नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर सर्किट हाउस विवाद को लेकर तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महुआ मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजकर अधिकारियों पर संसदीय विशेषाधिकारों के उल्लंघन और प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाया है।

महुआ मोइत्रा ने जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, उनमें नदिया के जिलाधिकारी श्रीकांत पल्ली, अतिरिक्त जिलाधिकारी नृपेंद्र सिंह और नजारत उप-जिलाधिकारी अनामिका बेरा शामिल हैं। सांसद ने लोकसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के तहत यह नोटिस दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों का व्यवहार उन्हें अपने संसदीय दायित्वों के निर्वहन से रोकने की कोशिश का हिस्सा था।
मामला 14 अगस्त की रात का है, जब महुआ मोइत्रा कृष्णानगर स्थित सर्किट हाउस में ठहरी थीं। उनके अनुसार, रात में उन्हें अचानक कमरा खाली करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने दावा किया कि अतिरिक्त जिलाधिकारी की ओर से उन्हें फोन कर सर्किट हाउस खाली करने को कहा गया और बाद में एक आदेश की प्रति व्हाट्सऐप के जरिए भेजी गई। महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि अगर सर्किट हाउस बंद करने या रखरखाव से जुड़ा आदेश पहले से जारी था तो उन्हें इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि बुकिंग के समय और पहुंचने के बाद भी उन्हें इस तरह की किसी व्यवस्था की जानकारी नहीं दी गई थी।
टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया कि जिस समय उनसे परिसर खाली करने को कहा गया, उस दौरान सर्किट हाउस में अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के बजाय राजनीतिक दबाव और उत्पीड़न से जोड़ते हुए लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की है। महुआ मोइत्रा ने अपने नोटिस में सांसदों के प्रोटोकॉल और सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के तौर पर उन्हें अपने क्षेत्र के दौरे के दौरान निर्धारित सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इस पूरे विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि उनके साथ किया गया व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था और निर्वाचित प्रतिनिधि के सम्मान के खिलाफ है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को लेकर अभी अधिकारियों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सर्किट हाउस विवाद अब संसद तक पहुंच चुका है। विशेषाधिकार हनन नोटिस पर लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय इस मामले की आगे की दिशा तय करेगा। अगर नोटिस स्वीकार किया जाता है तो मामला संसद की विशेषाधिकार समिति के सामने जा सकता है, जहां आरोपों और तथ्यों की जांच की जाएगी।
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