नई दिल्ली: 'आर्ट ऑफ़ लिविंग फ़ाउंडेशन' के लिए राहत की बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का फ़ैसला पलट दिया। कोर्ट ने दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) को आदेश दिया कि वह फ़ाउंडेशन से वसूले गए 5 करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवज़ा वापस करे। यह मुआवज़ा 2016 में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान यमुना के बाढ़ वाले इलाक़ों (फ़्लड प्लेन) को कथित तौर पर नुकसान पहुँचाने के लिए लिया गया था।
जस्टिस एस.सी. शर्मा और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच NGT के निष्कर्षों से सहमत नहीं थी। उन्होंने 'व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया' (VVKI) की अपील स्वीकार कर ली। VVKI, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर द्वारा स्थापित 'आर्ट ऑफ़ लिविंग फ़ाउंडेशन' से जुड़ी भारतीय संस्था है।
यह मामला 'वर्ल्ड कल्चर फ़ेस्टिवल' से जुड़ा था, जिसे फ़ाउंडेशन ने DDA से मंज़ूरी लेने के बाद 11 से 13 मार्च 2016 के बीच यमुना के किनारे आयोजित किया था।
इस कार्यक्रम के लिए सड़कें, रैंप और अन्य अस्थायी ढाँचे बनाए गए थे, जिनसे कथित तौर पर नदी के बहाव को खतरा पैदा हुआ था।
फ़ाउंडेशन के ख़िलाफ़ NGT में शिकायत रिटायर्ड इंडियन फ़ॉरेस्ट सर्विस (IFS) अधिकारी मनोज मिश्रा ने दर्ज कराई थी, जो "यमुना जिये अभियान" के संयोजक भी थे।
दिसंबर 2017 में, NGT ने एक एक्सपर्ट पैनल की रिपोर्ट के आधार पर फ़ाउंडेशन को नदी के बाढ़ वाले इलाक़ों को नुकसान पहुँचाने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था।
ग्रीन ट्रिब्यूनल ने DDA को आदेश दिया था कि वह कार्यक्रम से पहले फ़ाउंडेशन द्वारा जमा की गई 5 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी ज़ब्त कर ले और उसका इस्तेमाल बाढ़ वाले इलाक़ों को ठीक करने में करे, जिन्हें तीन दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर नुकसान पहुँचा था।
बाद में, VVKI ने 'आर्ट ऑफ़ लिविंग फ़ाउंडेशन' की ओर से NGT के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। उनका तर्क था कि कार्यक्रम वाली जगह को कभी भी बाढ़ वाला इलाक़ा (फ़्लड प्लेन) घोषित नहीं किया गया था।
अपील करने वालों का तर्क था कि तीन दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रम से पर्यावरण को जो नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया गया था, उसे वैज्ञानिक तरीक़े से साबित नहीं किया जा सका।
फ़ाउंडेशन ने कहा कि तीन दिन का यह कार्यक्रम ज़मीन की मालिक एजेंसी, DDA से ज़रूरी मंज़ूरी लेने के बाद आयोजित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली, NGT का फ़ैसला रद्द कर दिया और DDA को आदेश दिया कि वह सिक्योरिटी के तौर पर रखे गए 5 करोड़ रुपये फ़ाउंडेशन को वापस करे।