नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (GST) से जुड़े अपराधों के लिए सजा के प्रावधानों में महत्वपूर्ण बदलाव का फैसला किया गया है। केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों की भागीदारी वाली जीएसटी काउंसिल ने कर चोरी से संबंधित मामलों में सजा के नियमों को संशोधित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत पहले लागू 'जेल और जुर्माना' के प्रावधान को बदलकर 'जेल या जुर्माना या दोनों' करने का फैसला लिया गया है। इस बदलाव के अनुसार, जीएसटी चोरी की रकम 10 करोड़ रुपये से अधिक होने पर अधिकतम पांच साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। वहीं, पांच करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 10 करोड़ रुपये से कम की कर चोरी के मामलों में अधिकतम दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान निर्धारित किया गया है।

जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में लिए गए इस निर्णय को कर संबंधी अपराधों के लिए निर्धारित दंड व्यवस्था में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। नए प्रस्ताव के अनुसार, संबंधित मामलों में जेल और जुर्माने को अनिवार्य रूप से एक साथ लागू करने के बजाय दोनों में से किसी एक या दोनों दंडों का विकल्प रखा गया है।

जेल और जुर्माने के नियम में किया गया बदलाव

जीएसटी काउंसिल के फैसले में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन सजा के प्रावधान की भाषा से जुड़ा है। पहले संबंधित प्रावधान में 'जेल और जुर्माना' का उल्लेख था, जबकि संशोधित व्यवस्था में इसे 'जेल या जुर्माना या दोनों' कर दिया गया है।

इस बदलाव का अर्थ है कि संबंधित कानूनी प्रावधान के अंतर्गत किसी दोषी व्यक्ति को केवल जेल, केवल जुर्माना अथवा दोनों प्रकार की सजा दी जा सकती है। हालांकि, किसी विशेष मामले में कौन-सी सजा लागू होगी, यह संबंधित कानून और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

जीएसटी से जुड़े अपराधों में कर चोरी की राशि महत्वपूर्ण आधार है। इसी आधार पर अलग-अलग श्रेणियों के लिए अधिकतम कारावास की अवधि निर्धारित करने का निर्णय लिया गया है।

10 करोड़ से ज्यादा की GST चोरी पर पांच साल की सजा

काउंसिल के निर्णय के अनुसार, जिन मामलों में जीएसटी चोरी की रकम 10 करोड़ रुपये से अधिक होगी, उनमें अधिकतम पांच साल तक की जेल का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ जुर्माना या जेल और जुर्माना दोनों की सजा भी संभव होगी।

इसका मतलब यह नहीं है कि 10 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी के प्रत्येक मामले में पांच साल की जेल अनिवार्य होगी। पांच साल कारावास की अधिकतम निर्धारित सीमा है।

किसी मामले में वास्तविक सजा अपराध की प्रकृति, लागू कानूनी प्रावधानों और न्यायिक निर्णय के आधार पर निर्धारित होगी। इस प्रकार अधिकतम कारावास की सीमा तय करने के साथ दंड के स्वरूप में भी विकल्प उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

पांच से 10 करोड़ रुपये की कर चोरी पर दो साल तक जेल

जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में पांच करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 10 करोड़ रुपये से कम की कर चोरी के मामलों के लिए भी सजा का प्रावधान तय किया गया है।

इस श्रेणी में आने वाले मामलों में अधिकतम दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। इस प्रकार कर चोरी की रकम के आधार पर पांच करोड़ से 10 करोड़ रुपये के बीच और 10 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों के लिए अलग-अलग अधिकतम कारावास की सीमा रखी गई है।

दोनों श्रेणियों में 'जेल या जुर्माना या दोनों' का विकल्प प्रस्तावित व्यवस्था की प्रमुख विशेषता है।

व्यापारियों और करदाताओं के लिए क्या मायने हैं?

जीएसटी से जुड़े दंडात्मक प्रावधानों में बदलाव का असर व्यापारियों, कारोबारियों और अन्य करदाताओं पर पड़ सकता है। विशेष रूप से उन मामलों में, जहां कर संबंधी विवाद आपराधिक मुकदमे तक पहुंचते हैं, संशोधित व्यवस्था में अदालत को सजा निर्धारित करने का अधिक विवेकाधिकार मिलेगा।

काउंसिल ने जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियां हटाने और आपराधिक मुकदमा चलाने की न्यूनतम कर-राशि सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की भी सिफारिश की है। इसका उद्देश्य कर अनुपालन को सरल बनाना और दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया में बदलाव करना है।

 हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि कर चोरी को वैध मान लिया गया है। करदाताओं को निर्धारित नियमों के अनुसार जीएसटी का भुगतान करना होगा। कर चोरी के मामलों में लागू कानून के तहत कार्रवाई और दंड का प्रावधान बना रहेगा।

अदालत के विवेक पर निर्भर होगी सजा

संशोधित व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि किसी मामले में जेल, जुर्माना या दोनों में से कौन-सी सजा दी जाएगी, इसका निर्णय अदालत कर सकेगी। इस बदलाव के साथ न्यूनतम कारावास के प्रावधान को हटाने की भी सिफारिश की गई है।

 जीएसटी काउंसिल के फैसले कर प्रशासन में सुधार की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। परिषद ने पंजीकरण, रिफंड, नोटिस और अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने से संबंधित कई अन्य सिफारिशें भी की हैं।

जीएसटी व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम

केंद्र और राज्यों की भागीदारी वाली जीएसटी काउंसिल देश की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाला मंच है। इसकी 57वीं बैठक में करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और कारोबार से जुड़े अनुपालन बोझ को कम करने पर जोर दिया गया।

कर चोरी से जुड़े अपराधों के लिए सजा की नई सीमाएं और जेल या जुर्माने का विकल्प इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि काउंसिल की सिफारिश और कानून में उसका लागू होना अलग-अलग चरण हैं। संशोधित दंड व्यवस्था का वास्तविक प्रभाव संबंधित कानूनी संशोधनों और उनके लागू होने की तारीख पर निर्भर करेगा।

इस फैसले से जीएसटी अपराधों के मामलों में सजा निर्धारित करने की व्यवस्था में बदलाव का रास्ता खुला है। साथ ही, कर अनुपालन सुनिश्चित करने और दंडात्मक प्रावधानों को अधिक स्पष्ट बनाने पर ध्यान दिया गया है।

Tags: