नई दिल्ली। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ उनका पारंपरिक परिधान भी चर्चा का विषय बन गया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सफेद कुर्ता-पायजामा, गहरे भूरे रंग की जैकेट और सुर्ख लाल रंग का बांधनी साफा पहना था। उनके साफे ने जहां वर्ष 2014 के स्वतंत्रता दिवस समारोह की याद दिलाई, वहीं जैकेट में लगे पॉकेट स्क्वायर के रंगों को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।
कांग्रेस नेता और सांसद पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री मोदी के पॉकेट स्क्वायर में दिख रहे रंगों के क्रम पर तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे वह भारत की जगह आयरलैंड का स्वतंत्रता दिवस मना रहे हों। पवन खेड़ा ने रंगों के क्रम को लेकर उर्दू में तिरंगा पहनने वाली टिप्पणी भी की।
प्रधानमंत्री मोदी की जैकेट में लगे पॉकेट स्क्वायर में हरा, सफेद और केसरिया रंग दिखाई दे रहा था। कांग्रेस का कहना है कि इन रंगों का क्रम भारतीय राष्ट्रीय ध्वज जैसा नहीं था। भारत के राष्ट्रीय ध्वज में ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंग होता है। सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग का अशोक चक्र स्थित है।
आयरलैंड के राष्ट्रीय ध्वज में भी हरे, सफेद और नारंगी रंग का प्रयोग किया गया है, लेकिन उसके रंगों का क्रम और स्वरूप भारतीय तिरंगे से अलग है। प्रधानमंत्री के पॉकेट स्क्वायर में दिख रहे रंगों के क्रम को कांग्रेस ने आयरलैंड के झंडे से जोड़ते हुए राजनीतिक कटाक्ष किया। हालांकि पॉकेट स्क्वायर राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि परिधान के साथ लगाया गया सजावटी कपड़ा था।
पॉकेट स्क्वायर के विवाद के अलावा प्रधानमंत्री का पारंपरिक साफा भी लोगों का ध्यान आकर्षित करता रहा। इस बार उन्होंने गहरे लाल रंग का बांधनी साफा पहना था, जिस पर सफेद और पीले रंग की बारीक बिंदियों का पैटर्न बना हुआ था। इसका डिजाइन प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2014 में लाल किले पर दिए गए अपने पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान पहने गए साफे से मिलता-जुलता दिखाई दिया।
प्रधानमंत्री मोदी स्वतंत्रता दिवस पर हर वर्ष अलग रंग और शैली की पगड़ी अथवा साफा पहनते रहे हैं। उनके परिधान में देश के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कला और संस्कृति की झलक दिखाई देती है। इस बार लाल बांधनी साफे को भी भारतीय हस्तकला तथा पारंपरिक वस्त्र शैली से जोड़कर देखा गया।
लाल किले से संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश की प्रगति को स्वीकार नहीं कर सकते और भारत की उपलब्धियों को लेकर जनता को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास मजबूत सरकार, जीवंत लोकतंत्र और मार्गदर्शन करने वाला संविधान है। इन्हीं आधारों पर देश अपने लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने निराशावादी सोच रखने वाले लोगों से देश को सतर्क रहने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि देश के विकास में बाधा डालने वाली सोच को पहचानना जरूरी है। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण, सामूहिक प्रयास और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना होगा।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने एक लाख ऐसे युवाओं को राजनीति में लाने की इच्छा भी व्यक्त की, जिनके परिवार का राजनीति से पहले कोई संबंध नहीं रहा हो। उन्होंने कहा कि ये युवा किसी भी राजनीतिक दल में शामिल हो सकते हैं। राजनीति में नए और सामान्य परिवारों के युवाओं की भागीदारी बढ़ने से लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी।
स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण, पगड़ी और परिधान को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हुई। कांग्रेस ने जहां पॉकेट स्क्वायर के रंगों को राजनीतिक मुद्दा बनाया, वहीं भाजपा समर्थकों ने इसे अनावश्यक विवाद बताया। इस तरह राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री का परिधान भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी का विषय बन गया।