नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद जोथिमणि सेन्निमलई ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने तमिलनाडु की भाषा, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और राज्य के लोगों के हितों की लगातार अनदेखी की है। जोथिमणि ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में तमिलनाडु से भाजपा का कोई प्रतिनिधि रहे या नहीं, इससे राज्य की जनता की समस्याओं के समाधान में कोई खास अंतर नहीं पड़ता।समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद ने एल. मुरुगन के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से वह मुरुगन का सम्मान करती हैं, क्योंकि दोनों पड़ोसी जिलों से आते हैं। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री रहते हुए मुरुगन ने तमिलनाडु के लोगों की भावनाओं और अधिकारों की पर्याप्त पैरवी नहीं की।
एल. मुरुगन के इस्तीफे पर कांग्रेस सांसद की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद जोथिमणि ने कहा कि एल. मुरुगन के प्रति उनके मन में व्यक्तिगत सम्मान है, लेकिन भाजपा नेता के रूप में उनके कार्यकाल को लेकर उनकी राजनीतिक असहमति रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि मुरुगन ने केंद्रीय मंत्री रहते हुए तमिलनाडु की जनता के अधिकारों और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए अपेक्षित भूमिका नहीं निभाई।जोथिमणि ने कहा कि तमिलनाडु से किसी भाजपा नेता का केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होना तभी सार्थक माना जा सकता है, जब राज्य से जुड़े मुद्दों और लोगों की समस्याओं को प्रभावी तरीके से उठाया जाए।
मोदी सरकार पर भाषा और संस्कृति की अनदेखी का आरोप
जोथिमणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर तमिलनाडु की भाषा तथा सांस्कृतिक पहचान के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया।उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की नीतियां लगातार राज्य की क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं रही हैंकांग्रेस सांसद ने कहा कि तमिलनाडु की भाषा, संस्कृति और आर्थिक हितों को पर्याप्त महत्व देना आवश्यक है। उन्होंने भाजपा के राजनीतिक दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए केंद्र सरकार से राज्य के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की मांग की।हालांकि ये आरोप कांग्रेस सांसद के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। भाजपा और केंद्र सरकार तमिल भाषा, संस्कृति तथा राज्य के विकास के लिए किए गए विभिन्न प्रयासों का उल्लेख करती रही हैं।
स्कूली शिक्षा के बकाया फंड का मुद्दा उठाया
जोथिमणि ने केंद्र सरकार और तमिलनाडु के बीच स्कूली शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता को लेकर चल रहे विवाद का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि राज्य अभी तक स्कूली शिक्षा के लिए अपने बकाया फंड की मांग कर रहा है। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।यह विवाद समग्र शिक्षा अभियान के तहत केंद्रीय सहायता से भी जुड़ा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य के लिए 5,110 करोड़ रुपये की लंबित शिक्षा निधि बिना शर्त जारी करने का अनुरोध किया था।
एल. मुरुगन ने केंद्रीय मंत्री पद से दिया इस्तीफा
एल. मुरुगन ने मंगलवार को केंद्रीय राज्य मंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ने की इच्छा जताई।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में मुरुगन ने कहा कि वह तमिलनाडु में भाजपा के संगठन को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना चाहते हैं।उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश और तमिलनाडु की सेवा करने का अवसर मिलने पर आभार व्यक्त किया।मुरुगन ने अपने पत्र में कहा कि वह केंद्रीय जिम्मेदारियों से मुक्त होकर तमिलनाडु में पार्टी संगठन के लिए पूरा समय देना चाहते हैं।
केंद्रीय कैबिनेट में प्रतिनिधित्व पर उठाए सवाल
जोथिमणि ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व केवल किसी नेता की मौजूदगी तक सीमित नहीं होना चाहिए।उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य से आने वाले केंद्रीय मंत्री ने तमिलनाडु की जनता की मांगों और अधिकारों के लिए क्या भूमिका निभाई।कांग्रेस सांसद के अनुसार, राज्य के लोगों के लिए शिक्षा, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। इन पर केंद्र सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
तमिलनाडु में राजनीतिक बयानबाजी तेज
एल. मुरुगन के इस्तीफे और कांग्रेस सांसद जोथिमणि की प्रतिक्रिया के बाद तमिलनाडु में भाजपा तथा कांग्रेस के बीच राजनीतिक मतभेद फिर सामने आए हैं।एक ओर मुरुगन ने संगठन को मजबूत करने के लिए राज्य की राजनीति में लौटने की इच्छा जताई है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने उनके केंद्रीय मंत्री के कार्यकाल में तमिलनाडु के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है।फिलहाल राज्य में स्कूली शिक्षा के बकाया फंड, क्षेत्रीय अधिकारों और केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक चर्चा जारी है।
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