नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व अभिनेत्री अनीता आडवाणी की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के साथ अपने रिश्ते को शादी जैसा दर्जा देने की मांग की थी। जस्टिस एम.एम. सुंदेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई करने का कोई आधार नहीं है और इसे "विलासितापूर्ण मुकदमेबाजी" (luxury litigation) करार दिया।
आडवाणी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा तब खटखटाया, जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने उनके उस दावे को ठुकरा दिया था, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि उनके और दिवंगत अभिनेता के बीच का रिश्ता शादी जैसा था और वह उनकी विधवा हैं। 1 अप्रैल को दिए अपने फैसले में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनके मुकदमे को खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि यह दावा कानूनन मान्य नहीं है, क्योंकि डिंपल कपाड़िया के साथ राजेश खन्ना की शादी उस समय भी कायम थी।
जस्टिस शर्मिला यू. देशमुख की सिंगल-जज बेंच ने कहा कि किसी रिश्ते को शादी जैसा दर्जा देने के लिए, सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इन शर्तों में यह भी शामिल है कि दोनों पक्षों का कानूनी रूप से शादी करने के योग्य होना आवश्यक है।
हाई कोर्ट ने 'डी. वेलुसामी बनाम डी. पचैयाम्मल' मामले में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि ऐसे रिश्ते में शामिल पक्षों का कानूनी रूप से शादी करने के योग्य होना जरूरी है, जिसमें उनका अविवाहित होना भी शामिल है। हाई कोर्ट ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए मापदंडों से पता चलता है कि इस तरह के रिश्ते को शादी या वैवाहिक संबंध के बराबर माना जाने के लिए, उसे एक वैध शादी की जरूरी शर्तों को पूरा करना होगा, भले ही वे औपचारिक रूप से विवाहित न हों।"
कोर्ट ने आगे कहा कि आडवाणी के मामले में ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, क्योंकि डिंपल कपाड़िया के साथ राजेश खन्ना की शादी खत्म नहीं हुई थी। हाई कोर्ट ने आडवाणी के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि उनके रिश्ते को शादी जैसा दर्जा देने के दावे पर, उन्हें राजेश खन्ना की विधवा घोषित करने की मांग से अलग हटकर विचार किया जा सकता है।
फैसले में कहा गया, "एक-विवाही (monogamous) या बहु-विवाही (polygamous) लिव-इन रिलेशनशिप के बीच का अंतर, 'डी. वेलुसामी बनाम डी. पचैयाम्मल' मामले में तय किए गए मापदंडों को पूरा करने की अनिवार्यता को खत्म नहीं कर सकता। इस मामले में वे शर्तें पूरी नहीं होती हैं।" अडवाणी ने हाई कोर्ट के सामने दलील दी थी कि वह और खन्ना कई सालों तक साथ रहे थे और समाज के सामने उनके रिश्ते का स्वरूप शादी जैसा था।
उन्होंने यह भी दावा किया था कि वे एक ही घर में रहते थे और साथ मिलकर त्योहार मनाते थे। हालाँकि, हाई कोर्ट ने माना कि इस अपील में कोई दम नहीं है और उसने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें 'कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर' (CPC) के ऑर्डर VII नियम 11 के तहत मामले को शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया, "पहली अपील में कोई दम नहीं है। नतीजतन, अपील खारिज की जाती है।" अडवाणी ने 2015 में कपाड़िया, उनकी बेटियों ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना, तथा दामाद राजीव भाटिया के खिलाफ मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने दिवंगत अभिनेता के साथ अपने रिश्ते को मान्यता देने की मांग की थी।
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