नई दिल्ली। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे आदिवासियों को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने समर्थन दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि वे प्रभावित आदिवासी समुदायों के संघर्ष में उनके साथ खड़े हैं और सरकार पर दबाव बनाने के लिए जल्द ही उस क्षेत्र का दौरा करेंगे।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने परियोजना से प्रभावित आदिवासी समुदाय के लोगों से हुई मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के लोग लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उनकी समस्याओं को सुना जाना चाहिए।

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा कि केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे आदिवासी भाई-बहनों की समस्याएं, मांगें, संघर्ष और व्यक्तिगत परेशानियां उन्हीं की जुबानी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के निवासी वर्षों से अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं और उन्हें सम्मान व समर्थन मिलना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रभावित लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे उनके संघर्ष में साथ रहेंगे और उनकी आवाज को उठाएंगे।

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना देश की प्रमुख नदी जोड़ो योजनाओं में शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाना है। सरकार का कहना है कि इससे सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा और क्षेत्र के लोगों को जल संकट से राहत मिलेगी।

हालांकि, परियोजना को लेकर कुछ स्थानीय समुदायों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की चिंताएं भी सामने आती रही हैं। प्रभावित लोगों का कहना है कि परियोजना के कारण कई परिवारों को विस्थापन और अपनी जमीन छोड़ने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

आदिवासी समुदायों की मुख्य मांगों में पुनर्वास, मुआवजा, जमीन और जंगल से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा शामिल है। उनका कहना है कि विकास योजनाओं में स्थानीय लोगों की सहमति और हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा कि प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि वे जल्द ही क्षेत्र का दौरा कर वहां के लोगों से सीधे बातचीत करेंगे और उनकी समस्याओं को सामने रखेंगे।

कांग्रेस ने पहले भी बड़े विकास परियोजनाओं को लेकर विस्थापन और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि विकास के साथ-साथ प्रभावित लोगों के हितों की सुरक्षा भी जरूरी है।

वहीं, सरकार की ओर से लगातार कहा जाता रहा है कि परियोजना से क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी और बुंदेलखंड जैसे पानी की कमी वाले इलाके को बड़ा लाभ होगा। सरकार का दावा है कि योजना के तहत प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और अन्य व्यवस्थाओं का ध्यान रखा जाएगा।

केन-बेतवा परियोजना को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राहुल गांधी के समर्थन के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना जरूरी होता है। साथ ही प्रभावित समुदायों की भागीदारी और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।

बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से पानी की समस्या से जूझता रहा है। इसी कारण सरकार इस परियोजना को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानती है, जबकि स्थानीय समुदाय अपनी जमीन, आजीविका और अधिकारों को लेकर चिंतित हैं।

फिलहाल केन-बेतवा परियोजना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। राहुल गांधी के क्षेत्र दौरे के ऐलान के बाद आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

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