नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जिस एकजुट, मजबूत और सुरक्षित भारत को दुनिया देख रही है, उसकी नींव रखने में सरदार पटेल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा, "आज के भारत की कल्पना सरदार पटेल के बिना करना मुश्किल है। उन्होंने हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक देश को सुरक्षित रखा।" प्रधानमंत्री के इस बयान ने एक बार फिर देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा में सरदार पटेल के योगदान को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार पटेल को भारत की एकता का महान शिल्पकार बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के सामने अनेक चुनौतियां थीं। अलग-अलग रियासतों को एक राष्ट्र के रूप में संगठित करना आसान काम नहीं था। उस कठिन दौर में सरदार पटेल ने अपनी राजनीतिक दूरदर्शिता, दृढ़ इच्छाशक्ति और कुशल नेतृत्व से देश को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों ने आधुनिक भारत के निर्माण को मजबूत आधार प्रदान किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल का योगदान केवल देश की भौगोलिक सीमाओं को एकजुट करने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने भारत की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने ऐसी संस्थागत व्यवस्था के निर्माण पर जोर दिया, जो देश की विविधता को एकता के सूत्र में बांध सके। यही कारण है कि आज भी उन्हें लौह पुरुष के नाम से सम्मानपूर्वक याद किया जाता है।सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने महात्मा गांधी के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। खेड़ा सत्याग्रह और बारडोली सत्याग्रह जैसे आंदोलनों में उनके नेतृत्व ने किसानों को संगठित किया और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष को नई दिशा दी। बारडोली आंदोलन की सफलता के बाद उन्हें 'सरदार' की उपाधि से व्यापक पहचान मिली।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक देशी रियासतों का भारतीय संघ में विलय था। उस समय देश में 560 से अधिक रियासतें थीं। इनमें से अनेक रियासतों के सामने भारत या पाकिस्तान में शामिल होने अथवा अलग राजनीतिक भविष्य चुनने का प्रश्न था। ऐसे संवेदनशील समय में सरदार पटेल ने वीपी मेनन के सहयोग से रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।जूनागढ़ और हैदराबाद जैसी रियासतों के भारत में एकीकरण के दौरान राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां सामने आईं। सरदार पटेल ने परिस्थितियों के अनुसार कूटनीतिक बातचीत, राजनीतिक दबाव और आवश्यक प्रशासनिक कदमों का सहारा लिया। उनके नेतृत्व में अधिकांश रियासतों का भारतीय संघ में सफलतापूर्वक विलय हुआ। इस ऐतिहासिक प्रक्रिया ने भारत को राजनीतिक रूप से एकजुट करने में निर्णायक योगदान दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार पटेल के योगदान को राष्ट्रीय एकता की प्रेरणा बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि देश की मजबूती केवल उसकी सीमाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों के बीच एकता और आपसी विश्वास से भी निर्धारित होती है। भारत जैसे विविधताओं वाले देश में अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और समुदायों का एक साथ आगे बढ़ना ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।सरदार पटेल के विचारों को वर्तमान भारत के लिए प्रासंगिक बताते हुए प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए नागरिकों में राष्ट्रहित की भावना होना जरूरी है। सरदार पटेल का जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयासों से बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है।देशभर में 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस अवसर पर विभिन्न सरकारी संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं और सामाजिक संगठनों की ओर से एकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 'रन फॉर यूनिटी' जैसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को राष्ट्रीय अखंडता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया जाता है।
गुजरात के केवड़िया में स्थापित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी सरदार पटेल के योगदान का प्रमुख प्रतीक है। 182 मीटर ऊंची यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित यह स्मारक सरदार पटेल की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना है।सरदार पटेल को भारतीय प्रशासनिक सेवाओं की मजबूत नींव रखने के लिए भी याद किया जाता है। उन्होंने स्वतंत्र भारत में अखिल भारतीय सेवाओं की आवश्यकता पर जोर दिया था। उनका मानना था कि देश की एकता और सुशासन बनाए रखने के लिए सक्षम तथा निष्पक्ष प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक है।प्रधानमंत्री मोदी के संदेश का केंद्रीय भाव यही रहा कि भारत की स्वतंत्रता, एकता और अखंडता को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। सरदार पटेल की विरासत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि भविष्य के भारत के निर्माण के लिए भी प्रेरणा है।
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