नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति देने की मांग को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई है। बुधवार, 4 नवंबर 2026 को हाईकोर्ट ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, सीबीएसई और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में मांग की गई है कि कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों को विशेष रूप से गणित और अकाउंटेंसी जैसी परीक्षाओं में सामान्य कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए। अदालत ने संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की खंडपीठ ने की। अदालत ने याचिका में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित अधिकारियों से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। हालांकि, न्यायालय ने फिलहाल परीक्षाओं में कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति देने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। अब सभी पक्षों का जवाब आने के बाद मामले पर आगे विचार किया जाएगा।
यह जनहित याचिका दिल्ली के पीतमपुरा निवासी विशाल दुआ ने अपनी ओर से और 10 अन्य अभिभावकों की ओर से दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि वर्तमान परीक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों को लंबी और जटिल गणनाएं हाथ से करनी पड़ती हैं। इससे परीक्षा का काफी समय गणना करने में ही निकल जाता है और विद्यार्थियों को विषय की अवधारणाओं को समझने तथा उनके आधार पर उत्तर देने की अपनी वास्तविक क्षमता प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।याचिका के अनुसार, अकाउंटेंसी और गणित जैसे विषयों में कई प्रश्न ऐसे होते हैं, जिनमें लंबी गणनाओं की आवश्यकता होती है। विद्यार्थियों को प्रश्न का समाधान समझ में आने के बावजूद गणना पूरी करने में अधिक समय लग सकता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सामान्य कैलकुलेटर की अनुमति मिलने से विद्यार्थी गणना में लगने वाले समय को कम कर सकेंगे और प्रश्नों के समाधान पर अधिक ध्यान दे पाएंगे।याचिका में यह भी कहा गया है कि सीबीएसई की वर्तमान व्यवस्था में कैलकुलेटर पर जारी प्रतिबंध मनमाना है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार से जुड़े सवाल उठाता है। याचिकाकर्ताओं ने अपनी दलील के समर्थन में सीबीएसई की पाठ्यक्रम समिति के एक पूर्व निर्णय का भी उल्लेख किया है।
दरअसल, नवंबर 2024 में आयोजित सीबीएसई की पाठ्यक्रम समिति की बैठक में कक्षा 12वीं की अकाउंटेंसी परीक्षा में सामान्य कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति देने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। याचिका में सवाल उठाया गया है कि समिति द्वारा प्रस्ताव स्वीकार किए जाने के बावजूद इसे परीक्षा व्यवस्था में लागू क्यों नहीं किया गया।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि शिक्षा बोर्ड की संबंधित समिति ने इस सुविधा को उपयोगी माना था, तो उसके कार्यान्वयन की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। साथ ही यह भी विचार किया जाना चाहिए कि गणित जैसे अन्य विषयों में विद्यार्थियों को इसी प्रकार की सुविधा दी जा सकती है या नहीं।इस मामले में सामान्य या नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर की अनुमति देने की मांग की गई है। ऐसे कैलकुलेटर सामान्य गणितीय गणनाओं के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं और इनमें उन्नत प्रोग्रामिंग जैसी सुविधाएं नहीं होतीं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस प्रकार के उपकरणों का सीमित इस्तेमाल परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखते हुए विद्यार्थियों को सहायता प्रदान कर सकता है।
हालांकि, बोर्ड परीक्षाओं में कैलकुलेटर की अनुमति देने का मुद्दा केवल समय बचाने तक सीमित नहीं है। इससे परीक्षा के प्रश्नपत्रों की संरचना, मूल्यांकन प्रणाली और विद्यार्थियों के गणितीय कौशल के परीक्षण से जुड़े सवाल भी सामने आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़े बदलाव से पहले यह देखना आवश्यक होगा कि कैलकुलेटर की अनुमति देने से परीक्षा के मूल उद्देश्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा।वर्तमान व्यवस्था में सीबीएसई की अधिकांश नियमित बोर्ड परीक्षाओं में सामान्य विद्यार्थियों को कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है। निर्धारित नियमों के अंतर्गत कुछ विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए अलग सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं। ऐसे में सभी विद्यार्थियों के लिए इस सुविधा का विस्तार करना बोर्ड की परीक्षा नीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा।याचिका में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कैलकुलेटर संबंधी सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाए, ताकि विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को परीक्षा के दौरान उचित सहायता मिल सके।
इस संबंध में अगस्त 2026 में संबंधित अधिकारियों को एक प्रतिवेदन भी भेजा गया था। इसमें अकाउंटेंसी परीक्षा के लिए पूर्व में स्वीकृत प्रस्ताव की स्थिति स्पष्ट करने और गणित में कैलकुलेटर की अनुमति पर विचार करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई थी।दिल्ली हाईकोर्ट की इस सुनवाई को विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि भविष्य में सीबीएसई कैलकुलेटर के सीमित इस्तेमाल को मंजूरी देता है, तो इसका प्रभाव लाखों विद्यार्थियों की परीक्षा तैयारियों और परीक्षा पद्धति पर पड़ सकता है। हालांकि, ऐसी किसी व्यवस्था को लागू करने से पहले स्पष्ट दिशा-निर्देश और समान परीक्षा परिस्थितियां सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।अदालत के सामने अब प्रमुख सवाल यह है कि परीक्षा में लंबी गणनाओं को हाथ से पूरा करना कितना आवश्यक है और क्या सामान्य कैलकुलेटर के इस्तेमाल से विद्यार्थियों के वास्तविक विषय ज्ञान का बेहतर मूल्यांकन संभव हो सकता है।फिलहाल सीबीएसई, एनसीईआरटी और केंद्र सरकार को छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना है। इसके बाद न्यायालय संबंधित पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की सुनवाई करेगा।छात्रों के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी कैलकुलेटर इस्तेमाल करने के नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सीबीएसई की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी होने तक मौजूदा परीक्षा नियमों का ही पालन करना होगा।
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