नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने दिपके को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी। दिल्ली पुलिस के अनुसार, शांति बनाए रखने से संबंधित मुचलके यानी पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद उन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया। दिपके को शुक्रवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से पहले निवारक हिरासत में लिया गया था। उनकी गिरफ्तारी को लेकर संगठन के नेताओं ने सवाल उठाए थे।
स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट से मिली जमानत
शनिवार को अभिजीत दिपके को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान उनकी हिरासत और सार्वजनिक शांति बनाए रखने से जुड़ी परिस्थितियों पर विचार किया गया।अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत देने का फैसला सुनाया। इसके तहत दिपके को शांति बनाए रखने के लिए निर्धारित मुचलके पर हस्ताक्षर करने का निर्देश दिया गया।दिल्ली पुलिस ने बताया कि जमानत की शर्तें पूरी होने के बाद उन्हें रिहा किया जाएगा। अदालत ने इस मामले में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश नहीं दिया।इस फैसले के बाद CJP कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच चर्चा तेज हो गई।
गिरफ्तारी की वैधता पर संगठन ने उठाए गंभीर सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी को चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई में मौलिक अधिकारों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है।रत्ना सिंह ने अदालत से दिपके को तत्काल रिहा करने की मांग की। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लेने की तैयारी कर रहे किसी व्यक्ति को बिना पर्याप्त कानूनी आधार के हिरासत में रखना उचित नहीं है।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों के अंतर्गत आता है, तो पुलिस को निवारक हिरासत जैसी कार्रवाई करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।हालांकि, संगठन के आरोपों के संबंध में पुलिस का पक्ष अलग है। पुलिस ने कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया है।
कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च से पहले हुई थी कार्रवाई
यह पूरा विवाद शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' विरोध मार्च से जुड़ा है।कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कथित विवादों को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया थादिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से पहले ही आयोजकों को नोटिस जारी किया था। पुलिस के अनुसार, संबंधित क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होने के कारण मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी।इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में एकत्रित हुए। इस दौरान पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया और कथित तौर पर प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने के मामले दर्ज किए।
छात्र नेता नेहा बोरा को भी लिया गया था हिरासत में
अभिजीत दिपके के अलावा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी शुक्रवार को हिरासत में लिया गया था।पुलिस ने उन्हें मंडी हाउस के आसपास से हिरासत में लिया था। हालांकि, शनिवार सुबह उन्हें निवारक हिरासत से रिहा कर दिया गया।इस घटनाक्रम के बाद छात्र संगठनों और CJP समर्थकों ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की।संगठनों का कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है।
पहले भी हिरासत में लिए जा चुके हैं अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके के खिलाफ पुलिस की यह पहली निवारक कार्रवाई नहीं थी। इससे पहले 11 अक्टूबर को भी दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के सिलसिले में दिपके सहित CJP के अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया था।उस समय विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को एक वर्ष तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया था।तीनों नेताओं को निर्धारित जमानती मुचलके पर रिहाई मिली थी। इसके बाद संगठन ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की थी।
प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था पर बहस
अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी और सशर्त रिहाई ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा बढ़ा दी हैभारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्रित होने का अधिकार देता है। हालांकि, सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून के अनुसार इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।इस मामले में दिल्ली पुलिस का कहना है कि कार्रवाई संभावित शांति भंग की स्थिति को रोकने के लिए की गई थी। वहीं, CJP का आरोप है कि निवारक हिरासत का इस्तेमाल विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए किया गया।
पीस बॉन्ड के बाद मिली रिहाई
शनिवार को अदालत से सशर्त जमानत मिलने के बाद अभिजीत दिपके की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। बाद में वह CJP प्रवक्ता अनीश गावंडे के करोल बाग स्थित आवास से बाहर आए।उनकी रिहाई के बाद भी मतदाता सूची पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक विवाद बना हुआ है।अब इस मामले में संगठन की आगे की रणनीति और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज मामलों की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
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