नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन सदस्य देशों से विचारों और वादों से आगे बढ़कर ठोस परिणाम देने का आह्वान किया। सम्मेलन के ओपन सेशन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा है और दुनिया को इस समूह से बड़ी अपेक्षाएं हैं। उन्होंने अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए चीन को शुभकामनाएं भी दीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने के लिए तैयार है। दुनिया अब हमसे सिर्फ विचारों और वादों की नहीं, बल्कि ठोस नतीजों की उम्मीद करती है। मुझे भरोसा है कि हम सबकी कोशिशें निश्चित रूप से इन उम्मीदों पर खरी उतरेंगी।” उनके इस वक्तव्य को ब्रिक्स की भविष्य की कार्यप्रणाली और सदस्य देशों की सामूहिक जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि संगठन की सफलता अब केवल सम्मेलनों, घोषणाओं और साझा वक्तव्यों से नहीं आंकी जाएगी। दुनिया यह देखना चाहती है कि ब्रिक्स देशों के बीच बनी सहमति का असर विकास, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और आम लोगों के जीवन पर किस रूप में दिखाई देता है। उन्होंने सदस्य देशों को सहयोग की भावना के साथ ऐसी पहलों पर काम करने का संदेश दिया, जिनके परिणाम स्पष्ट और व्यावहारिक हों।
ब्रिक्स की यात्रा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संगठन अपने विकास के एक महत्वपूर्ण चरण पर पहुंच चुका है। तीसरे दशक में प्रवेश करना केवल समय का पड़ाव नहीं, बल्कि भविष्य की नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच ब्रिक्स की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हुई है। विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को वैश्विक मंचों पर प्रभावी रूप से रखने में यह समूह अहम भूमिका निभा सकता है।
प्रधानमंत्री ने सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास और समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक चुनौतियों का सामना कोई देश अकेले नहीं कर सकता। आर्थिक अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी असमानता और आपूर्ति शृंखला में बाधा जैसे विषयों पर सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। ब्रिक्स देशों के पास बड़ी आबादी, विशाल बाजार, प्राकृतिक संसाधन और तकनीकी क्षमता है। इनका समन्वित उपयोग दुनिया के लिए नए समाधान प्रस्तुत कर सकता है।
पीएम मोदी का “ठोस नतीजों” पर दिया गया जोर इस बात को रेखांकित करता है कि ब्रिक्स को अब अपनी घोषणाओं को जमीन पर उतारने वाली कार्ययोजना तैयार करनी होगी। सदस्य देशों के बीच सहयोग की घोषणाओं के बाद उनके क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा भी महत्वपूर्ण होगी। इससे तय समय में परिणाम हासिल करने और समूह की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
ओपन सेशन में प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स के भविष्य को लेकर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य देशों के साझा प्रयास दुनिया की अपेक्षाओं को पूरा कर सकते हैं। उनके मुताबिक, ब्रिक्स की शक्ति उसकी विविधता और सामूहिक सोच में है। अलग-अलग राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक व्यवस्थाओं वाले देशों का साझा मंच पर सहयोग करना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण संदेश देता है।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने वैश्विक परिस्थितियों, आर्थिक सहयोग और साझा विकास से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया। दूसरे दिन का ओपन सेशन संगठन की भावी दिशा पर केंद्रित रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर का उपयोग ब्रिक्स को परिणाम केंद्रित संस्था बनाने का संदेश देने के लिए किया। उनके संबोधन में समूह की पुरानी उपलब्धियों के साथ आने वाले दशक की अपेक्षाओं का भी उल्लेख रहा।
प्रधानमंत्री ने अगले ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहे चीन को शुभकामनाएं दीं। इसे संगठन में अध्यक्षता के सुचारु हस्तांतरण और सदस्य देशों के बीच निरंतर सहयोग के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अगली अध्यक्षता के दौरान भी ब्रिक्स का एजेंडा आगे बढ़ेगा और सदस्य देश साझा प्राथमिकताओं पर मिलकर काम करेंगे।
चीन को शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री ने भारत की ओर से सहयोग का संकेत भी दिया। किसी बहुपक्षीय समूह की निरंतरता के लिए वर्तमान और आगामी अध्यक्ष देशों के बीच तालमेल महत्वपूर्ण होता है। एक अध्यक्षता के दौरान लिए गए निर्णयों और शुरू की गई पहलों को अगली अध्यक्षता में आगे बढ़ाए जाने से दीर्घकालिक लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलती है।
ब्रिक्स की बढ़ती वैश्विक भूमिका के बीच संगठन से विकासशील देशों की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। कई देश चाहते हैं कि वैश्विक वित्तीय और राजनीतिक संस्थाओं में उनकी आवाज को अधिक प्रतिनिधित्व मिले। आर्थिक विकास के साथ तकनीक तक समान पहुंच, जलवायु वित्त और सतत विकास जैसे विषय भी विकासशील दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे मुद्दों पर ब्रिक्स देशों की साझा पहल व्यापक प्रभाव डाल सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में विचारों को कार्रवाई में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया। इसका अर्थ है कि सदस्य देशों को सहमति वाले क्षेत्रों में समयबद्ध परियोजनाएं और स्पष्ट लक्ष्य तय करने होंगे। यदि ब्रिक्स अपनी योजनाओं के लाभ को लोगों तक पहुंचाने में सफल होता है तो इसकी वैश्विक स्वीकार्यता और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।
दिल्ली में हुए दो दिवसीय सम्मेलन ने सदस्य देशों को सीधे संवाद और आपसी सहयोग बढ़ाने का अवसर दिया। सम्मेलन के अंतिम दिन प्रधानमंत्री मोदी का वक्तव्य इस आयोजन के समापन संदेश के रूप में सामने आया। उन्होंने ब्रिक्स के तीसरे दशक को परिणाम, जिम्मेदारी और सामूहिक प्रयास का दौर बनाने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि सदस्य देशों की कोशिशें दुनिया की अपेक्षाओं पर खरी उतरेंगी। चीन को अगले सम्मेलन की मेजबानी के लिए शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने ब्रिक्स की निरंतर प्रगति की कामना की। उनके संबोधन का केंद्रीय संदेश यही रहा कि संगठन ने विचार-विमर्श का मजबूत मंच तैयार कर लिया है और अब उसे ठोस उपलब्धियों के जरिए अपनी उपयोगिता सिद्ध करनी होगी।