नई दिल्ली। UGC-NET जून 2026 परीक्षा को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट को जानकारी दी कि प्रश्नपत्रों में गलतियों की शिकायतों के बाद तीन विषयों की दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। इनमें समाजशास्त्र (Sociology), अंग्रेजी और कॉमर्स विषय शामिल हैं।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि परीक्षा में सामने आई शिकायतों के बाद संबंधित विषयों की दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद एक उम्मीदवार की ओर से दायर याचिका का कोर्ट ने निपटारा कर दिया।

यह याचिका उस उम्मीदवार ने दायर की थी, जिसने 30 जून को समाजशास्त्र विषय की परीक्षा दी थी। याचिकाकर्ता ने प्रश्नपत्र में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों का हवाला देते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की थी। साथ ही उसने जांच पूरी होने और दोबारा परीक्षा आयोजित होने तक परीक्षा परिणाम जारी करने पर रोक लगाने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि अधिकारियों ने पहले ही तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला ले लिया है। उन्होंने कहा कि अब याचिका में उठाए गए मुद्दों का समाधान हो चुका है।

तुषार मेहता ने बताया कि UGC-NET जून 2026 के अंग्रेजी और कॉमर्स विषय के पेपर की दोबारा परीक्षा 9 सितंबर को आयोजित की जाएगी, जबकि समाजशास्त्र विषय की परीक्षा 10 सितंबर को होगी।

केंद्र की दलीलों को सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल के बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए कहा कि दोबारा परीक्षा आयोजित करने के फैसले के बाद याचिका में की गई मांग अब शेष नहीं रह गई है।

कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों द्वारा आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं, इसलिए इस मामले में आगे किसी आदेश की आवश्यकता नहीं है।

UGC-NET परीक्षा देशभर में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) की पात्रता निर्धारित करने के लिए आयोजित की जाती है। लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं।

परीक्षा के प्रश्नपत्रों में किसी भी तरह की गलती या अनियमितता उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन जाती है, क्योंकि इसका सीधा असर उनके करियर और भविष्य की योजनाओं पर पड़ता है।

समाजशास्त्र सहित तीन विषयों की दोबारा परीक्षा कराने का फैसला ऐसे उम्मीदवारों के लिए राहत माना जा रहा है, जिन्होंने प्रश्नपत्र में गलतियों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।

केंद्र सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना है। इसी वजह से शिकायतों की समीक्षा के बाद प्रभावित विषयों में दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया।

उम्मीदवारों को अब नई परीक्षा तारीखों के अनुसार तैयारी करनी होगी। अधिकारियों की ओर से परीक्षा से संबंधित अन्य दिशा-निर्देश और जानकारी समय पर जारी किए जाने की संभावना है।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है। किसी भी तरह की तकनीकी या प्रश्नपत्र संबंधी समस्या सामने आने पर समय रहते समाधान करना उम्मीदवारों के हित में होता है।

फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद UGC-NET जून 2026 से जुड़े इस मामले का न्यायिक पक्ष समाप्त हो गया है। अब उम्मीदवारों की नजर दोबारा होने वाली परीक्षाओं और आगे जारी होने वाली प्रक्रिया पर है।

 

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