नई दिल्ली। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के विरोध-प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन से जुड़े बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत को उन ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत है, जो देश में अराजकता फैलाने और विकास की गति को प्रभावित करने का प्रयास कर सकती हैं। चंद्रशेखर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत ने आर्थिक और विकास के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन किया है। ऐसे में देश की स्थिरता और प्रगति को बनाए रखना बेहद जरूरी है।राजीव चंद्रशेखर की यह प्रतिक्रिया आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन के बाद सामने आई है। भागवत ने मंगलवार को नागपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश में हुई राजनीतिक उथल-पुथल का जिक्र करते हुए भारत में भी अस्थिरता पैदा करने के प्रयासों को लेकर चिंता व्यक्त की थी।
मोहन भागवत के बयान का किया समर्थन
केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने देश में शांति, स्थिरता और विकास को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।चंद्रशेखर के अनुसार, भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऐसे समय में अराजकता फैलाने वाली गतिविधियां देश की प्रगति के लिए चुनौती बन सकती हैं।उन्होंने कहा कि भारत को उन तत्वों के प्रति सतर्क रहना चाहिए, जो राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता पैदा करके विकास की प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास कर सकते हैं।
वैश्विक संकट के बावजूद भारत का बेहतर प्रदर्शन
राजीव चंद्रशेखर ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया के कई देशों को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। इन घटनाओं के कारण व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों में अनिश्चितता बनी रही है।इसके बावजूद भारत ने अपने समकक्ष देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। चंद्रशेखर ने इसे देश की आर्थिक क्षमता और विकास की दिशा में उठाए गए कदमों से जोड़कर देखा।
भागवत ने फ्रांस और बांग्लादेश की घटनाओं का किया जिक्र
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी के अवसर पर अपने संबोधन में दुनिया के विभिन्न देशों में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक बदलावों का उल्लेख किया।उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश की घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल सत्ता परिवर्तन से किसी देश की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित नहीं होता।भागवत ने दावा किया कि भारत में भी ऐसी कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन देश की सामाजिक शक्ति और एकजुटता के कारण अस्थिरता पैदा करने के प्रयास सफल नहीं होंगे।उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ दशकों में दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से प्रगति की है।
विरोध-प्रदर्शनों को लेकर दी चेतावनी
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध-प्रदर्शन स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समस्याओं का समाधान होना चाहिए।उन्होंने आगाह किया कि आंदोलनों के माध्यम से समाज में वैमनस्य और विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए। विरोध जताने वालों, राजनीतिक नेतृत्व और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले प्रशासन को संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।भागवत ने सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं का समाधान संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
सत्ता परिवर्तन पर भागवत का बड़ा बयान
आरएसएस प्रमुख ने भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिशों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि ऐसी गतिविधियां सफल नहीं होंगी। उन्होंने देश की सामाजिक एकजुटता और संस्थागत मजबूती को महत्वपूर्ण बताया।भागवत ने कहा कि राजनीतिक बदलाव अपने आप में सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। उनके अनुसार, समाज की सामूहिक प्रगति और राष्ट्रीय एकता से ही स्थायी समाधान हासिल किए जा सकते हैं।हालांकि, भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से सरकार बदलना नागरिकों के अधिकारों का हिस्सा है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच राष्ट्रीय स्थिरता पर जोर
राजीव चंद्रशेखर का बयान ऐसे समय आया है, जब देश में विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक बदलाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा तेज है।भाजपा नेताओं ने अराजकता और राजनीतिक अस्थिरता की आशंका जताई है, जबकि विरोध-प्रदर्शनों में शामिल समूह अपनी मांगों को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं।फिलहाल राजीव चंद्रशेखर ने मोहन भागवत के विचारों का समर्थन करते हुए देश की स्थिरता, सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता देने की बात कही है। उनका कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की प्रगति को बनाए रखने के लिए सतर्कता और राष्ट्रीय एकजुटता आवश्यक है।