छात्रों पर बल प्रयोग पर लोकसभा में सवाल, हरेन्द्र मलिक ने उठाई पारदर्शिता की मांग
नई दिल्ली : लोकसभा में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर बुधवार को सदन में तीखी बहस देखने को मिली। चर्चा के दौरान विपक्षी सांसद हरेन्द्र मलिक ने छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाते हुए केंद्र सरकार से सीधे सवाल किए। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि छात्रों पर लाठीचार्ज का आदेश किस स्तर से जारी किया गया था और इस मामले में सरकार स्पष्ट जवाब देने से क्यों बच रही है।
सांसद हरेन्द्र मलिक ने सदन में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। यदि किसी आंदोलन या प्रदर्शन के दौरान उन पर बल प्रयोग किया गया है, तो सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह पूरे घटनाक्रम की जानकारी संसद और देश के सामने रखे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यदि छात्रों पर लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई हुई है, तो सरकार को यह बताना चाहिए कि इसका आदेश किस अधिकारी या किस स्तर से दिया गया था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "छात्रों पर लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया था? यह बताने में शर्म कैसी?" उनके इस सवाल के बाद सदन का माहौल कुछ समय के लिए गर्म हो गया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
हरेन्द्र मलिक ने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी समस्याओं को संवाद के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरते हैं, तो सरकार को पहले उनसे बातचीत करनी चाहिए। किसी भी प्रकार की बलपूर्वक कार्रवाई अंतिम विकल्प होनी चाहिए, क्योंकि इससे छात्रों में असंतोष और अविश्वास की भावना पैदा होती है।
उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि यदि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई थी, तो उससे पहले कौन-कौन से वैकल्पिक प्रयास किए गए थे। क्या प्रशासन ने छात्रों से वार्ता की? क्या उनकी मांगों को सुनने का प्रयास किया गया? इन सभी सवालों का जवाब देश जानना चाहता है।
विपक्षी सांसदों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की। उनका कहना था कि छात्र किसी भी लोकतांत्रिक समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं और उनकी आवाज को दबाने के बजाय सुना जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर बल प्रयोग किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
सांसद हरेन्द्र मलिक ने मांग की कि सरकार पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट सदन के पटल पर रखे। साथ ही यह भी बताया जाए कि किस परिस्थिति में बल प्रयोग की आवश्यकता महसूस हुई और इसके लिए किस अधिकारी ने अनुमति दी थी। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार को इस मामले में किसी भी तरह की जानकारी छिपानी नहीं चाहिए।
सदन में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी बहस हुई। विपक्ष ने छात्र हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। बहस के दौरान कई सदस्यों ने छात्रों से जुड़े मामलों में संवेदनशील और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर भी बल दिया।
लोकसभा में उठे इस मुद्दे ने एक बार फिर छात्रों के अधिकार, विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रशासनिक कार्रवाई और सरकारी जवाबदेही को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इस मामले में क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है और क्या छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सदन के सामने रखी जाती है।