SC में 5 नए जजों की नियुक्ति, राष्ट्रपति ने कॉलेजियम सिफारिश को दी मंजूरी

Update: 2026-06-01 05:55 GMT

New Delhi नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को मंजूरी देते हुए देश के सर्वोच्च न्यायालय में पांच नए जजों की नियुक्ति को हरी झंडी दे दी है। इनमें चार हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और एक वरिष्ठ महिला वकील शामिल हैं। इस फैसले के बाद न्यायपालिका में शीर्ष स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा।

कानून मंत्रालय के अनुसार, यह नियुक्तियां भारत के संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत की गई हैं। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति करते हैं।

केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की नियुक्ति को मंजूरी दी है।



मेघवाल ने अपने पोस्ट में कहा कि उन्हें इस निर्णय पर खुशी है और उन्होंने सभी नव-नियुक्त न्यायाधीशों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह नियुक्तियां कॉलेजियम प्रणाली की सिफारिशों के आधार पर की गई हैं, जो न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

नियुक्त किए गए पांचों जजों में चार विभिन्न हाई कोर्टों के मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं, जिन्होंने अपने-अपने न्यायिक कार्यकाल में महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की है। इसके अलावा एक वरिष्ठ महिला अधिवक्ता को भी सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में नियुक्त किया गया है, जिसे न्यायिक प्रणाली में महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता को और मजबूत करेंगी और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने में मददगार साबित हो सकती हैं। साथ ही, विभिन्न हाई कोर्टों से आए अनुभवी न्यायाधीशों के शामिल होने से शीर्ष अदालत में विविध अनुभवों का समावेश होगा।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा की गई यह सिफारिश लंबे विचार-विमर्श के बाद सामने आई थी। इसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी और राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ यह प्रक्रिया पूरी हुई।

इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था में एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही इसे न्यायपालिका में संतुलन और विविधता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी बताया जा रहा है।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जजों की नियुक्ति से देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है और इससे न्यायिक प्रक्रियाओं में गति आने की संभावना जताई जा रही है।

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