नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। उपलब्ध कैबिनेट निर्णय के विवरण के अनुसार, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही योजना और इसकी उप-योजनाओं के नाम बदलने तथा दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता, कवरेज और सहायता दर में संशोधन को भी मंजूरी देने की बात कही गई है।इस फैसले का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्गों, विधवा महिलाओं, दिव्यांगजनों और परिवार के कमाने वाले सदस्य को खो चुके पात्र परिवारों के लिए सामाजिक सहायता की व्यवस्था जारी रखना है।
नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम का बदलेगा नाम
दिए गए कैबिनेट निर्णय के अनुसार, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' करने को मंजूरी दी गई है।इसके साथ ही कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित उप-योजनाओं के नामों में भी बदलाव किया जाएगा।इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS) का नाम बदलकर 'प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना' करने की बात कही गई है।अक्टूबर 2026 में इन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के नाम बदलने का प्रस्ताव भी चर्चा में रहा है। हालांकि, नाम परिवर्तन और ₹53,428 करोड़ के आवंटन की विस्तृत आधिकारिक अधिसूचना की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं हो सकी है।
पांच वर्षों तक जारी रहेगी सामाजिक सहायता
प्रस्ताव के अनुसार, योजना को 2026-27 से लेकर 2030-31 तक पांच वित्त वर्षों के लिए जारी रखने का फैसला किया गया है।इस अवधि के लिए 53,428 करोड़ रुपये का कुल वित्तीय प्रावधान बताया गया है। यह राशि पांच वर्षों की अवधि के लिए है, न कि एक वर्ष के लिए।राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होता है। इसका उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले पात्र परिवारों को सामाजिक सुरक्षा के रूप में आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है।मार्च 2026 में ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, एनएसएपी के अंतर्गत लगभग 3.09 करोड़ लाभार्थियों को सहायता देने की व्यवस्था थी।
दिव्यांगजन पेंशन की शर्तों में बदलाव
कैबिनेट प्रस्ताव में दिव्यांगजन पेंशन से जुड़े महत्वपूर्ण संशोधन शामिल हैं।इनमें पेंशन प्राप्त करने की पात्रता संबंधी शर्तों, लाभार्थियों के कवरेज और आर्थिक सहायता की दर में बदलाव का उल्लेख किया गया है।हालांकि, दिव्यांगजन पेंशन की संशोधित राशि कितनी होगी और पात्रता के नए मानदंड क्या होंगे, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।इसलिए नए प्रावधानों के तहत कितनी पेंशन मिलेगी, यह संबंधित विभाग की विस्तृत अधिसूचना से स्पष्ट होगा।
बुजुर्गों और विधवाओं की पेंशन जारी रहेगी
कैबिनेट निर्णय के अनुसार, वृद्धावस्था पेंशन और विधवा पेंशन योजनाओं को उनके मौजूदा स्वरूप में जारी रखने का प्रावधान शामिल है।इसका अर्थ है कि इन दोनों योजनाओं की मौजूदा पात्रता और सहायता व्यवस्था को बनाए रखने का प्रस्ताव है।राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत पात्र बुजुर्गों और विधवा महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।राज्य सरकारें भी केंद्र की सहायता राशि के अतिरिक्त अपने संसाधनों से पेंशन में योगदान कर सकती हैं। इस कारण अलग-अलग राज्यों में लाभार्थियों को मिलने वाली कुल राशि भिन्न हो सकती है।
परिवार लाभ योजना भी रहेगी जारी
राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना को भी मौजूदा स्वरूप में जारी रखने की बात कही गई है।इस योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है, जिनके मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु हो जाती है।ऐसी परिस्थितियों में परिवार के सामने अचानक आय का संकट पैदा हो सकता है। योजना के माध्यम से पात्र परिवार को एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, एनएसएपी के अंतर्गत वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन, राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना और अन्नपूर्णा योजना शामिल रही हैं।
सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को जारी रखने पर जोर
केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव में सामाजिक सहायता कार्यक्रम को अगले पांच वर्षों तक जारी रखना प्रमुख फैसला है।इसके तहत बुजुर्गों और विधवाओं के लिए मौजूदा पेंशन व्यवस्था बनाए रखने के साथ दिव्यांगजनों की सहायता संबंधी प्रावधानों में संशोधन किया जाना है।अब लाभार्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि नाम परिवर्तन, नई पात्रता शर्तें और संशोधित सहायता दर कब से लागू होंगी।योजना से संबंधित विस्तृत सरकारी आदेश जारी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन लाभार्थियों को नए नियमों का लाभ मिलेगा और भुगतान व्यवस्था में क्या बदलाव होंगे।
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