नई दिल्ली। अगले साल होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करते हुए कई नई नियुक्तियां की हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने गुरुवार को 24 संगठनात्मक नियुक्तियों की घोषणा की। इनमें राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संगठन), प्रदेश महासचिव (संगठन) और सह-महासचिव (संगठन) जैसे पद शामिल हैं। पार्टी ने कहा है कि ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।
यह संगठनात्मक बदलाव ऐसे समय किया गया है जब भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव चक्र की तैयारियों में जुटी है। इससे एक दिन पहले पार्टी ने सभी 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नई सूची भी जारी की थी। उस सूची में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर समेत अगले साल चुनाव वाले राज्यों में भी नई जिम्मेदारियां दी गई थीं।
अनुभवी संगठन नेताओं को जिम्मेदारी
नई नियुक्तियों में सतीश ढोंड, वी. सतीश, मानस मोहंती और मंत्री श्रीनिवासुलु समेत कई संगठन नेताओं के नाम शामिल हैं। इन नेताओं को अलग-अलग राज्यों और संगठनात्मक क्षेत्रों में जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पार्टी की ओर से किए गए इस बदलाव में संगठन के कामकाज और राज्यों में केंद्रीय नेतृत्व तथा प्रदेश इकाइयों के बीच समन्वय पर जोर दिखाई देता है।
भाजपा ने हाल के महीनों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर संगठन में कई बदलाव किए हैं। अगस्त में नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम घोषित की गई थी। इसमें आठ राष्ट्रीय महासचिव, 16 राष्ट्रीय सचिव और 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शामिल किए गए थे। स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया, जबकि राम माधव और वसुंधरा राजे सिंधिया समेत कई नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी।
इसके बाद सितंबर में राज्य प्रभारियों और सह-प्रभारियों की नियुक्तियां की गईं और अब संगठन से जुड़े पदों पर 24 नेताओं को नई जिम्मेदारी देकर पार्टी ने संगठनात्मक बदलाव का एक और चरण पूरा किया है।
चुनावी राज्यों पर भी नजर
2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव निर्धारित हैं। भाजपा की हाल की नियुक्तियों में इन राज्यों के लिए भी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी विनोद तावड़े को दी गई है, जबकि उनके साथ कई सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। पंजाब की जिम्मेदारी सतीश पूनिया को मिली है। उत्तराखंड में राम माधव को प्रभारी बनाया गया है।
पार्टी ने राज्य स्तर पर संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय के लिए भी अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी दी है। इस तरह हाल की नियुक्तियां केवल चुनाव वाले राज्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पार्टी ने देशभर में संगठनात्मक जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया है।
नितिन नबीन की टीम में लगातार बदलाव
नितिन नबीन के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में कई स्तरों पर बदलाव किए गए हैं। अगस्त में राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई टीम सामने आने के बाद सितंबर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रभारी एवं सह-प्रभारी नियुक्त किए गए। अब 24 संगठनात्मक पदों पर नई नियुक्तियां की गई हैं।
राज्य प्रभारियों की सूची में भी कई वरिष्ठ नेताओं को एक से अधिक राज्यों की जिम्मेदारी मिली है। उदाहरण के तौर पर स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है। सतीश पूनिया को पंजाब के साथ जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि राम माधव को उत्तराखंड और तमिलनाडु का प्रभार सौंपा गया है। सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना की जिम्मेदारी मिली है।
राज्य इकाइयों के साथ बढ़ेगा समन्वय
प्रदेश महासचिव संगठन और सह-महासचिव संगठन जैसे पद भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन पदों पर नियुक्त नेता प्रदेश इकाई के रोजमर्रा के संगठनात्मक काम, केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों और स्थानीय इकाइयों के बीच समन्वय से जुड़े दायित्व निभाते हैं।
नई नियुक्तियों के बाद संबंधित नेताओं को अपने-अपने राज्यों और क्षेत्रों में संगठन से जुड़े कार्य संभालने होंगे। चुनाव वाले राज्यों में इन जिम्मेदारियों में बूथ स्तर के संगठन, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और पार्टी के निर्धारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन जैसे काम शामिल हो सकते हैं। हालांकि किसी खास राज्य के लिए चुनावी रणनीति क्या होगी, इसका विस्तृत विवरण इन नियुक्तियों की घोषणा में सार्वजनिक नहीं किया गया है।
पहले भी बदली गई थी राष्ट्रीय टीम
भाजपा ने अगस्त में अपनी राष्ट्रीय टीम में बदलाव करते हुए पुराने और नए चेहरों को जिम्मेदारी दी थी। उस समय स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव और राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। विनोद तावड़े, सुनील बंसल, बिप्लब कुमार देब, सतीश पूनिया और हरीश द्विवेदी समेत कई नेताओं को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी।
इसके बाद राज्य स्तर पर प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्तियों ने केंद्रीय टीम और प्रदेश संगठनों के बीच जिम्मेदारियों का नया ढांचा तय किया। अब 24 नई संगठनात्मक नियुक्तियों को उसी क्रम की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा की ओर से किए गए इन बदलावों का व्यावहारिक असर आने वाले महीनों में संबंधित प्रदेश इकाइयों के संगठनात्मक कामकाज में दिखाई देगा। फिलहाल पार्टी ने नई जिम्मेदारियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी हैं और नियुक्त नेताओं को अपने-अपने संगठनात्मक दायित्व संभालने हैं।