नई दिल्ली। वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों की 42वीं बरसी पर राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने उस भयावह दौर को याद करते हुए पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की मांग की है। रविवार, 1 नवंबर 2026 को दिल्ली में दंगा पीड़ितों से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि 1984 में सिख समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा सामान्य दंगा नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर किया गया कत्लेआम था। साहनी ने आरोप लगाया कि हिंसा सुनियोजित तरीके से की गई थी और सिख परिवारों को पहचानकर निशाना बनाया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पीड़ित परिवारों को पूरा न्याय क्यों नहीं मिल सका है।
अपने परिवार के चार सदस्यों को खोने का दर्द किया साझा
सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने 1984 की हिंसा के दौरान अपने परिवार पर बीती त्रासदी को याद किया। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के चार सदस्यों को जिंदा जला दिया गया था। इस घटना ने उनके परिवार को गहरा आघात पहुंचाया था।साहनी ने कहा कि उस दौर में सिखों को पहचानकर निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक, लोगों के गले में जलते हुए टायर डाल दिए जाते थे और घरों तथा दुकानों को आग के हवाले कर दिया जाता था।उन्होंने आरोप लगाया कि 31 अक्टूबर 1984 की रात से ही सिख परिवारों के घरों को चिह्नित करने का काम शुरू हो गया था। इसके बाद भीड़ ने अलग-अलग इलाकों में हिंसा की घटनाओं को अंजाम दिया।साहनी ने इस हिंसा को सुनियोजित बताते हुए कहा कि इसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
हथियार और ज्वलनशील पदार्थ बांटने का आरोप
विक्रमजीत सिंह साहनी ने 1984 की हिंसा के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियारों और पदार्थों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि हमलावरों के पास एक जैसी लोहे की छड़ें थीं और एक विशेष प्रकार के सफेद पाउडर का इस्तेमाल आग लगाने के लिए किया गया था।सांसद ने सवाल किया कि इतने बड़े पैमाने पर एक जैसे हथियार और पदार्थ कहां से आए थे। इन्हें किसने तैयार किया और हिंसा से पहले लोगों तक कैसे पहुंचाया गया?उन्होंने आरोप लगाया कि हिंसा की तैयारी पहले से की गई थी और कुछ अपराधियों को भी इसमें शामिल किया गया। साहनी ने कहा कि इन आरोपों की गहराई से जांच होनी चाहिए, ताकि हिंसा की साजिश और उसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।हालांकि, हथियारों और अन्य सामग्रियों के सुनियोजित वितरण संबंधी उनके इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
42 साल बाद भी न्याय का इंतजार
साहनी ने कहा कि 1984 की हिंसा को 42 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन कई पीड़ित परिवार आज भी न्याय और पुनर्वास से जुड़े सवालों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को केवल आश्वासन देने से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा।सांसद ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की पूर्व सरकारों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद पीड़ित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार से संबंधित समस्याओं का पर्याप्त समाधान नहीं किया गया।उन्होंने पूछा कि चुनाव के समय पीड़ितों से किए गए वादों को कितना पूरा किया गया और कितने परिवारों को रोजगार तथा स्थायी आर्थिक सहायता मिली।साहनी ने कहा कि पीड़ितों को सम्मानजनक जीवन और न्याय दिलाना सरकारों की जिम्मेदारी है।
1984 में हजारों सिखों की हुई थी हत्या
31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा भड़क उठी थी।हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में सिखों की हत्या की गई, घरों और दुकानों में आग लगाई गई तथा हजारों परिवार विस्थापित हुए। दिल्ली में आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2,733 सिखों की मौत हुई थी।इन घटनाओं की जांच के लिए विभिन्न आयोगों, समितियों और विशेष जांच दलों का गठन किया गया। कई मामलों में अदालतों ने दोषियों को सजा भी सुनाई है। इसके बावजूद अनेक पीड़ित परिवारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सभी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का काम अब भी अधूरा है।
खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
विक्रमजीत सिंह साहनी पहले भी 1984 के सिख विरोधी दंगों से संबंधित खुफिया रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर चुके हैं।उन्होंने नवंबर 2023 में कहा था कि इंटेलिजेंस ब्यूरो और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग सहित संबंधित एजेंसियों की उपलब्ध रिपोर्टों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि देश को हिंसा से जुड़ी सच्चाई का पता चल सके।साहनी ने दंगा पीड़ितों के बकाया बिजली बिल और पुनर्वास के लिए आवंटित मकानों के गृह ऋण पर ब्याज माफ करने की मांग भी उठाई थी।उनका कहना है कि पीड़ित परिवारों को आर्थिक राहत के साथ कानूनी सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
दिल्ली में बीजेपी ने निकाला विरोध मार्च
1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी पर रविवार को दिल्ली में बीजेपी और सिख संगठनों ने विरोध मार्च निकाला। यह मार्च हरि नगर से तिलक नगर क्षेत्र तक आयोजित किया गया।कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका सहित कई नेता शामिल हुए।प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए माफी मांगने की मांग की। बीजेपी नेताओं ने उसी दिन दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली आयोजित करने के फैसले की भी आलोचना की।वहीं, विपक्षी गठबंधन की रैली चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित मुद्दों पर केंद्रित थी।
पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग
सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि 1984 की घटनाओं को केवल इतिहास का हिस्सा मानकर भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पीड़ित परिवारों के दर्द को समझने और उनकी समस्याओं के स्थायी समाधान की आवश्यकता बताई।उनका कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को रोजगार, आर्थिक सहायता और सम्मानजनक पुनर्वास मिलना चाहिए।1984 के सिख विरोधी दंगों की 42वीं बरसी पर एक बार फिर न्याय, जवाबदेही और पुनर्वास का मुद्दा चर्चा में है। साहनी की मांग ने उन परिवारों की पीड़ा को सामने रखा है, जो दशकों बाद भी अपने परिजनों को खोने के दर्द और न्याय की लंबी लड़ाई से जुड़े हुए हैं।