दिल्ली :ऑनलाइन फूड डिलीवरी के दौर में ग्राहकों की शिकायतों से जुड़े कई मामले सामने आते रहते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक ग्राहक ने 10 इंच का पिज्जा ऑर्डर किया, लेकिन डिलीवरी के बाद पिज्जा अपेक्षा से काफी छोटा निकला। ग्राहक ने इस मामले को लेकर उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद फोरम ने सुनवाई करते हुए कंपनी पर 10,500 रुपये का जुर्माना लगाया।
मामला पिज्जा की साइज को लेकर ग्राहक और कंपनी के बीच विवाद से जुड़ा है। ग्राहक का आरोप था कि उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से 10 इंच के पिज्जा का ऑर्डर किया था। ऑर्डर के अनुसार उसे निर्धारित साइज का पिज्जा मिलना चाहिए था, लेकिन जब डिलीवरी के बाद उसने पिज्जा देखा तो वह दावा किए गए साइज से करीब 3 इंच छोटा था।
ग्राहक ने इस संबंध में कंपनी से शिकायत की और अपनी परेशानी बताई। उसका कहना था कि विज्ञापन और ऑर्डर में जिस साइज का पिज्जा दिखाया गया था, डिलीवरी में उससे अलग और छोटा उत्पाद मिला। ग्राहक ने इसे सेवा में कमी और गलत जानकारी देने का मामला बताया।
कंपनी की ओर से इस शिकायत पर जवाब दिया गया, लेकिन ग्राहक संतुष्ट नहीं हुआ। इसके बाद उसने उपभोक्ता अधिकारों के तहत कंज्यूमर फोरम में शिकायत दर्ज कराई। मामले की सुनवाई के दौरान ग्राहक ने पिज्जा की साइज और ऑर्डर से जुड़ी जानकारी को सबूत के तौर पर पेश किया।
उपभोक्ता फोरम ने मामले की सुनवाई करते हुए माना कि ग्राहक को जिस उत्पाद का वादा किया गया था, उसे उसी गुणवत्ता और मात्रा में मिलना चाहिए था। फोरम ने कहा कि किसी भी खाद्य उत्पाद की बिक्री में ग्राहक को सही जानकारी देना जरूरी है। यदि कंपनी द्वारा बताए गए उत्पाद और वास्तविक डिलीवरी में अंतर होता है तो यह उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है।
फोरम ने कंपनी की सेवा में कमी को देखते हुए ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया। आदेश के तहत कंपनी को ग्राहक को मुआवजा और मुकदमे से जुड़े खर्च के रूप में कुल 10,500 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया।
इस मामले ने ऑनलाइन खरीदारी और फूड डिलीवरी में ग्राहकों के अधिकारों को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राहक को किसी भी उत्पाद की खरीदारी करते समय उसके विवरण को ध्यान से देखना चाहिए और यदि वास्तविक उत्पाद में अंतर मिलता है तो शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है।
आज के समय में ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग ऑफर और उत्पाद विवरण देती हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि कंपनियां अपने विज्ञापन और वास्तविक सेवा के बीच पारदर्शिता बनाए रखें।
उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राहक केवल कीमत नहीं बल्कि गुणवत्ता और सही जानकारी के लिए भी भुगतान करता है। यदि किसी सेवा में वादा और वास्तविकता के बीच अंतर होता है तो उपभोक्ता कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इस फैसले को उपभोक्ता जागरूकता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह संदेश देता है कि ग्राहक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और गलत सेवा मिलने पर कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।
वहीं कंपनियों के लिए भी यह एक चेतावनी है कि ग्राहकों को दिए गए वादों और उत्पादों की जानकारी में पूरी ईमानदारी बरती जाए। छोटी-सी लापरवाही भी उपभोक्ता विवाद का कारण बन सकती है और कंपनी को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ छवि का नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
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