नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो प्रमुख कार्यकर्ताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को न्यायिक हिरासत से रिहा करने के आदेश के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दोनों को बधाई दी है। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने दोनों कार्यकर्ताओं की रिहाई का आदेश दिया। करीब सात दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद दोनों को राहत मिली है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उनके संघर्ष का समर्थन किया और कहा कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर दी बधाई
सीजेपी नेताओं की रिहाई के आदेश के बाद अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आशुतोष रांका और सौरव दास को बधाई देते हुए उनके आंदोलन के प्रति समर्थन जताया।केजरीवाल ने लिखा, "आशुतोष और सौरव को जमानत मिलने पर बहुत-बहुत बधाई। देश के लिए इसी तरह अपनी लड़ाई जारी रखें। पूरा देश आपके साथ है।"केजरीवाल की इस प्रतिक्रिया को सीजेपी कार्यकर्ताओं के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं के आंदोलन और गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।
SEM कोर्ट ने दिया रिहाई का आदेश
दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बुधवार को दोनों नेताओं की ओर से प्रस्तुत जमानती दस्तावेज स्वीकार करते हुए उनकी रिहाई का आदेश जारी किया।इससे पहले दिल्ली पुलिस ने दोनों की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने का अनुरोध किया था। हालांकि, अदालत ने प्रस्तुत जमानतदारों और संबंधित दस्तावेजों पर विचार करने के बाद रिहाई का आदेश दिया।इस आदेश के बाद दोनों नेताओं के तिहाड़ जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया।
13 अक्टूबर को जंतर-मंतर से हुई थी गिरफ्तारी
दरअसल, सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था।पुलिस का आरोप था कि दोनों नेताओं ने प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करते हुए जंतर-मंतर के बंद प्रवेश द्वार पर चढ़कर प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय ध्वज फहराया।इसके बाद 14 अक्टूबर को दोनों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। अदालत ने शुरुआत में उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।19 अक्टूबर को हिरासत की अवधि समाप्त होने पर इसे दो दिन और बढ़ा दिया गया। इस फैसले के बाद सीजेपी के नेताओं और समर्थकों ने कानूनी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए थे।
दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंचे थे दोनों नेता
न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए सौरव दास और आशुतोष रांका ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था।बुधवार को न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने सवाल उठाया कि जब याचिकाकर्ताओं के पास संबंधित आदेश के खिलाफ वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध थे, तो उन्होंने सीधे हाईकोर्ट में याचिका क्यों दायर की।सुनवाई के दौरान अदालत ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बांड की शर्तों के कथित उल्लंघन पर भी सवाल किए।इसके बाद याचिकाकर्ताओं के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
जमानती दस्तावेज स्वीकार होने के बाद मिली राहत
हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद मामला स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष आया। दोनों नेताओं की ओर से जमानतदार प्रस्तुत किए गए और आवश्यक दस्तावेज अदालत के सामने रखे गए।सुनवाई के बाद एसईएम ने जमानती दस्तावेज स्वीकार कर लिए और दोनों की रिहाई का आदेश जारी कर दिया।रिहाई का आदेश न्यायिक हिरासत से संबंधित था। इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रदर्शन से जुड़े सभी आरोप या कानूनी मामले समाप्त हो गए हैं।
सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर जारी है विवाद
कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता पिछले कुछ दिनों से चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।संगठन के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी प्रदर्शन किया था। इस दौरान जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम के बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया था।दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और प्रतिबंधात्मक आदेशों का पालन जरूरी था। दूसरी ओर, सीजेपी कार्यकर्ताओं ने हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई का विरोध किया है।
केजरीवाल के बयान के बाद राजनीतिक चर्चा तेज
आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई पर अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रिया ने इस मामले को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में ला दिया है।केजरीवाल ने दोनों को बधाई देते हुए उनके आंदोलन को समर्थन दिया है। वहीं, अदालत के आदेश से स्पष्ट है कि फिलहाल दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत से राहत मिली है।अब प्रदर्शन से जुड़े अन्य मामलों में होने वाली कानूनी कार्यवाही और संबंधित पक्षों के अगले कदमों पर नजर रहेगी।