New Delhi ,नई दिल्ली: राजधानी के प्रतिष्ठित सफदरजंग अस्पताल ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में इतिहास रचा है। अस्पताल में पहली बार 11 साल के बच्चे का सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है। यह मरीज न केवल अपने उम्र के हिसाब से बल्कि स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण भी चुनौतीपूर्ण मामला था।
डॉक्टर्स की टीम ने लगभग 6 घंटे तक चलने वाली जटिल सर्जरी के बाद बच्चे की किडनी का सफल ट्रांसप्लांट किया। सर्जरी के बाद बच्चे की हालत स्थिर है और वह सामान्य गतिविधियों की ओर लौटने लगा है। अस्पताल के वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट और ट्रांसप्लांट टीम के हेड डॉक्टर आर.के. वर्मा ने बताया कि यह ट्रांसप्लांट टीम के लिए तकनीकी और मनोवैज्ञानिक रूप से दोनों ही दृष्टि से चुनौतीपूर्ण था।
डॉक्टर वर्मा ने कहा, “11 साल का बच्चा होने के नाते, उसकी किडनी का साइज और शरीर की प्रतिक्रिया एक मुख्य चुनौती थी। इसके अलावा, लंबे समय तक चल रही किडनी की बीमारी ने भी बच्चे के शरीर को कमजोर कर रखा था। हमारी पूरी टीम ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि सर्जरी पूरी तरह सुरक्षित और सफल हो।”
इस ट्रांसप्लांट में माता-पिता की भी अहम भूमिका रही। बच्चे के माता-पिता ने दाता के रूप में योगदान दिया। अस्पताल के बायोलॉजिकल टेस्ट और मैचिंग प्रोसेस के बाद बच्चे के पिता को डोनर के रूप में चुना गया। सर्जरी से पहले और बाद में माता-पिता का मानसिक और भावनात्मक समर्थन बच्चे के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।
सफदरजंग अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि यह ट्रांसप्लांट अस्पताल की किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट के लिए एक मील का पत्थर है। इससे पहले, इस उम्र के मरीजों के लिए इतनी जटिल ट्रांसप्लांट सर्जरी का सफल रिकॉर्ड नहीं था। इससे यह दिखाता है कि अस्पताल ने नई तकनीकों और मेडिकल एक्सपर्टाइज के मामले में कितनी प्रगति की है।
नेशनल ट्रांसप्लांट प्रोग्राम के अनुसार, भारत में हर साल लाखों लोग किडनी की बीमारियों से जूझ रहे हैं, और बहुत कम मामलों में बच्चों के लिए सफल ट्रांसप्लांट होता है। ऐसे मामलों में बच्चों की शरीर और इम्यून सिस्टम की संवेदनशीलता को ध्यान में रखना बेहद जरूरी होता है। सफदरजंग अस्पताल की टीम ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार यह प्रक्रिया पूरी की।
बच्चे की रिकवरी अब तेज़ी से हो रही है। डॉक्टरों के अनुसार, अगले कुछ हफ्तों में वह सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है। उन्हें दवा और नियमित चेकअप के माध्यम से स्वास्थ्य बनाए रखने की सलाह दी गई है। अस्पताल ने यह भी बताया कि इस प्रकार के ट्रांसप्लांट बच्चों की लंबी उम्र और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मददगार साबित होते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सफलता न केवल इस बच्चे के लिए, बल्कि देश में बच्चों के किडनी ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में नई संभावनाओं के लिए भी प्रेरणा है। इससे बच्चों के इलाज में नई तकनीकों और प्रोटोकॉल्स को अपनाने का मार्ग भी खुला है।
अस्पताल प्रशासन ने कहा कि भविष्य में ऐसे और भी जटिल मामलों को संभालने के लिए संसाधनों और विशेषज्ञों को और बढ़ाया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि बच्चों और किशोर मरीजों के लिए ट्रांसप्लांट सुविधाओं को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में काम जारी रहेगा।
सफदरजंग अस्पताल की इस सफलता ने देशभर में बच्चों के इलाज और ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में उम्मीदों की नई किरण जलाई है। यह एक प्रेरक उदाहरण है कि सही विशेषज्ञता, तकनीक और सहायक परिवार के समर्थन से जीवन को नई दिशा दी जा सकती है।