सौरभ भारद्वाज मामले में कोर्ट में पेश हुई पेन ड्राइव, सुनवाई 8 अगस्त तक टली

दिल्ली की अदालत में पेन ड्राइव बनी अहम सबूत

Update: 2026-08-02 03:14 GMT

नई दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत में भाजपा नेता प्रवेश वर्मा द्वारा दायर आपराधिक मानहानि शिकायत मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। सुनवाई के दौरान अदालत में एक पेन ड्राइव चलाई गई, जिसमें कथित तौर पर वे वीडियो और डिजिटल सामग्री शामिल थी, जिन्हें शिकायत का अहम साक्ष्य बताया जा रहा है। मामले में अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई 8 अगस्त के लिए निर्धारित कर दी।

यह मामला भाजपा नेता प्रवेश वर्मा की ओर से आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दायर मानहानि शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक मंचों और मीडिया के माध्यम से दिए गए कुछ बयानों से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। दूसरी ओर, प्रतिवादी पक्ष ने इन आरोपों का कानूनी आधार पर विरोध किया है।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष डिजिटल साक्ष्य के रूप में पेन ड्राइव प्रस्तुत की गई। अदालत की अनुमति के बाद इस पेन ड्राइव में मौजूद कथित वीडियो और रिकॉर्डिंग को अदालत कक्ष में चलाकर देखा गया। इन सामग्रियों के आधार पर शिकायतकर्ता पक्ष ने यह स्थापित करने का प्रयास किया कि संबंधित बयान सार्वजनिक रूप से दिए गए थे और उनसे उनकी छवि प्रभावित हुई।
बचाव पक्ष ने भी अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा और प्रस्तुत साक्ष्यों की स्वीकार्यता, संदर्भ तथा कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने विभिन्न कानूनी प्रावधानों और पूर्व न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं।
अदालत ने सुनवाई के दौरान किसी भी पक्ष के दावों पर अंतिम टिप्पणी करने से परहेज किया और कहा कि मामले के सभी तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल साक्ष्यों का मूल्यांकन न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप किया जाएगा।
भारतीय न्याय व्यवस्था में डिजिटल साक्ष्य का महत्व लगातार बढ़ा है। वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, ईमेल, सोशल मीडिया पोस्ट और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज अब कई मामलों में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं। हालांकि, ऐसे साक्ष्यों की प्रामाणिकता और स्वीकार्यता का परीक्षण कानून के निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाता है।
मानहानि से जुड़े मामलों में अदालत यह देखती है कि संबंधित बयान सार्वजनिक रूप से दिए गए थे या नहीं, उनका संदर्भ क्या था, उनसे शिकायतकर्ता की प्रतिष्ठा पर वास्तविक प्रभाव पड़ा या नहीं, और क्या वे कानून के तहत मानहानि की श्रेणी में आते हैं। इन सभी बिंदुओं पर सुनवाई के दौरान विस्तार से विचार किया जाता है।
मामले की अगली सुनवाई 8 अगस्त को होगी, जिसमें अदालत आगे की दलीलें सुनेगी और आवश्यक होने पर अतिरिक्त साक्ष्यों पर भी विचार कर सकती है। फिलहाल इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

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