नई दिल्ली: भारतीय नौसेना ने अरब सागर में समुद्री लुटेरों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण अभियान को अंजाम देते हुए मछली पकड़ने वाले पोत ‘अजिनी’ और उसके सभी 20 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित मुक्त करा लिया। मुंबई से तीन हजार किलोमीटर से अधिक दूर चलाया गया यह अभियान 48 घंटे तक चला। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार, दो नवंबर को अभियान की सफलता की जानकारी दी और नौसेना के जवानों को बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई में भारतीय वायुसेना ने भी समय पर सहयोग दिया। 
रक्षा मंत्री के अनुसार, नौसेना ने पहले समुद्री लुटेरों के कब्जे में मौजूद पोत का पता लगाया और फिर उसे रोककर चालक दल की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित की। लुटेरे भारी हथियारों से लैस थे, जिससे अभियान के दौरान बंधक बनाए गए लोगों की सुरक्षा बेहद अहम थी। कार्रवाई के बाद पोत को भी उनके कब्जे से मुक्त करा लिया गया। राजनाथ सिंह ने इस सफलता को नौसेना की परिचालन तैयारियों और समुद्री खतरों का निर्णायक जवाब देने की क्षमता का उदाहरण बताया। 
‘अजिनी’ ईरानी मछली पकड़ने वाला पोत है, जिसे सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास अगवा किया गया था। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, अपहरण की घटना गुरुवार को बंदर बायला और हाफुन के बीच हुई थी। इसके बाद पोत की गतिविधियों को लेकर निगरानी बढ़ाई गई। आशंका थी कि समुद्री लुटेरे इसका इस्तेमाल दूसरे जहाजों तक पहुंचने के लिए कर सकते हैं। इस खतरे के कारण आसपास के वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई थी। समुद्री सुरक्षा केंद्र की चेतावनी में कहा गया था कि अगवा किया गया पोत एक व्यस्त व्यापारिक समुद्री मार्ग की ओर बढ़ रहा है। ऐसे मामलों में मछली पकड़ने वाले पोत को ‘मदरशिप’ यानी हमलों के लिए समुद्र में मौजूद आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे छोटी नौकाओं पर सवार लुटेरों को तट से काफी दूर तक पहुंचने में मदद मिलती है। ‘अजिनी’ को मुक्त कराए जाने से उसके जरिए दूसरे व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की आशंका भी कम हुई है। 
अभियान की सफलता पर राजनाथ सिंह ने नौसेना और वायुसेना के बीच समन्वय की सराहना की। उन्होंने कहा कि जवानों ने समुद्र में लोगों की जान बचाने, समुद्री सुरक्षा बनाए रखने और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने का भारत का संकल्प प्रदर्शित किया है। रक्षा मंत्री ने सुरक्षित समुद्र और स्वतंत्र, खुले तथा सुरक्षित हिंद महासागर क्षेत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उनके संदेश में अभियान के दौरान चालक दल और पोत, दोनों की सुरक्षित रिहाई को विशेष महत्व दिया गया। मुंबई से इतनी अधिक दूरी पर अभियान पूरा होना भारतीय नौसेना की दूर समुद्र तक कार्रवाई करने की क्षमता को भी दर्शाता है। तट से हजारों किलोमीटर दूर किसी अगवा पोत तक पहुंचना और वहां लगातार अभियान चलाना निगरानी, संसाधनों तथा अलग-अलग सैन्य इकाइयों के समन्वय की मांग करता है। इस मामले में वायुसेना की मदद का उल्लेख रक्षा मंत्री ने स्वयं किया है। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक विवरण में वायुसेना की ओर से इस्तेमाल किए गए विमानों और उनकी विशिष्ट भूमिका की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। 
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर में समुद्री लूट की घटनाओं को लेकर फिर चिंता बढ़ी है। सोमालिया के आसपास सक्रिय लुटेरे मछली पकड़ने वाले पोतों के साथ व्यापारिक जहाजों को भी निशाना बनाते रहे हैं। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के लिए अगवा पोतों की निगरानी इसलिए महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि उनका उपयोग आगे की आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता है। ‘अजिनी’ के मामले में भी व्यापारिक समुद्री मार्ग के नजदीक उसकी मौजूदगी को लेकर चेतावनी सामने आई थी। भारतीय नौसेना पहले भी क्षेत्र में समुद्री लुटेरों के खिलाफ बचाव अभियान चला चुकी है। मार्च 2024 में युद्धपोत आईएनएस कोलकाता ने अगवा जहाज एमवी रुएन के खिलाफ कार्रवाई की थी। उस अभियान में भारतीय वायुसेना के सी-17 विमान से समुद्री कमांडो और नौकाएं उतारी गई थीं। लंबी कार्रवाई के बाद 35 समुद्री लुटेरों ने आत्मसमर्पण किया था। वह घटना भी भारतीय तट से काफी दूर हुई थी और उसमें नौसेना तथा वायुसेना का संयुक्त प्रयास सामने आया था। 
इसके अलावा जनवरी 2024 में आईएनएस सुमित्रा ने दो अलग-अलग ईरानी मछली पकड़ने वाले पोतों को समुद्री लुटेरों से मुक्त कराया था। बाद में आईएनएस सुमेधा और आईएनएस त्रिशूल ने भी अल-कंबर नामक पोत के चालक दल को बचाया था। इन अभियानों में विदेशी नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई थी। अरब सागर और अदन की खाड़ी में नौसेना की तैनाती समुद्री लूट की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने तथा संकट में फंसे जहाजों की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।‘अजिनी’ से जुड़े मौजूदा अभियान में आधिकारिक घोषणा का प्रमुख तथ्य सभी 20 क्रू मेंबर्स और पोत की सुरक्षित रिहाई है। कार्रवाई में इस्तेमाल की गई पूरी रणनीति तथा लुटेरों के खिलाफ आगे की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 48 घंटे के समन्वित प्रयास से बंधक नाविकों को मुक्त कराया गया। रक्षा मंत्री ने इस सफलता के लिए अभियान में शामिल सैन्यकर्मियों की तैयारी, तत्परता और कार्रवाई की क्षमता की सराहना की है।
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