कर्नाटक में NDA का क्लीन स्वीप चारों सीटों पर जीत, कांग्रेस को बड़ा झटका
नई दिल्ली/बेंगलुरु : 28 अक्टूबर 2026। कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों पर हुए चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी सीटों पर जीत दर्ज की है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि उसकी सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस ने एक सीट अपने नाम की। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस एक भी सीट जीतने में सफल नहीं रही। इन चुनावी नतीजों के बाद भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी कर्नाटक के चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए विपक्ष पर निशाना साधा है।कर्नाटक में 23 अक्टूबर को विधान परिषद की चार सीटों के लिए मतदान हुआ था। मतगणना के बाद 28 अक्टूबर तक सभी नतीजे सामने आ गए। इस चुनाव में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं ने अपने प्रतिनिधियों का चुनाव किया। चुनाव परिणामों को भाजपा-जेडीएस गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण सफलता और कांग्रेस के लिए राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
'देखिए कर्नाटक में क्या हुआ', विपक्ष पर अश्विनी वैष्णव का निशाना
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विपक्ष को घेरते हुए चुनाव परिणामों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कथित तौर पर कहा, "देखिए कर्नाटक में क्या हुआ।"उनकी टिप्पणी को चुनावी प्रक्रिया और विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इस बयान का पूरा आधिकारिक विवरण स्वतंत्र रूप से उपलब्ध नहीं हो सका है।भाजपा ने इन चुनाव परिणामों को कांग्रेस के चुनावी आरोपों के जवाब के रूप में पेश किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कर्नाटक में मतदान मतपत्रों के जरिए हुआ था और वहां भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।दूसरी ओर, विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों को लेकर उठाए गए सवाल अलग मुद्दे हैं। किसी एक चुनाव का परिणाम अपने आप में दूसरे चुनावों से जुड़े आरोपों को प्रमाणित या खारिज नहीं करता।
चारों सीटों पर NDA का कब्जा, कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में भाजपा और जेडीएस गठबंधन ने चारों सीटों पर जीत दर्ज कर अपना चुनावी तालमेल मजबूत किया है।भाजपा ने उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की। वहीं, जेडीएस ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र अपने नाम किया।इन परिणामों में विशेष बात यह रही कि भाजपा ने अपनी तीन सीटें बरकरार रखीं, जबकि जेडीएस ने कांग्रेस से बेंगलुरु शिक्षक सीट छीन ली।इस तरह गठबंधन के दोनों दलों को सफलता मिली और कांग्रेस के उम्मीदवार चारों निर्वाचन क्षेत्रों में पराजित हुए।विधान परिषद चुनाव में भाजपा और जेडीएस के चार उम्मीदवार विजयी रहे।
निर्वाचन क्षेत्र | विजेता | पार्टी
| उत्तर-पूर्व शिक्षक | शशिल जी. नमोशी | भाजपा |
| दक्षिण-पूर्व स्नातक | के.एम. सुरेश | भाजपा |
| पश्चिम स्नातक | एस.वी. संकनूर | भाजपा |
| बेंगलुरु शिक्षक | ए.पी. रंगनाथ | जेडीएस |
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीएस उम्मीदवार ए.पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य पुट्टन्ना को 908 मतों के अंतर से हराया। रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 9,902 मत प्राप्त हुए।वहीं, उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार शशिल जी. नमोशी ने कांग्रेस के शरणप्पा मट्टूर को 3,297 मतों से हराया।
मतपत्रों से हुआ मतदान, भाजपा ने कांग्रेस को घेरा
इन चुनावों की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय मतपत्रों के माध्यम से कराया गया।भाजपा ने इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि विपक्ष अक्सर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाता रहा है, लेकिन कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में मतपत्रों से मतदान होने के बावजूद कांग्रेस को सफलता नहीं मिली।चुनावी प्रक्रिया को लेकर यह बहस ऐसे समय में सामने आई है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।हालांकि, मतपत्र आधारित विधान परिषद चुनाव और ईवीएम से होने वाले विधानसभा या लोकसभा चुनावों की मतदाता संरचना तथा प्रक्रिया में अंतर होता है।
भाजपा ने कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने चुनाव परिणामों को लेकर कांग्रेस सरकार की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि चारों सीटों पर एनडीए की जीत राज्य सरकार के कामकाज के प्रति मतदाताओं की नाराजगी दर्शाती है।विजयेंद्र ने इस परिणाम को वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव से भी जोड़ते हुए भाजपा के पक्ष में समर्थन बढ़ने का संकेत बताया।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परिणाम भाजपा की नीतियों के प्रति समर्थन को दर्शाता है।हालांकि, ये भाजपा नेताओं की राजनीतिक व्याख्याएं हैं। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के सीमित मतदाता वर्ग के परिणाम को पूरे राज्य की जनभावना का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।
एचडी कुमारस्वामी ने गठबंधन की एकजुटता को बताया जीत का कारण
केंद्रीय मंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने भी विधान परिषद चुनाव में एनडीए की जीत पर खुशी जताई।उन्होंने सभी विजयी उम्मीदवारों को बधाई देते हुए कहा कि यह परिणाम भाजपा और जेडीएस के बीच बेहतर समन्वय को दर्शाता है।कुमारस्वामी ने इस जीत को शिक्षक और स्नातक मतदाताओं की ओर से दिया गया महत्वपूर्ण संदेश बताया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर मतदाताओं में असंतोष है।जेडीएस नेता ने वर्ष 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए इसे गठबंधन के लिए उत्साहजनक परिणाम बताया।
क्या कांग्रेस सरकार पर पड़ेगा चुनाव परिणामों का असर?
कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों पर हार कांग्रेस के लिए राजनीतिक चुनौती जरूर है, लेकिन इससे राज्य की निर्वाचित सरकार की स्थिरता पर तत्काल असर पड़ने की संभावना नहीं है।विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सीमित पात्र मतदाता मतदान करते हैं। ऐसे में इन चुनावों के नतीजे सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं।राजनीतिक दृष्टि से भाजपा-जेडीएस गठबंधन को इन परिणामों से विपक्ष के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिला है।वहीं, कांग्रेस के सामने शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच अपने संगठन तथा चुनावी रणनीति की समीक्षा करने की चुनौती होगी।
कर्नाटक की राजनीति में तेज हुई बयानबाजी
विधान परिषद चुनाव में सभी चार सीटों पर एनडीए की जीत के बाद कर्नाटक से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।भाजपा इन परिणामों को कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनसमर्थन का संकेत बता रही है, जबकि वास्तविक चुनावी आंकड़े केवल संबंधित चार निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की पसंद को दर्शाते हैं।अश्विनी वैष्णव समेत भाजपा नेताओं की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि पार्टी इन नतीजों को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस से भी जोड़ रही है।आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इस हार की समीक्षा किस तरह करती है और भाजपा-जेडीएस गठबंधन अपनी चुनावी एकजुटता को किस प्रकार आगे बढ़ाता है।