नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व नेता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विपक्ष जिस बदलाव की मांग कर रहा है, उसका उद्देश्य देश में अस्थिरता पैदा करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से सरकार बदलना है। सिब्बल ने भागवत द्वारा दूसरे देशों में हुई राजनीतिक उथल-पुथल की भारत से तुलना करने पर भी सवाल उठाए।शनिवार, 24 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिब्बल ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार बदलने का अधिकार जनता के पास है। विपक्ष संविधान के दायरे में रहकर राजनीतिक परिवर्तन की बात कर रहा है। ऐसे में सत्ता परिवर्तन की मांग को देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
भागवत के बयान पर सिब्बल ने उठाए सवाल
कपिल सिब्बल ने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 20 अक्टूबर को नागपुर में विजयादशमी कार्यक्रम के दौरान सत्ता परिवर्तन को लेकर चिंता व्यक्त की थी। भागवत ने अपने संबोधन में नेपाल, बांग्लादेश, फ्रांस और अल्बानिया की घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा था कि केवल सत्ता बदलने से समस्याओं का समाधान नहीं होता।भागवत ने यह भी दावा किया था कि कुछ बाहरी ताकतें विभिन्न देशों में अशांति पैदा करने का प्रयास कर रही हैं और भारत भी उनके निशाने पर है। उन्होंने आंदोलनों को संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रखने और समाज में विभाजन पैदा करने से बचने की अपील की थी।
दूसरे देशों से तुलना को बताया बेबुनियाद डर
सिब्बल ने भागवत की तुलना को खारिज करते हुए इसे एक बेबुनियाद डर पैदा करने वाली बात बताया। उन्होंने कहा कि भारत में विपक्ष की राजनीतिक मांगों को नेपाल, बांग्लादेश या अन्य देशों की अशांति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।सिब्बल के अनुसार, लोकतंत्र में सरकार के कामकाज की आलोचना करना और सत्ता परिवर्तन की मांग उठाना विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है। किसी सरकार की नीतियों से असहमति जताने का अर्थ देश की व्यवस्था को अस्थिर करना नहीं होता।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत में सरकार बनाने और बदलने की प्रक्रिया चुनावों के माध्यम से निर्धारित होती है। इसलिए राजनीतिक बदलाव की मांग को विदेशी घटनाओं के संदर्भ में प्रस्तुत करने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी उठाया मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कपिल सिब्बल ने अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) प्रमुख के बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा से जुड़े विषयों पर सरकार के रुख की चर्चा की।सिब्बल ने कहा कि देश की सुरक्षा और विदेश नीति से संबंधित मामलों में गंभीरता तथा स्पष्टता आवश्यक है। उन्होंने इन मुद्दों को राष्ट्रीय हित से जुड़ा बताते हुए सरकार की जवाबदेही पर जोर दिया।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की यात्रा का जिक्रसिब्बल ने अपनी टिप्पणी के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा का विषय भी उठाया। उन्होंने भारत और अमेरिका के संबंधों तथा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की चर्चा करते हुए सरकार की विदेश नीति पर सवाल रखे।उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर देश के भीतर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष की आलोचना को लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बताया।
लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन पर राजनीतिक बहस
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा था कि आंदोलनों का उद्देश्य समस्याओं का समाधान होना चाहिए, न कि समाज में कटुता या विभाजन पैदा करना। उन्होंने संविधान और कानून के सम्मान पर भी जोर दिया था।वहीं, कपिल सिब्बल का तर्क है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से सरकार बदलने की मांग करना पूरी तरह वैध राजनीतिक प्रक्रिया है।दोनों नेताओं के बयानों के बाद सत्ता परिवर्तन, विरोध प्रदर्शनों और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस सामने आई है। इस बहस का प्रमुख विषय यह है कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना, राजनीतिक विरोध और सत्ता परिवर्तन की मांग को किस तरह देखा जाना चाहिए।