नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी में खतरनाक इमारतों, अवैध निर्माण और मास्टर प्लान ऑफ दिल्ली (MPD) तथा बिल्डिंग बाय-लॉज के उल्लंघन के खिलाफ अपना शहरव्यापी प्रवर्तन अभियान बुधवार को भी जारी रखा। निगम की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक सभी 12 जोन में सख्त कार्रवाई करते हुए 36 स्थानों पर तोड़फोड़ की गई। इसके अलावा बिल्डिंग नियमों के उल्लंघन के कारण दो संपत्तियों को सील किया गया और तीन संपत्तियों के खिलाफ डिमोलिशन ऑर्डर जारी किए गए।
MCD का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य भवन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा को मजबूत करना है। निगम उन इमारतों पर विशेष नजर रख रहा है जहां अवैध निर्माण, स्वीकृत नक्शे से ज्यादा निर्माण, संरचनात्मक खतरे या भूमि उपयोग से जुड़े नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आई हैं।
राजधानी में MCD के कुल 12 जोन हैं, जिनमें सेंट्रल, सिटी-SP, सिविल लाइंस, करोल बाग, केशवपुरम, नजफगढ़, नरेला, नॉर्थ शाहदरा, रोहिणी, साउथ शाहदरा, साउथ और वेस्ट जोन शामिल हैं। निगम ने कहा है कि कार्रवाई केवल किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है और सभी जोन के अधिकारियों को उल्लंघनों की पहचान कर नियमानुसार कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
बुधवार के सघन अभियान में 36 जगहों पर अवैध या नियमों के खिलाफ बने हिस्सों को तोड़ा गया। निगम के मुताबिक कार्रवाई तय प्रक्रिया के तहत की गई। जिन संपत्तियों में ऐसे उल्लंघन पाए गए, जहां तत्काल सीलिंग जरूरी समझी गई, वहां दो परिसरों को सील किया गया। वहीं तीन अन्य मामलों में डिमोलिशन ऑर्डर जारी किए गए हैं, जिसके बाद आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
MCD पिछले कुछ हफ्तों से अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चला रहा है। यह कार्रवाई विशेष रूप से सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना के बाद तेज हुई थी। उस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद राजधानी में इमारतों की सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद निगम ने सभी 12 जोन में निरीक्षण और प्रवर्तन कार्रवाई बढ़ा दी।
इस अभियान के तहत निगम कई तरह के उल्लंघनों की जांच कर रहा है। इनमें बिना अनुमति अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण, स्वीकृत बिल्डिंग प्लान में बदलाव, भवन का गलत इस्तेमाल, कमजोर या खतरनाक ढांचे और मास्टर प्लान के प्रावधानों का उल्लंघन शामिल है।
निगम ने साफ किया है कि कार्रवाई केवल नई इमारतों तक सीमित नहीं है। पुरानी और संरचनात्मक रूप से कमजोर इमारतों को भी चिन्हित किया जा रहा है। यदि निरीक्षण के दौरान किसी भवन को लोगों के लिए खतरा माना जाता है तो उसके खिलाफ मरम्मत, खाली कराने, सीलिंग या तोड़फोड़ जैसी कार्रवाई नियमों के अनुसार की जा सकती है।
MCD के हालिया अभियान में रोजाना अलग-अलग क्षेत्रों में कार्रवाई देखने को मिली है। मंगलवार को भी निगम ने सभी 12 जोन में 29 जगहों पर तोड़फोड़ की थी, जबकि 10 संपत्तियों को सील किया गया और सात डिमोलिशन ऑर्डर जारी किए गए थे। इससे एक दिन पहले भी कई इलाकों में अभियान चलाया गया था।
इससे पहले सितंबर के दौरान कई दिनों में 30 से 40 से अधिक जगहों पर एक ही दिन में कार्रवाई की गई। निगम ने कहा है कि जिन संपत्तियों में लगातार बिल्डिंग नियमों का उल्लंघन सामने आएगा, वहां अभियान जारी रहेगा।
MCD ने खास तौर पर ऐसे इलाकों पर ध्यान बढ़ाया है जहां घनी आबादी के बीच तेजी से अतिरिक्त निर्माण किया गया है। कई जगह पुराने मकानों पर बिना पर्याप्त संरचनात्मक मजबूती के अतिरिक्त फ्लोर बनाए जाने को भी सुरक्षा की दृष्टि से जोखिम माना जाता है।
निगम के अधिकारियों का कहना है कि बिल्डिंग बाय-लॉज केवल निर्माण की अनुमति से जुड़े नियम नहीं हैं, बल्कि उनमें भवन की ऊंचाई, संरचनात्मक सुरक्षा, वेंटिलेशन, खुले स्थान और दूसरे कई तकनीकी पहलू शामिल होते हैं। इन नियमों के उल्लंघन से रहने वाले लोगों के साथ आसपास के निवासियों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने पेइंग गेस्ट यानी PG के रूप में इस्तेमाल की जा रही इमारतों का भी बड़े पैमाने पर सर्वे किया था। हालिया आंकड़ों के मुताबिक 2,453 PG इमारतों की पहचान की गई, जिनमें 50 हजार से अधिक लोगों के रहने का अनुमान था। इनमें से कई भवनों में मंजूरी और सुरक्षा मानकों को लेकर कमियां सामने आने के बाद निगम ने जांच और प्रवर्तन प्रक्रिया तेज की।
अभियान के दौरान निगम को कई जगह स्थानीय पुलिस की मदद भी लेनी पड़ती है। बड़े निर्माण को हटाने के लिए गैस कटर, मशीनरी और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ मामलों में भवन के केवल अवैध हिस्से हटाए जाते हैं, जबकि गंभीर उल्लंघन या असुरक्षित निर्माण की स्थिति में बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
MCD ने कहा है कि उसके अधिकारी पूरे शहर में लगातार निगरानी कर रहे हैं और चिन्हित उल्लंघनों के खिलाफ निर्धारित नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है। निगम का जोर इस बात पर है कि किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय संभावित खतरों की पहचान पहले ही की जाए।
बुधवार की 36 तोड़फोड़ कार्रवाइयों के साथ MCD ने एक बार फिर संकेत दिया है कि अवैध निर्माण और खतरनाक इमारतों के खिलाफ अभियान फिलहाल जारी रहेगा। जिन संपत्तियों को सील किया गया है या जिनके खिलाफ डिमोलिशन ऑर्डर जारी हुए हैं, उन पर आगे की प्रक्रिया भी संबंधित नियमों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर की जाएगी।