नई दिल्ली: राजधानी में नीट पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। शुरुआती जांच जहां पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान तक सीमित थी, वहीं अब जांच एजेंसियां प्रदर्शन के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या हिंसा किसी सुनियोजित रणनीति का हिस्सा थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग या संगठन सक्रिय थे।
जांच एजेंसियों का फोकस अब केवल मौके पर मौजूद उपद्रवियों तक सीमित नहीं है। अधिकारी प्रदर्शन को संगठित करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया गतिविधियों, आर्थिक लेन-देन और संभावित बाहरी प्रभावों की भी जांच कर रहे हैं। एजेंसियों का मानना है कि मौजूदा समय में बड़े विरोध प्रदर्शनों को संचालित करने के लिए ऑनलाइन नेटवर्क, डिजिटल प्रचार और फंडिंग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
विदेशी प्रभाव और डिजिटल फंडिंग की जांच
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ जुटाने, संदेश फैलाने या माहौल को प्रभावित करने के लिए किसी बाहरी नेटवर्क का इस्तेमाल तो नहीं किया गया। जांच के तहत सोशल मीडिया पोस्ट, वायरल वीडियो, मैसेजिंग ग्रुप और अन्य डिजिटल गतिविधियों की समीक्षा की जा रही है।
इसके अलावा डिजिटल फंडिंग की संभावनाओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है। एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि प्रदर्शन से जुड़े किसी व्यक्ति या समूह को आर्थिक सहायता कहां से मिली और क्या किसी संगठित नेटवर्क ने इसके लिए संसाधन उपलब्ध कराए।
सोशल मीडिया नेटवर्क की भूमिका पर नजर
जांच में सोशल मीडिया नेटवर्क एक अहम बिंदु बनकर सामने आया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रदर्शन से पहले किस तरह की ऑनलाइन गतिविधियां हुईं, किन अकाउंट्स से संदेश प्रसारित किए गए और किस तरह लोगों को एकत्रित होने के लिए प्रेरित किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैले संदेशों और गतिविधियों की टाइमलाइन तैयार की जा रही है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि प्रदर्शन की योजना कब बनी, किन लोगों ने इसमें भूमिका निभाई और हिंसा की स्थिति कैसे बनी।
एआई से तैयार की जा रही डिजिटल टाइमलाइन
जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी मदद से उपलब्ध वीडियो फुटेज, सोशल मीडिया डेटा और अन्य डिजिटल सामग्री का विश्लेषण किया जा रहा है। एआई आधारित तकनीक के जरिए संदिग्ध गतिविधियों को जोड़ने, घटनाओं की समय-सीमा तैयार करने और संभावित मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि हिंसा के दौरान सक्रिय रहे लोगों की आपसी कड़ियां क्या थीं। वीडियो फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उपद्रवियों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है।
प्रॉक्सी संगठनों और दुष्प्रचार की भी जांच
पुलिस की जांच अब उन संगठनों तक भी पहुंच रही है, जो सीधे तौर पर सामने नहीं आए लेकिन पर्दे के पीछे से गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। एजेंसियां यह भी जांच रही हैं कि कहीं किसी प्रॉक्सी संगठन या दुष्प्रचार अभियान के जरिए प्रदर्शन को हिंसक बनाने का प्रयास तो नहीं किया गया।
अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक समय में हिंसा की घटनाओं को केवल मौके पर मौजूद भीड़ के आधार पर नहीं समझा जा सकता। इसके पीछे डिजिटल नेटवर्क, सूचना प्रसार और संसाधनों की उपलब्धता जैसी कई परतें हो सकती हैं।
मास्टरमाइंड की तलाश जारी
जांच एजेंसियों का मुख्य लक्ष्य अब हिंसा के पीछे की वास्तविक भूमिका निभाने वाले लोगों तक पहुंचना है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों के आधार पर संभावित मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है।
नीट पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों और संगठनों में आक्रोश के बीच हुई हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रक्रिया को नई दिशा दे दी है। अब एजेंसियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि प्रदर्शन के नाम पर हिंसा फैलाने वालों और इसके पीछे काम करने वाले नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई की जा सके।