नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छात्रों और युवाओं के विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 से 15 दिनों से दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ पुलिस बल का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाया जा रहा है और आंदोलन का समर्थन करने वाले विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया।दिपके ने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
छात्रों और युवाओं के साथ दुर्व्यवहार का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि छात्र संगठन और युवा पिछले कई दिनों से विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले युवाओं को पुलिस द्वारा घसीटकर हटाया जा रहा है। उनके मुताबिक, आंदोलन में शामिल लोगों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, उससे लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर सवाल खड़े होते हैं।दिपके ने कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और नागरिकों को अपनी मांगें रखने का अवसर मिलना चाहिए।हालांकि, प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार से जुड़े सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेने पर उठाए सवाल
अभिजीत दिपके ने विपक्षी नेताओं के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब विपक्षी दलों के नेता छात्रों और युवाओं के समर्थन में आगे आए, तो उन्हें भी हिरासत में लिया गया।उन्होंने अपने बयान में ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन जैसे पूर्व मुख्यमंत्रियों का उल्लेख किया।10 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान कई विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई थीं। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी।
ज्ञानेश कुमार को लेकर सरकार पर निशाना
दिपके ने अपने संबोधन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए सरकार पर निशाना साधा।उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक व्यक्ति को लेकर इतने व्यापक स्तर पर पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई क्यों की जा रही है।CJP ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी आपत्तियां जताई हैं। संगठन ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।हालांकि, संगठन के आरोप अपने आप में चुनाव प्रक्रिया में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं हैं।
10 अक्टूबर को रेल सेवाओं पर पाबंदी का मुद्दा उठाया
अभिजीत दिपके ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान रेल सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों की भी आलोचना की।उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के आह्वान के बाद रेल सेवाएं बंद करने जैसे कदम उठाए गए। दिपके ने इसे असामान्य बताते हुए कहा कि देश के इतिहास में शायद पहली बार इस तरह की स्थिति देखने को मिली।रिपोर्टों के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली कुछ मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द किया था।वहीं, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उस दिन मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं हुई थीं। कुल 303 में से 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास संबंधी प्रतिबंध लगाए गए थे, जबकि सभी निर्धारित मेट्रो ट्रेन यात्राएं संचालित हुई थीं।
लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर जारी विवाद
दिल्ली में छात्रों और युवाओं के विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच टकराव बना हुआ है।CJP का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगों पर बातचीत होनी चाहिए। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और अनुमति संबंधी नियमों का हवाला देकर अपनी कार्रवाई का पक्ष रखा है।अभिजीत दिपके के ताजा बयान के बाद एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है।
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