नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान की कथित चोरी के मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसदों का विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को संसद परिसर में चर्चा का विषय बन गया। प्रदर्शन के दौरान निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने एक अलग अंदाज में विरोध दर्ज कराया। उन्होंने गेरुआ कपड़े पहनकर सांकेतिक रूप से ‘चंदा चोरी’ का नाटक किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव एक दान-पात्र के साथ बैठे नजर आए, जिसे मंदिर की हुंडी जैसा दिखाया गया था। वीडियो में उन्हें कथित तौर पर मंदिर में चढ़ाए गए चंदे की चोरी के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने इस तरीके से मामले को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।
विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन करते हुए अयोध्या राम मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए।
पप्पू यादव का यह विरोध प्रदर्शन अपने अनोखे तरीके के कारण चर्चा में आ गया। गेरुआ वस्त्र पहनकर और दान-पात्र के साथ किए गए इस सांकेतिक प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि धार्मिक स्थलों से जुड़े दान और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से इस तरह के प्रदर्शन और आरोपों पर प्रतिक्रिया सामने आ सकती है। धार्मिक मुद्दों से जुड़े मामलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पहले भी देखने को मिलते रहे हैं।
संसद परिसर में होने वाले विरोध प्रदर्शन अक्सर राजनीतिक संदेश देने का माध्यम बनते हैं। इस बार भी विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर दान मामले को लेकर सरकार और संबंधित संस्थाओं पर सवाल उठाने की कोशिश की।
पप्पू यादव के प्रदर्शन का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक विरोध का तरीका बताया, जबकि कुछ ने इसे धार्मिक मुद्दे पर प्रदर्शन के रूप में देखा।
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान और चढ़ावे का प्रबंधन एक संवेदनशील विषय रहा है। मंदिर निर्माण के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं और मंदिर में दान भी दे रहे हैं। ऐसे में दान की सुरक्षा और हिसाब-किताब को लेकर पारदर्शिता की मांग समय-समय पर उठती रही है।
प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार से मामले पर जवाब देने की मांग की। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों और उनके तथ्यों को लेकर अंतिम स्थिति जांच और आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह मुद्दा संसद परिसर से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा का विषय बना हुआ है।
पप्पू यादव के सांकेतिक प्रदर्शन ने इस मुद्दे को और अधिक सुर्खियों में ला दिया है। उनके अनोखे विरोध के तरीके ने जहां राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है, वहीं राम मंदिर से जुड़े दान प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता की मांग भी एक बार फिर सामने आ गई है।