नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को केवल पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सीमाएं निश्चित हो सकती हैं, लेकिन खतरों का स्वरूप और उनका दायरा लगातार बदलता रहता है। ऐसे में देश को अपनी रक्षा तैयारियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप मजबूत करना होगा।News18 DefCon 2026 में बोलते हुए राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा को व्यापक नजरिए से देखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा चुनौतियों को केवल सीमा पर होने वाले पारंपरिक सैन्य खतरों से जोड़कर देखना पर्याप्त नहीं है। नई तकनीक, साइबर क्षेत्र, अर्थव्यवस्था और दूसरे माध्यमों से भी किसी देश के हितों को प्रभावित किया जा सकता है।
सीमाएं तय लेकिन खतरे बदलते रहते हैं
रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को केवल भौगोलिक सीमाओं के नजरिए से देखना सही नहीं होगा। उनका कहना था कि सीमाएं निर्धारित होती हैं, लेकिन खतरे लगातार बदलते रहते हैं। इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए यह समझना जरूरी है कि सुरक्षा चुनौतियां किस तरह बदल रही हैं।उनके मुताबिक, आधुनिक दौर में खतरे का स्रोत हमेशा प्रत्यक्ष सैन्य हमला ही हो, यह जरूरी नहीं है। किसी देश की अर्थव्यवस्था, तकनीकी व्यवस्था और महत्वपूर्ण प्रणालियों को प्रभावित करने वाले कदम भी राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में आते हैं। इसी कारण रक्षा तैयारियों को भी बदलती परिस्थितियों के अनुसार विकसित करना जरूरी है।
भविष्य के लिए तैयार सेना पर जोर
राजनाथ सिंह ने भारतीय सशस्त्र बलों को भविष्य के लिए तैयार रखने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि सुरक्षा से जुड़े खतरों की प्रकृति तेजी से बदल रही है और इसके लिए सैन्य तैयारियों के साथ तकनीकी क्षमता को भी लगातार मजबूत करना आवश्यक है।आधुनिक युद्ध में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर तकनीक, अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों और अत्याधुनिक हथियारों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे माहौल में किसी भी देश की रक्षा क्षमता केवल सैनिकों और पारंपरिक हथियारों की संख्या से तय नहीं होती, बल्कि तकनीकी बढ़त और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।
सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का भी संबंध
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में सुरक्षा के आर्थिक पहलू की तरफ भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि शत्रुतापूर्ण तत्व किसी देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। इस वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा की तैयारी को पारंपरिक सैन्य चिंताओं से आगे देखने की जरूरत है।उनका यह बयान राष्ट्रीय सुरक्षा की उस व्यापक अवधारणा की ओर संकेत करता है, जिसमें सीमा सुरक्षा के साथ आर्थिक सुरक्षा, तकनीकी सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा जैसे पहलू भी शामिल होते हैं।डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के कारण साइबर हमले जैसी चुनौतियां भी देशों की सुरक्षा रणनीतियों में महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर चुकी हैं।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का उल्लेख
राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने रक्षा बजट और घरेलू रक्षा उत्पादन में पिछले वर्षों के दौरान हुई बढ़ोतरी को देश की सुरक्षा क्षमता मजबूत करने से जोड़ा। उनके अनुसार रक्षा बजट लगभग ₹2.5 लाख करोड़ से बढ़कर करीब ₹7.5 लाख करोड़ तक पहुंचा है, जबकि स्वदेशी रक्षा उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।सरकार रक्षा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने को अपनी रक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताती रही है। इसके तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी, स्वदेशी हथियार प्रणालियों के विकास और रक्षा निर्यात बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सैन्य ताकत के साथ कूटनीति भी जरूरी
राजनाथ सिंह ने बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सैन्य तैयारियों के साथ कूटनीति, तकनीक और रक्षा आत्मनिर्भरता के संयोजन की बात कही। उन्होंने भारत की रणनीतिक सोच में बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अब केवल खतरों को सीमित करने की रणनीति तक नहीं रह सकता और प्रभावी प्रतिरोध क्षमता भी जरूरी है।उनके संबोधन में इस बात पर जोर रहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल रक्षा मंत्रालय या सशस्त्र बलों से जुड़ा विषय नहीं है। आधुनिक सुरक्षा वातावरण में तकनीक, अर्थव्यवस्था, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा और रणनीतिक साझेदारियां भी इसमें भूमिका निभाती हैं।
बदल रहा आधुनिक युद्ध का स्वरूप
दुनिया में सैन्य संघर्षों का स्वरूप पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदला है। पारंपरिक हथियारों के साथ ड्रोन, साइबर हमले, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सूचना आधारित रणनीतियों का इस्तेमाल बढ़ा है। इसी पृष्ठभूमि में रक्षा मंत्री ने भारत की रक्षा तैयारियों को भविष्य के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया।उनके मुताबिक, किसी चुनौती के सामने आने के बाद तैयारी शुरू करने के बजाय संभावित खतरों के स्वरूप को पहले समझना और उसी के अनुसार क्षमता विकसित करना जरूरी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण की जरूरत
News18 DefCon 2026 में राजनाथ सिंह के संबोधन का मुख्य फोकस राष्ट्रीय सुरक्षा की बदलती परिभाषा पर रहा। उन्होंने कहा कि भारत को यह समझना होगा कि आज सुरक्षा चुनौती किसी एक क्षेत्र या भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं रह गई है।रक्षा मंत्री ने बदलती चुनौतियों के अनुरूप सैन्य तैयारी, आधुनिक तकनीक और स्वदेशी रक्षा क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए खतरे के बदलते स्वरूप को समझना आवश्यक है।इस तरह राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भविष्य की सुरक्षा रणनीति में सीमा की रक्षा के साथ-साथ तकनीकी, आर्थिक और दूसरे उभरते खतरों से निपटने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी। उनके मुताबिक, बदलते सुरक्षा माहौल के अनुरूप रक्षा तैयारियों को लगातार विकसित करना देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
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