उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने दिल्ली की भविष्य की योजनाएं इसकी प्रशासनिक सीमाओं से परे होनी चाहिए और राष्ट्रीय राजधानी को व्यापक 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र' (NCR) के एक हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आवास, परिवहन और बुनियादी ढांचे से जुड़े फैसले लोगों के दैनिक जीवन पर सीधा असर डालते हैं। 'विश्व पर्यावास दिवस', 'विश्व शहर दिवस' और 'विश्व नगर नियोजन दिवस' के अवसर पर युवा योजनाकारों के लिए आयोजित एक दिवसीय सेमिनार को संबोधित करते हुए, संधू ने कहा कि शहरी नियोजन का मूल उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना है। उन्होंने कहा कि किसी शहर की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वहां आवास, रोजगार, सार्वजनिक स्थानों और आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच कैसी है।
उन्होंने कहा कि तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण जमीन, आवास, परिवहन, पानी और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे विभिन्न एजेंसियों और पड़ोसी क्षेत्रों के बीच तालमेल बिठाना जरूरी हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि भूमि-उपयोग की योजनाएं परिवहन बुनियादी ढांचे के साथ तालमेल बिठाकर बनाई जानी चाहिए।
संधू ने शहरी जल प्रबंधन, आवागमन (मोबिलिटी) और किफायती आवास को ऐसे तीन क्षेत्र बताया, जिनके लिए दीर्घकालिक और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जल नियोजन में जल निकासी (ड्रेनेज), वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का संरक्षण और भूमि का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग शामिल होना चाहिए, साथ ही प्राकृतिक जल निकासी प्रणालियों की सुरक्षा भी की जानी चाहिए। आवागमन के संबंध में, उन्होंने दैनिक यात्राओं को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़कों और परिवहन सुविधाओं में महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों की जरूरतों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
आवास के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किसी आवास के किफायती होने का आकलन केवल उपलब्ध घरों की संख्या के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। घरों की गुणवत्ता, स्थान और कनेक्टिविटी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, खासकर कार्यस्थलों, परिवहन, स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच। युवा योजनाकारों को संबोधित करते हुए, उपराज्यपाल ने कहा कि 'जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम' (GIS), रिमोट सेंसिंग, डिजिटल मैपिंग और शहरी एनालिटिक्स जैसी तकनीकें साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि तकनीक का इस्तेमाल करते समय पेशेवर समझ, स्थानीय ज्ञान और लोगों के साथ सीधे जुड़ाव को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीन, आवास और बुनियादी ढांचे से जुड़े फैसले आने वाली कई पीढ़ियों के लिए समुदायों की रूपरेखा तय करते हैं, इसलिए ये फैसले साक्ष्यों, निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनहित पर आधारित होने चाहिए।
Tags: