ECI विवाद पर नरेश बंसल का विपक्ष पर निशाना, बोले- फैसले सर्वसम्मति से होते हैं
Delhi दिल्ली। भाजपा सांसद नरेश बंसल ने निर्वाचन आयोग (ECI) को लेकर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के भीतर किसी तरह की दुविधा नहीं है और विपक्ष इस मुद्दे को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है। नरेश बंसल ने कहा, “निश्चित रूप से ECI में कहीं कोई दुविधा नहीं है। केवल विपक्ष बवंडर मचाकर ये दिखाने का प्रयास कर रहा है कि ECI में कोई दुविधा है।” उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले अलग-अलग लोगों के अलग-अलग विचार हो सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला विचार-विमर्श के बाद लिया जाता है।
उन्होंने कहा, “सब लोग विचार-विमर्श करके निर्णय करते हैं। निर्णय करने से पहले तीन लोगों के तीन मत हो सकते हैं, लेकिन निर्णय सर्वसम्मति से ही होता है।” बंसल ने अपने बयान में निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी। भाजपा सांसद ने विपक्ष के रवैये को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विपक्ष की स्थिति ऐसी है कि वह अपने अनुकूल बात होने पर व्यवस्था को सही मानता है, लेकिन अपने पक्ष में फैसला नहीं होने पर उसी व्यवस्था पर सवाल उठाने लगता है।
बंसल ने कहा, “विपक्ष की हालत वो है कि ‘मैं न मानूं’। सुप्रीम कोर्ट अगर उनके पक्ष में निर्णय दे तो सुप्रीम कोर्ट अच्छा है, EVM अगर उनके पक्ष में निर्णय दे तो EVM अच्छी है, नहीं तो खराब है। उन्होंने अपने बयान में विपक्ष पर सेना को लेकर टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया। बंसल ने कहा, “जो लोग सेना पर टिप्पणी करने से पीछे नहीं हटते, उनसे आप क्या उम्मीद करेंगे?”
नरेश बंसल का पूरा बयान विपक्ष की ओर से निर्वाचन आयोग को लेकर उठाए जा रहे सवालों के जवाब के रूप में सामने आया है। उन्होंने दावा किया कि आयोग के भीतर किसी तरह की दुविधा नहीं है और निर्णय विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
भाजपा सांसद ने विपक्ष पर संवैधानिक और अन्य संस्थाओं को लेकर अपने राजनीतिक हित के अनुसार रुख अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और EVM का उदाहरण देते हुए कहा कि विपक्ष अपने अनुकूल निर्णय होने पर व्यवस्था को स्वीकार करता है, जबकि विपरीत स्थिति में सवाल खड़े करता है। ECI विवाद को लेकर बंसल ने स्पष्ट रूप से विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अलग-अलग मत होना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से होता है।