रेलवे का बड़ा फैसला, ट्रेन में तेज आवाज में गाने और रील्स चलाना पड़ेगा महंगा
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने ट्रेनों और रेलवे स्टेशन परिसरों में मोबाइल फोन के जरिए तेज आवाज में गाने बजाने, रील्स देखने और स्पीकर मोड पर बातचीत करके दूसरे यात्रियों को परेशान करने वालों के खिलाफ सख्ती बढ़ा दी है। दक्षिण रेलवे ने इस संबंध में अपने सभी मंडलों को निर्देश जारी किए हैं। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर तेज आवाज में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करके यात्रियों को असुविधा पहुंचाना दंडनीय हो सकता है। इसके तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों पर 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर या बार-बार नियमों के उल्लंघन की स्थिति में अधिक कठोर कार्रवाई का प्रावधान भी है।
दक्षिण रेलवे ने 6 अक्टूबर 2026 को जारी सर्कुलर में रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 145 और जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2026 के संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया है। इस निर्देश का उद्देश्य यात्रियों को शांतिपूर्ण और आरामदायक यात्रा का वातावरण उपलब्ध कराना है।
ट्रेन में स्पीकर पर गाने बजाना पड़ेगा महंगा
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेनों में कुछ यात्री बिना इयरफोन लगाए मोबाइल फोन पर तेज आवाज में गाने, फिल्में और सोशल मीडिया रील्स देखते हैं। इससे आसपास बैठे यात्रियों को परेशानी होती है।
विशेष रूप से लंबी दूरी की ट्रेनों में रात के समय तेज आवाज में मोबाइल चलाने से सो रहे यात्रियों, बुजुर्गों और बच्चों को अधिक असुविधा होती है।
इसी समस्या को देखते हुए रेलवे ने यात्रियों से मोबाइल फोन का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करने की अपील की है।
रेलवे का कहना है कि प्रत्येक यात्री को यात्रा के दौरान आराम करने और शांतिपूर्ण वातावरण में सफर करने का अधिकार है।
नियम तोड़ने पर 1000 रुपये तक जुर्माना
दक्षिण रेलवे के निर्देश के अनुसार, ट्रेन या रेलवे परिसर में शोर मचाकर दूसरों को परेशान करने वाले यात्रियों पर रेलवे अधिनियम की धारा 145 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
प्रावधानों के अनुसार, ऐसे मामलों में 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाने की व्यवस्था है।
इसके अलावा लगातार नियमों का उल्लंघन करने और चेतावनी के बाद भी दूसरे यात्रियों को परेशान करने की स्थिति में 5000 रुपये तक के जुर्माने या छह महीने तक के कारावास जैसी कठोर कार्रवाई की भी बात कही गई है।
हालांकि, हर बार मोबाइल का स्पीकर इस्तेमाल करने पर अपने आप जुर्माना नहीं लगेगा। कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित व्यवहार से दूसरे यात्रियों को परेशानी हो रही है या नहीं और कानून के कौन-से प्रावधान लागू होते हैं।
टिकट परीक्षकों को दिया गया कार्रवाई का अधिकार
रेलवे ने टिकट परीक्षक और उससे वरिष्ठ पद के अधिकृत वाणिज्य कर्मचारियों को ऐसे मामलों में निर्धारित जुर्माना लगाने की जिम्मेदारी दी है।
यदि कोई यात्री बार-बार चेतावनी देने के बावजूद तेज आवाज में संगीत बजाता है या दूसरे यात्रियों को परेशान करता है, तो अधिकृत कर्मचारी उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।
आवश्यक परिस्थितियों में रेलवे अधिनियम के अनुसार संबंधित यात्री को ट्रेन या रेलवे परिसर से हटाने की कार्रवाई भी संभव है।
रेलवे का उद्देश्य यात्रियों को दंडित करने के बजाय सार्वजनिक परिवहन में अनुशासन और शांति बनाए रखना है।
स्टेशन परिसर में भी लागू होंगे निर्देश
यह व्यवस्था केवल ट्रेन के डिब्बों तक सीमित नहीं है। रेलवे स्टेशन परिसर में भी मोबाइल फोन के माध्यम से अत्यधिक शोर करने से बचने की सलाह दी गई है।
स्टेशन के प्रतीक्षालयों, प्लेटफॉर्म और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में यात्री मौजूद रहते हैं।
ऐसे में तेज आवाज में संगीत बजाने या स्पीकर पर बातचीत करने से अन्य यात्रियों को असुविधा हो सकती है।
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर मोबाइल फोन की आवाज नियंत्रित रखें।
रेलवे स्टेशनों पर होंगी विशेष घोषणाएं
दक्षिण रेलवे ने अपने सभी संबंधित मंडलों को निर्देश दिया है कि यात्रियों को जागरूक करने के लिए सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली का इस्तेमाल किया जाए।
रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों को तेज आवाज में संगीत तथा वीडियो नहीं चलाने की सलाह दी जाएगी।
इसके अलावा प्लेटफॉर्म और अन्य प्रमुख स्थानों पर जागरूकता संबंधी नोटिस तथा स्टिकर लगाए जाएंगे।
घोषणाएं हिंदी, अंग्रेजी और संबंधित क्षेत्रीय भाषाओं में करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों तक जानकारी पहुंच सके।
इयरफोन इस्तेमाल करने की सलाह
रेलवे ने यात्रियों को मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते समय इयरफोन या हेडफोन लगाने की सलाह दी है।
यात्रियों से कहा गया है कि वे वीडियो, फिल्में, गाने और सोशल मीडिया रील्स देखने के दौरान आसपास बैठे लोगों की सुविधा का ध्यान रखें।
इसके अलावा फोन पर बातचीत करते समय आवाज धीमी रखने और अनावश्यक लंबी बातचीत से बचने की भी अपील की गई है।
रात के समय मोबाइल को साइलेंट या वाइब्रेशन मोड पर रखना भी दूसरे यात्रियों की सुविधा के लिए उपयोगी हो सकता है।
वर्ष 2012 में भी जारी हुए थे दिशा-निर्देश
ट्रेनों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर रेलवे बोर्ड इससे पहले भी निर्देश जारी कर चुका है।
23 जुलाई 2012 को रेलवे बोर्ड ने यात्रियों से तेज आवाज में बातचीत नहीं करने, मोबाइल की रिंगटोन धीमी रखने और दूसरे यात्रियों को अनावश्यक परेशानी से बचाने की अपील की थी।
अब स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इन निर्देशों पर नए सिरे से जोर दिया जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्पीकर मोड में संगीत और वीडियो चलाने की बढ़ती प्रवृत्ति से यात्रियों को असुविधा होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
जन विश्वास अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख
दक्षिण रेलवे ने अपने सर्कुलर में जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत संशोधित रेलवे अधिनियम के प्रावधानों का हवाला दिया है।
इन प्रावधानों के तहत सार्वजनिक उपद्रव और अन्य यात्रियों को परेशान करने वाले व्यवहार पर कार्रवाई की व्यवस्था है।
यह स्पष्ट करना भी महत्वपूर्ण है कि रेलवे में दूसरों को परेशान करने वाला व्यवहार पहले से कानून के दायरे में था। वर्ष 2026 के संशोधनों के बाद संबंधित दंडात्मक प्रावधानों में बदलाव हुआ है।
इसलिए इसे मोबाइल फोन के सामान्य इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
यात्रियों को मिलेगी शांतिपूर्ण यात्रा की सुविधा
रेलवे के इस कदम से विशेष रूप से लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
कई बार रात में यात्रा के दौरान मोबाइल फोन पर तेज आवाज में वीडियो चलाने या लगातार बातचीत करने से दूसरे यात्रियों की नींद प्रभावित होती है।
नई जागरूकता व्यवस्था और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने से ऐसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से नहीं रोका जा रहा है, बल्कि दूसरों की सुविधा का ध्यान रखने को कहा जा रहा है।
नियमों का पालन करना होगा जरूरी
दक्षिण रेलवे की ओर से जारी निर्देशों के बाद स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों को मोबाइल फोन के इस्तेमाल संबंधी नियमों की जानकारी दी जाएगी।
अधिकृत रेलवे कर्मचारी शिकायत मिलने पर संबंधित परिस्थितियों की जांच करके आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगे।
फिलहाल दक्षिण रेलवे ने अपने मंडलों को इस संबंध में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अन्य रेलवे जोन में संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन सभी जोन के लिए एक समान नए अभियान की पुष्टि अलग से आवश्यक है।
रेलवे की इस पहल का प्रमुख उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन में अनुशासन बनाए रखना और यात्रियों को बिना अनावश्यक शोर के सुरक्षित तथा आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराना है।