नई दिल्ली : अभिनेता प्रकाश राज ने मंगलवार को दावा किया कि बेंगलुरु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए यह दावा किया। प्रकाश राज ने कहा कि वह उन करीब 65 लाख मतदाताओं में शामिल हैं, जिनका नाम SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटाए जाने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए तंज भी कसा।
प्रकाश राज ने अपने वीडियो में कहा कि वह इस स्थिति को एक मजाक की तरह देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह उन 65 लाख मतदाताओं में से एक हैं, जिनका मताधिकार SIR के बाद बेंगलुरु निर्वाचन क्षेत्र में खत्म कर दिया गया है। अभिनेता ने सवालिया अंदाज में कहा कि यह अच्छा मजाक है। इसके बाद उन्होंने कहा कि अब वह यह जानना चाहते हैं कि अपना मतदाता पहचान पत्र वापस हासिल करने के लिए उन्हें कौन-कौन से दस्तावेज और प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
अभिनेता ने अपने बेंगलुरु से पुराने संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका जन्म इसी निर्वाचन क्षेत्र में हुआ है और उन्होंने अपनी जिंदगी का लंबा समय इसी इलाके में बिताया है। प्रकाश राज के मुताबिक, उनकी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई भी यहीं हुई और उन्होंने थिएटर का काम भी इसी क्षेत्र में सीखा। उन्होंने यह भी बताया कि वह इसी निर्वाचन क्षेत्र से संसदीय चुनाव लड़ चुके हैं। ऐसे में मतदाता सूची में उनके नाम को लेकर सामने आई स्थिति पर उन्होंने हैरानी जताई।
प्रकाश राज ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके कुछ ऐसे नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर सकती है, जो शायद उसे चुनाव में समर्थन न दें। इसके बाद उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सत्ता में बैठे लोग नागरिकों को भविष्य में उन्हें सत्ता से हटाने से भी रोक सकते हैं। अभिनेता ने अपने वीडियो का अंत इसी सवाल के साथ किया।
हालांकि, प्रकाश राज के इस दावे पर निर्वाचन आयोग या संबंधित अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। वहीं, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उनका नाम बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र के शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र की ASDDO सूची में दर्ज बताया गया है। ASDDO सूची में आम तौर पर अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट या अन्य कारणों से संबंधित मतदाताओं की जानकारी शामिल की जाती है। प्रकाश राज के मामले में कथित तौर पर नाम हटाए जाने का कारण स्थायी रूप से कहीं और चले जाना बताया गया है। हालांकि, इस स्थिति को लेकर अंतिम आधिकारिक स्पष्टीकरण संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की ओर से ही स्पष्ट किया जाना बाकी है।
प्रकाश राज इससे पहले भी राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर मुखर राय रखने के लिए चर्चा में रहे हैं। वह कई मौकों पर सरकार की नीतियों और राजनीतिक फैसलों की आलोचना कर चुके हैं। बेंगलुरु की मतदाता सूची में उनके नाम को लेकर सामने आया यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने खुद चुनावी राजनीति में हिस्सा लिया था।
इस पूरे घटनाक्रम का एक और कानूनी पहलू भी है। खबरों के अनुसार, बेंगलुरु की एक अदालत ने 10 जुलाई को प्रकाश राज को एक आपराधिक मामले में सशर्त जमानत दी थी। यह मामला एक निजी शिकायत से जुड़ा बताया गया है, जिसमें अभिनेता के पास अलग-अलग स्थानों पर पंजीकृत चार मतदाता पहचान पत्र होने का आरोप लगाया गया था। इसी मामले में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया था। हालांकि, अदालत से उन्हें बाद में सशर्त जमानत मिल गई।
फिलहाल प्रकाश राज के मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का दावा राजनीतिक और चुनावी बहस का विषय बन गया है। एक तरफ अभिनेता इसे मताधिकार से जुड़े गंभीर सवाल के रूप में उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मतदाता सूची में नाम हटाने के पीछे बताए जा रहे कारण और आधिकारिक प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होगा। अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित निर्वाचन अधिकारी प्रकाश राज के दावे पर क्या जवाब देते हैं और यदि उनका नाम वास्तव में सूची से हटाया गया है तो उसे दोबारा शामिल कराने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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