नई दिल्ली : संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति की मंगलवार को राजधानी दिल्ली में हुई बैठक के दौरान सैनिक स्कूलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठनों की कथित बढ़ती भागीदारी को लेकर तीखी चर्चा हुई। बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सैनिक स्कूलों के संचालन में आरएसएस से जुड़े संगठनों की भूमिका अनावश्यक रूप से बढ़ाई जा रही है। उन्होंने इस संबंध में कुछ मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए मामले की जांच की आवश्यकता बताई। राहुल गांधी के इस बयान पर समिति के अन्य सदस्यों ने आपत्ति जताई और उनसे आरोपों के समर्थन में ठोस दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा।
सूत्रों के अनुसार, रक्षा संबंधी स्थायी समिति की बैठक के दौरान राहुल गांधी ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित सैनिक स्कूलों में आरएसएस से जुड़े संगठनों की भूमिका का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि इस व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए इसकी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने मीडिया में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए समिति से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।
राहुल गांधी की टिप्पणी पर समिति के अध्यक्ष राधा कृष्ण सिंह ने कहा कि यदि उनके पास इस संबंध में कोई दस्तावेज, रिपोर्ट या अन्य साक्ष्य हैं तो उन्हें समिति के समक्ष उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राप्त दस्तावेजों को संबंधित मंत्रालय के पास भेजा जाएगा ताकि तथ्यों की जांच कर उचित जवाब दिया जा सके। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि समिति तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई करेगी।
बैठक के दौरान समिति के सदस्य और भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यह आरोप किस आधार पर लगाए जा रहे हैं और क्या इसके समर्थन में कोई आधिकारिक प्रमाण मौजूद है। इस पर राहुल गांधी ने मीडिया रिपोर्टों का उल्लेख किया। समिति ने इस पूरे मामले की तथ्यात्मक समीक्षा कराने पर सहमति जताई।
सूत्रों के मुताबिक बैठक के अंत में समिति ने यह भी तय किया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत जिन संस्थाओं को सैनिक स्कूलों के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है, उनकी सूची और चयन प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी। जानकारी के अनुसार, वर्तमान में देशभर में लगभग **70 सैनिक स्कूल** विभिन्न संगठनों को पीपीपी मॉडल के तहत आवंटित किए गए हैं। इनमें **विद्या भारती** और **सरस्वती शिशु मंदिर** जैसे संगठन भी शामिल बताए जाते हैं। हालांकि सरकार की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण गतिविधि भी चर्चा में रही। जानकारी के अनुसार, **आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत** 6 अगस्त को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में **जेन अल्फा** और **जेन-जी** पीढ़ी के छात्रों को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम **इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (I.I.M.U.N.)** की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। मुंबई स्थित **नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर** में होने वाले इस कार्यक्रम में देशभर के 100 से अधिक शहरों से 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के करीब 2,000 छात्र भाग लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं के बीच नेतृत्व क्षमता, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय मुद्दों पर संवाद को बढ़ावा देना बताया गया है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष **हर्षवर्धन सपकाल** ने भी भाजपा और आरएसएस को लेकर राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और आरएसएस अपने वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री **देवेंद्र फडणवीस** को केंद्र की राजनीति में लाना चाहते हैं। सपकाल ने यह भी कहा कि फडणवीस को केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है और महाराष्ट्र में त्रिभाषा नीति तथा हिंदी भाषा को लेकर उठे विवाद को भी इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया।
हालांकि देवेंद्र फडणवीस पहले भी ऐसी अटकलों को खारिज कर चुके हैं। हाल के दिनों में उनके दिल्ली दौरे और केंद्रीय स्तर पर संभावित भूमिका को लेकर कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं सामने आई थीं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया था कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान महाराष्ट्र सरकार के कार्यों पर है।
रक्षा संबंधी स्थायी समिति की बैठक में सैनिक स्कूलों को लेकर उठे मुद्दे ने एक बार फिर शिक्षा, रक्षा और वैचारिक संस्थाओं की भूमिका पर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। अब समिति द्वारा मांगे गए दस्तावेजों और संबंधित मंत्रालय की प्रतिक्रिया के बाद ही इस मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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