैलेट पेपर से कराना शामिल था। कांग्रेस ने इन मांगों को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कही थी।वहीं, 10 अक्टूबर को दिल्ली में SIR और कथित वोट चोरी के विरोध में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की गई थी। संजय सिंह ने स्पष्ट किया था कि यह प्रदर्शन कॉकroach जनता पार्टी (CJP) की ओर से आयोजित किया जाएगा और आम आदमी पार्टी के सदस्य भी इसमें शामिल होंगे।
चुनाव आयोग की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। चुनाव आयोग का पक्ष रहा है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण मृत, स्थानांतरित, दोहराव वाले और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने तथा पात्र नागरिकों के नाम शामिल करने के लिए किया जाता है।रिपोर्टों के अनुसार, आयोग ने पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटने की स्थिति में उन्हें वापस जोड़ने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। संजय सिंह की मांगों ने चुनाव आयोग की जवाबदेही, मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और विपक्ष की मांगों को लेकर आगे क्या राजनीतिक एवं संवैधानिक कदम उठाए जाते हैं।
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