नई दिल्ली। भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख ठिकाने मरकज सुभानअल्लाह में व्यापक पुनरुद्धार किए जाने की जानकारी सामने आई है। हमले के एक साल से अधिक समय बाद सामने आए नए फुटेज में परिसर को पहले की स्थिति में लौटाने के लिए बड़े स्तर पर निर्माण कार्य किए जाने के संकेत मिलते हैं।

नए दृश्यों के मुताबिक, परिसर में क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के साथ-साथ कई स्थानों पर नए सिरे से निर्माण किया गया है। गुंबदों का पुनर्निर्माण किया गया है और इमारतों पर नया प्लास्टर तथा पेंट किया गया है। परिसर के भीतर नई मार्बल फ्लोरिंग भी दिखाई दे रही है। इन बदलावों के बाद हमले के दौरान हुए नुकसान के कई पुराने निशान अब दिखाई नहीं देते।

हमले के बाद बड़े पैमाने पर हुआ निर्माण

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस परिसर को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद यहां के क्षतिग्रस्त हिस्सों को हटाकर उन्हें दोबारा तैयार किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। नए फुटेज में परिसर के मुख्य हिस्से अपेक्षाकृत व्यवस्थित और नए स्वरूप में नजर आते हैं।

मुख्य हॉल के भीतर हुए विस्फोट से बने गहरे गड्ढों को कंक्रीट से भर दिया गया है। इसके बाद फर्श को दोबारा तैयार किया गया। जहां पहले हमले के निशान और मलबा दिखाई देता था, वहां अब निर्माण सामग्री और नई फिनिशिंग नजर आती है।

परिसर में पुराने ढांचे की मरम्मत के साथ-साथ कई हिस्सों में नए निर्माण के संकेत भी दिखाई देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि नुकसान की भरपाई के लिए सीमित मरम्मत के बजाय व्यापक पुनर्निर्माण का काम किया गया।

गुंबद और बाहरी हिस्से भी बदले गए

मरकज सुभानअल्लाह परिसर की पहचान माने जाने वाले गुंबदों को भी दोबारा तैयार किया गया है। क्षतिग्रस्त संरचनाओं की जगह नए निर्माण के बाद उन्हें नया प्लास्टर और पेंट दिया गया है।

परिसर के बाहरी हिस्सों को भी नए सिरे से तैयार किए जाने के संकेत हैं। निर्माण के बाद इमारत का स्वरूप काफी हद तक बदला हुआ नजर आता है। पुराने नुकसान के निशानों को नई निर्माण सामग्री और फिनिशिंग से ढक दिया गया है।

अल-साबिर मदरसे और आवासीय हिस्से में भी बदलाव

फुटेज में अल-साबिर मदरसे और शीर्ष कमान से जुड़े आवासीय हिस्से में भी बड़े बदलाव नजर आते हैं। हमले के दौरान क्षतिग्रस्त हुई कुछ इमारतों को कथित तौर पर ध्वस्त कर उनकी जगह नए ढांचे तैयार किए गए हैं।

इससे संकेत मिलता है कि पुनरुद्धार का काम केवल मुख्य परिसर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के उन हिस्सों को भी दोबारा विकसित किया गया जिन्हें हमले में नुकसान पहुंचा था।

क्षतिग्रस्त ढांचे को हटाकर नए निर्माण किए जाने के बाद परिसर का बड़ा हिस्सा फिर से उपयोग योग्य स्थिति में दिखाई दे रहा है। यह घटनाक्रम सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है, क्योंकि किसी प्रतिबंधित आतंकी संगठन के प्रमुख ठिकाने से जुड़े परिसर का दोबारा सक्रिय होना सुरक्षा संबंधी सवाल खड़े करता है।

पुराने नुकसान के निशान मिटाने की कोशिश

नए फुटेज में सबसे प्रमुख बदलाव यह है कि हमले के बाद दिखाई देने वाले मलबे और संरचनात्मक क्षति के कई निशान अब नजर नहीं आते। मुख्य हॉल में बने गड्ढों को भरकर फर्श को नए सिरे से तैयार किया गया है।

इसी तरह दीवारों पर नया प्लास्टर और पेंट किया गया है। नई मार्बल फ्लोरिंग और अन्य सजावटी कार्यों से परिसर को नया रूप दिया गया है। इस तरह व्यापक निर्माण के जरिए हमले से हुई क्षति को काफी हद तक छिपा दिया गया है।

विशेषज्ञों के लिए ऐसे पुनर्निर्माण की निगरानी इसलिए महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि इससे किसी परिसर की वास्तविक स्थिति और उसके इस्तेमाल के स्वरूप को समझने में मदद मिलती है।

परिसर के दोबारा सक्रिय होने के संकेत

नए दृश्यों में परिसर को काफी हद तक व्यवस्थित और उपयोग की स्थिति में दिखाया गया है। इससे वहां गतिविधियों के दोबारा शुरू होने के संकेत मिलते हैं। हालांकि, परिसर में मौजूदा गतिविधियों की वास्तविक प्रकृति और पैमाने को स्वतंत्र रूप से स्थापित करने के लिए अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता होगी।

जैश-ए-मोहम्मद को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद की प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की सूची में रखा गया है। ऐसे संगठन से जुड़े किसी प्रमुख परिसर का पुनर्निर्माण अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी प्रयासों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम घटनाक्रम

मरकज सुभानअल्लाह के पुनर्निर्माण की खबर ऐसे समय में सामने आई है जब भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में सीमा पार मौजूद आतंकी ढांचे को लगातार गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में देखता रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्षतिग्रस्त हुए इस परिसर का बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण यह सवाल भी उठाता है कि आतंकी ढांचे के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद ऐसे ठिकानों की निगरानी किस तरह जारी रखी जाती है। पुनर्निर्माण के साथ यदि वहां गतिविधियां भी दोबारा शुरू होती हैं तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसकी निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

फिलहाल सामने आए फुटेज से इतना स्पष्ट है कि मरकज सुभानअल्लाह परिसर में बड़े पैमाने पर निर्माण और सौंदर्यीकरण का काम किया गया है। गुंबदों की मरम्मत, नया प्लास्टर-पेंट, मार्बल फ्लोरिंग, विस्फोट से बने गड्ढों को कंक्रीट से भरना और क्षतिग्रस्त इमारतों की जगह नए ढांचे तैयार करना इस पुनरुद्धार के प्रमुख हिस्से हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सीमा पार आतंकी ढांचे की गतिविधियों और उनके पुनर्गठन पर नजर रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। साथ ही यह सवाल भी महत्वपूर्ण बना हुआ है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित संगठन से जुड़े ऐसे परिसरों के पुनर्निर्माण और संभावित इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

Tags: