नई दिल्ली : 28 अक्टूबर 2026। अमेरिका जाने का सपना दिखाकर भारतीय नागरिकों को अवैध रास्तों से विदेश भेजने वाले कथित मानव तस्करी नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने अमेरिका में अवैध प्रवेश कराने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे तीन अलग-अलग 'डंकी रूट' का खुलासा किया है। इस मामले में दिल्ली के ट्रैवल और टिकटिंग एजेंट तरुण खोसला को गिरफ्तार किया गया है। ईडी के मुताबिक, गिरोह के सदस्य विदेश भेजने के नाम पर एक व्यक्ति से 30 लाख से 60 लाख रुपये तक वसूलते थे। लोगों को कानूनी तरीके से अमेरिका पहुंचाने का भरोसा दिलाया जाता था, लेकिन बाद में उन्हें दक्षिण और मध्य अमेरिकी देशों के खतरनाक रास्तों से अमेरिकी सीमा तक ले जाया जाता था।
दिल्ली का ट्रैवल एजेंट तरुण खोसला गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय के जालंधर जोनल कार्यालय ने कथित अवैध आव्रजन नेटवर्क के खिलाफ जांच के दौरान दिल्ली निवासी तरुण खोसला को गिरफ्तार किया।ईडी का आरोप है कि खोसला इस नेटवर्क का महत्वपूर्ण सदस्य था। वह पंजाब और हरियाणा के विभिन्न एजेंटों के संपर्क में था, जो विदेश जाने के इच्छुक लोगों से पैसे और पासपोर्ट इकट्ठा करते थे।इसके बाद ये दस्तावेज और रकम दिल्ली में खोसला तक पहुंचाई जाती थी। आरोप है कि वह लोगों की विदेश यात्रा, टिकट बुकिंग, वीजा संबंधी व्यवस्था और विदेशी एजेंटों से संपर्क स्थापित करने का काम करता था।गिरफ्तारी के बाद आरोपी को विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 30 अक्टूबर 2026 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया।
ईडी ने तीन डंकी रूट का किया खुलासा
ईडी की जांच में सामने आया कि कथित नेटवर्क भारतीय नागरिकों को अमेरिका पहुंचाने के लिए तीन अलग-अलग मार्गों का इस्तेमाल करता था। इन रास्तों में कई देशों की सीमाएं पार करनी पड़ती थीं और यात्रियों को खतरनाक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था।जांच एजेंसी के मुताबिक, प्रत्येक मार्ग के लिए अलग-अलग रकम निर्धारित की जाती थी।
पहला रूट: 35 से 40 लाख रुपये की वसूली
पहले मार्ग में यात्रियों को हवाई यात्रा के जरिए मध्य अमेरिकी देश अल सल्वाडोर पहुंचाया जाता था।इसके बाद उन्हें सड़क मार्ग से मेक्सिको और वहां से तिजुआना क्षेत्र के रास्ते अमेरिकी सीमा तक ले जाया जाता था।ईडी के अनुसार, इस व्यवस्था के लिए प्रति व्यक्ति लगभग 35 लाख से 40 लाख रुपये वसूले जाते थे।
दूसरा रूट: कई देशों और जंगलों से होकर यात्रा
दूसरे मार्ग में लोगों को दुबई या इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा के रास्ते गुयाना पहुंचाया जाता था।इसके बाद ब्राजील, इक्वाडोर, कोलंबिया, पनामा के जंगलों, ग्वाटेमाला और मेक्सिको से होते हुए अमेरिकी सीमा तक पहुंचाने की कथित व्यवस्था की जाती थी।इस मार्ग के लिए लगभग 25 लाख से 30 लाख रुपये प्रति व्यक्ति लिए जाने का आरोप है।
तीसरा रूट: 12 देशों से होकर अमेरिकी सीमा तक सफर
तीसरे मार्ग का खुलासा अमेरिका से निर्वासित किए गए एक भारतीय नागरिक के बयान के आधार पर हुआ।इसमें गुयाना, ब्राजील, बोलीविया, पेरू, कोलंबिया, पनामा, कोस्टा रिका, निकारागुआ, होंडुरास, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला और मेक्सिको से होकर अमेरिकी सीमा तक पहुंचने की यात्रा का उल्लेख किया गया है।जांच एजेंसी का कहना है कि इन रास्तों में कई जगह स्थानीय बिचौलियों और मानव तस्करों की सहायता ली जाती थी।
फरवरी 2025 में अमेरिका से लौटाए गए थे 300 से ज्यादा भारतीय
इस मामले की जांच फरवरी 2025 में अमेरिका से 300 से अधिक भारतीय नागरिकों को निर्वासित किए जाने के बाद तेज हुई थी।अमेरिकी प्रशासन ने इन नागरिकों को अवैध आव्रजन के मामलों में भारत वापस भेजा था।इसके बाद पंजाब और हरियाणा में कथित आव्रजन धोखाधड़ी से जुड़ी कई एफआईआर दर्ज की गईं।ईडी ने इन मामलों के आधार पर धनशोधन रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू की।जांच के दौरान निर्वासित नागरिकों के बयान दर्ज किए गए। कई लोगों ने बताया कि उन्होंने अमेरिका पहुंचने के लिए एजेंटों को लाखों रुपये दिए थे।ईडी के अनुसार, यात्रियों को कानूनी तरीके से विदेश भेजने का भरोसा दिया गया था, लेकिन बाद में उन्हें अवैध सीमा पार करने वाले रास्तों पर भेज दिया गया।
एजेंट के ठिकानों से करोड़ों की नकदी और सोना-चांदी बरामद
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने वर्ष 2025 में कई चरणों में छापेमारी की थी।9 और 11 जुलाई 2025 को ईडी ने 19 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था।जांच के दौरान अधिकारियों को महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और कथित फर्जी आव्रजन मुहरें मिली थीं।इसके बाद दिसंबर 2025 में पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में फिर छापेमारी की गई।ईडी के मुताबिक, तरुण खोसला से संबंधित ठिकानों से करीब 4.62 करोड़ रुपये नकद, लगभग 5.9 किलोग्राम सोना और 313 किलोग्राम चांदी बरामद हुई थी।इनकी कुल अनुमानित कीमत 19.14 करोड़ रुपये बताई गई।इसके अलावा अन्य ठिकानों से 50 से अधिक लोगों के मूल पासपोर्ट, वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए।
मोबाइल फोन से मिले विदेशी एजेंटों के साथ संपर्क के साक्ष्य
ईडी ने दावा किया कि तरुण खोसला के जब्त मोबाइल फोन की जांच में विदेशी एजेंटों के साथ बातचीत के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड मिले हैं।इन बातचीत में हवाई अड्डों पर आव्रजन मंजूरी, टिकट बुकिंग, यात्रियों की आवाजाही और अमेरिकी डॉलर में भुगतान से जुड़ी जानकारियां सामने आईं।जांच एजेंसी का आरोप है कि खोसला विदेशी हवाई अड्डों पर आव्रजन प्रक्रिया से संबंधित व्यवस्थाओं में बिचौलिए की भूमिका निभाता था।इसके अलावा फर्जी येलो फीवर टीकाकरण प्रमाणपत्र बनवाने और कथित फर्जी यात्रा दस्तावेज तैयार कराने से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं।ईडी अब इन विदेशी संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही है।
30 करोड़ रुपये से अधिक के नकद लेनदेन की जांच
ईडी की जांच में बीजे इंटरनेशनल नामक संस्था के बैंक खाते से जुड़े बड़े नकद लेनदेन की जानकारी भी सामने आई है।जांच एजेंसी के अनुसार, तीन वित्त वर्षों में कुल 414 लेनदेन के माध्यम से लगभग 30.38 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए।ईडी इन लेनदेन के स्रोत और कथित अवैध आव्रजन नेटवर्क से इनके संबंध की जांच कर रही है।अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय रिकॉर्ड के विश्लेषण से इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और कथित अवैध कमाई का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
क्या होता है डंकी रूट?
'डंकी रूट' उन अनियमित और अक्सर खतरनाक रास्तों को कहा जाता है, जिनके जरिए लोग बिना आवश्यक आव्रजन अनुमति के दूसरे देशों में प्रवेश करने का प्रयास करते हैं।ऐसी यात्राओं में कई देशों की सीमाएं पार करना, जंगलों से गुजरना और मानव तस्करों पर निर्भर रहना शामिल हो सकता है।इन रास्तों पर यात्रियों को लूटपाट, जबरन वसूली, हिंसा, गिरफ्तारी और निर्वासन जैसे गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।कई मामलों में लोगों को विदेश में नौकरी और बेहतर जीवन का लालच देकर बड़ी रकम वसूली जाती है।
ED की जांच में आगे क्या होगा?
प्रवर्तन निदेशालय अब कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों, विदेशी संपर्कों और धन के प्रवाह का पता लगाने में जुटा है।जांच एजेंसी उन एजेंटों की भूमिका भी खंगाल रही है, जिन्होंने भारतीय नागरिकों से पैसे लेकर उन्हें विदेश भेजने की व्यवस्था की थी।फिलहाल तरुण खोसला के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और अदालत में दोष सिद्ध होना बाकी है।इस मामले ने एक बार फिर अवैध प्रवासन और विदेश भेजने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के खतरों को उजागर किया है। विदेश जाने के इच्छुक लोगों के लिए अधिकृत एजेंटों, वैध वीजा और कानूनी आव्रजन प्रक्रियाओं की जांच करना बेहद जरूरी है।
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