Delhi दिल्ली। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि उनका देश दबाव और धमकाने वाली नीति के सामने सिर नहीं झुकाएगा। उन्होंने पीड़ित और दबे-कुचले लोगों के अधिकारों की रक्षा का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें कुचलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
मसूद पेजेशकियन ने कहा, “हर कोई अपनी भाषा और विश्वास के अनुसार बात करता है, लेकिन आखिर में संदेश एक ही होता है।” उन्होंने आगे कहा कि हम दबंगई के सामने अपना सिर नहीं झुकाएंगे और उत्पीड़ित लोगों के अधिकारों को कुचले जाने की अनुमति नहीं देंगे। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका रुख केवल अधिकारों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वे पीड़ितों के समर्थक और मददगार बनने में भी विश्वास रखते हैं। उन्होंने इसे अपनी मान्यता और दृढ़ विश्वास का हिस्सा बताया।
पेजेशकियन का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली में वैश्विक नेताओं की मौजूदगी के बीच कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हो रही है। उनके बयान में अन्याय और दबाव के खिलाफ एकजुटता पर विशेष जोर दिखाई दिया। उन्होंने अपने संबोधन में यह संदेश देने की कोशिश की कि अलग-अलग देशों, समाजों और लोगों की भाषा या मान्यताएं भले ही अलग हों, लेकिन अन्याय के खिलाफ खड़े होने का उद्देश्य समान हो सकता है।
ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उत्पीड़ित लोगों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके साथ खड़ा होना उनकी नीति और विश्वास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पेजेशकियन के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान के रुख की पुनरावृत्ति के तौर पर देखा जा रहा है।
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