नई दिल्ली। देश में परिसीमन के मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चौथा पत्र लिखकर परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा करने की मांग की है। खड़गे ने कहा कि सरकार को किसी भी नए संवैधानिक संशोधन प्रस्ताव को अंतिम रूप देने और संसद में पेश करने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। उन्होंने संसद के मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं होने पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन 64 दिन बीत जाने के बावजूद लोकसभा और राज्यसभा का औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है। उन्होंने इस स्थिति को अभूतपूर्व बताते हुए सरकार से संसदीय प्रक्रियाओं का सम्मान करने की अपील की है।
संसद सत्र के 64 दिन बाद भी सत्रावसान नहीं होने पर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में संसद की कार्यप्रणाली से जुड़ी प्रक्रियात्मक चिंताओं का उल्लेख किया है।उन्होंने कहा कि 13 अगस्त 2026 को मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद से दोनों सदनों का औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है।संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने और सत्रावसान के बीच संवैधानिक तथा प्रक्रियात्मक अंतर होता है। अनिश्चितकालीन स्थगन में सदन की बैठक समाप्त होती है, जबकि सत्रावसान के माध्यम से संसदीय सत्र औपचारिक रूप से समाप्त किया जाता है।खड़गे ने इतने लंबे अंतराल पर चिंता जताते हुए इसे असामान्य स्थिति बताया है।
परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
खड़गे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि परिसीमन के किसी भी नए प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले सभी दलों को विश्वास में लिया जाए।उनका कहना है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक है।उन्होंने मांग की कि सभी राजनीतिक दलों को प्रस्तावों का अध्ययन करने, आपसी चर्चा करने और संबंधित हितधारकों से विचार-विमर्श करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, व्यापक संवैधानिक प्रभाव वाले किसी भी प्रस्ताव को जल्दबाजी में आगे बढ़ाने से बचना चाहिए।
पहले भी तीन बार लिख चुके हैं प्रधानमंत्री को पत्र
मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने ताजा पत्र में याद दिलाया कि वह इससे पहले भी परिसीमन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन पत्र लिख चुके हैं।उन्होंने पहला पत्र 11 अप्रैल, दूसरा 16 जुलाई और तीसरा पत्र 27 अगस्त 2026 को लिखा था।खड़गे के अनुसार, उन्होंने 11 अप्रैल को ही सरकार से परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन प्रस्ताव लाने से पहले सर्वदलीय बैठक आयोजित करने का अनुरोध किया था।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उस मांग पर ध्यान नहीं दिया और 14 अप्रैल की देर शाम संबंधित विधेयकों को सार्वजनिक किया। इसके बाद 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया।
अप्रैल में संविधान संशोधन प्रस्ताव को लगा था झटका
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में अप्रैल 2026 के संसदीय घटनाक्रम का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को 17 अप्रैल को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका था।खड़गे ने इस घटनाक्रम का हवाला देते हुए सरकार से आग्रह किया कि वह एक बार फिर व्यापक सहमति के बिना दूरगामी प्रभाव वाला संविधान संशोधन विधेयक आगे बढ़ाने का प्रयास न करे।उनका कहना है कि संवैधानिक बदलावों के लिए पर्याप्त चर्चा और राजनीतिक सहमति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
संविधान संशोधन पर सरकार को दी चेतावनी
खड़गे ने अपने पत्र में सरकार को आगाह किया कि बड़े संवैधानिक संशोधनों को बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के संसद से पारित कराने का प्रयास नहीं होना चाहिए।उन्होंने कहा कि परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर सभी दलों को अपनी राय रखने का अवसर मिलना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने संसदीय लोकतंत्र में संवाद और सहमति की आवश्यकता पर जोर दिया।
परिसीमन क्यों है महत्वपूर्ण मुद्दा?
परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसके तहत जनसंख्या और निर्धारित कानूनी प्रावधानों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं तथा प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों का निर्धारण किया जाता है।इस प्रक्रिया का प्रभाव चुनावी प्रतिनिधित्व और विभिन्न क्षेत्रों की राजनीतिक भागीदारी पर पड़ सकता है। इसलिए परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव राजनीतिक दलों के बीच व्यापक चर्चा का विषय बने हुए हैं।खड़गे के चौथे पत्र के बाद अब प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। फिलहाल कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह परिसीमन के मुद्दे पर सभी दलों के साथ चर्चा और सहमति बनाने की मांग कर रही है।