मोगा अपने सपूत, डॉ. नरिंदर सिंह कपानी की जन्म शताब्दी मनाने जा रहा है। डॉ. कपानी को 'फाइबर ऑप्टिक्स के जनक' के रूप में जाना जाता है। इस अवसर पर शुक्रवार से दो दिवसीय विज्ञान प्रदर्शनी और एक मेमोरियल गैलरी (स्मारक गैलरी) का उद्घाटन किया जाएगा। इन आयोजनों का उद्देश्य डॉ. कपानी के जीवन, उनकी उपलब्धियों और उनकी जन्मभूमि के साथ उनके जुड़ाव को प्रदर्शित करना है। शनिवार को उनकी 100वीं जयंती है। 31 अक्टूबर 1926 को मोगा में जन्मे और देहरादून में पले-बढ़े डॉ. कपानी ने ऑप्टिकल फाइबर के जरिए तस्वीरें भेजने के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम किया। वे आधुनिक फाइबर-ऑप्टिक संचार के अग्रदूतों में से एक बने। दिसंबर 2020 में अमेरिका में उनका निधन हो गया।
यह पहल डिप्टी कमिश्नर सागर सेतिया और एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (ADC) जसपिंदर सिंह भुल्लर की सोच का नतीजा है। उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. कपानी के योगदान को याद करने और छात्रों को नवाचार (इनोवेशन) के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की है। भुल्लर ने 'द ट्रिब्यून' को बताया कि अब से हर साल इस तरह का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम मोगा के सेक्रेड हार्ट स्कूल में होगा। इसकी थीम 'साइंस बियॉन्ड बाउंड्रीज़ — फ्रॉम लाइट टू लाइफ, अर्थ टू स्पेस' (सीमाओं से परे विज्ञान — प्रकाश से जीवन तक, पृथ्वी से अंतरिक्ष तक) रखी गई है। इसमें मोगा के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के छात्र हिस्सा लेंगे।
प्रदर्शनी में छह विज्ञान जोन होंगे — प्रकाश, जीवन, पृथ्वी, स्वच्छ, आकाश और अंतरिक्ष। इनमें ऑप्टिकल फाइबर और फोटोनिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, रिमोट सेंसिंग, पर्यावरण विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन टेक्नोलॉजी, ड्रोन तकनीक और अंतरिक्ष अन्वेषण जैसे विषय शामिल होंगे। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण 'कपानी मेमोरियल गैलरी' होगी, जिसमें उनके शुरुआती जीवन, मोगा के साथ उनके जुड़ाव और वैज्ञानिक उपलब्धियों को दर्शाया जाएगा। कार्यक्रम में छात्रों द्वारा बनाए गए मॉडल, वर्किंग प्रोटोटाइप और लाइव प्रदर्शन देखने को मिलेंगे। इसके अलावा, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (GNDU) और लुधियाना स्थित 'मुंजाल बर्मिंघम सिटी यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप' के प्रोफेसर शैक्षणिक सत्रों का संचालन करेंगे।
जिला प्रशासन का लक्ष्य छात्रों के बीच वैज्ञानिक जिज्ञासा और नवाचार को बढ़ावा देने वाली पहलों के जरिए डॉ. कपानी की विरासत को आगे बढ़ाना है। इसमें उनके नाम पर एक पब्लिक लाइब्रेरी बनाना और जिले के शिक्षण संस्थानों के लिए एक 'एनुअल साइंस डेमोंस्ट्रेशन रनिंग ट्रॉफी' (वार्षिक विज्ञान प्रदर्शन ट्रॉफी) शुरू करना शामिल है। इन समारोहों का समापन कपानी को श्रद्धांजलि देने, छात्रों की परियोजनाओं के मूल्यांकन, 'डॉ. कपानी यंग इनोवेटर अवार्ड' प्रदान करने और उनके सम्मान में सार्वजनिक पुस्तकालय का नाम रखने की घोषणा के साथ होगा।