New Delhi नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में घने कोहरे के बीच वायु गुणवत्ता ‘गंभीर प्लस’ स्तर पर पहुंच गई है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट सोमवार को प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करेगा। सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर प्रकाशित वाद सूची के अनुसार, न्यायमूर्ति अभय एस.ओका और ए.जी. मसीह की पीठ 18 नवंबर को लोकप्रिय एम.सी. मेहता मामले की सुनवाई करेगी। दिल्ली की वायु गुणवत्ता सोमवार सुबह 7 बजे 481 पर पहुंच गई, जिसके साथ वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) ‘गंभीर प्लस’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इस खतरनाक स्तर से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, खासकर कमजोर आबादी के लिए।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने घने कोहरे के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कोहरे ने दृश्यता को काफी कम करके स्थिति को और खराब कर दिया है। कोहरे और जहरीली हवा के संयोजन ने उड़ान संचालन को प्रभावित किया है, जिससे व्यापक देरी हो रही है। प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कड़े कदम उठाने के बावजूद दिल्ली में धुंध छाई हुई है और स्थानीय लोग शहर को "गैस चैंबर" बता रहे हैं। स्थिति और खराब हो गई है और नागरिकों को जहरीली हवा में सांस लेने में दिक्कत हो रही है। ठंड की लहर भी आ गई है, जिससे स्वास्थ्य संकट और बढ़ गया है।
राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। उसने पटाखों पर प्रतिबंध लागू न करने के लिए दिल्ली सरकार की खिंचाई की और दिल्ली सरकार और पुलिस कमिश्नर से हलफनामा मांगा है, जिसमें इस प्रतिबंध को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा हो। इसने दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से अगले साल प्रदूषण कम करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में बताने को कहा है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा राज्यों से हलफनामा दाखिल कर अपने अधिकार क्षेत्र में पराली जलाने की स्थिति के बारे में बताने को कहा है। इससे पहले रविवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने खराब होती हवा के बीच सोमवार से दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान ('गंभीर+' वायु गुणवत्ता) के चरण-IV के तहत सभी कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया था। यह निर्णय जीआरएपी के संचालन के लिए गठित उप-समिति द्वारा दिल्ली-एनसीआर में प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर बुलाई गई आपातकालीन बैठक के बाद लिया गया।
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