नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने देश में सत्ता परिवर्तन यानी 'रिजीम चेंज' को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में सरकार का गठन और परिवर्तन लोकतांत्रिक चुनावों में मिले जनादेश के आधार पर होता है। उन्होंने असंवैधानिक तरीके से राजनीतिक बदलाव लाने की किसी भी कोशिश का विरोध करते हुए कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने के प्रयास स्वीकार नहीं किए जा सकते।रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए राजनीतिक विरोधियों और कुछ कार्यकर्ताओं के बयानों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत की राजनीतिक व्यवस्था संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर आधारित है। केंद्रीय मंत्री ने विरोध प्रदर्शनों की आड़ में अराजकता फैलाने की कथित कोशिशों की आलोचना की और देश के युवाओं को राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया।
'भारत बांग्लादेश नहीं है', रिजिजू का सख्त संदेश
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सत्ता परिवर्तन की बात करने वालों पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "बड़े आए 'Regime Change' करने वाले! कान खोलकर सुन लो, भारत बांग्लादेश नहीं है!"रिजिजू ने दावा किया कि कुछ राजनीतिक समूह और कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ऐसी गतिविधियों के पीछे कथित राजनीतिक उद्देश्यों पर सवाल उठाए।उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में सरकार बदलने का संवैधानिक रास्ता चुनाव है। जनता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करके यह तय करती है कि देश में किस दल या गठबंधन को सरकार बनाने का अवसर मिलेगा। उनके मुताबिक, किसी भी राजनीतिक बदलाव के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान आवश्यक है।
युवाओं को लेकर भी दिया बड़ा बयान
किरन रिजिजू ने अपने बयान में देश के युवाओं की भूमिका का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा देश को कमजोर करने के बजाय उसके विकास और निर्माण में योगदान दे रहे हैं।केंद्रीय मंत्री ने युवाओं की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय युवा खेलों में पदक जीत रहे हैं और कौशल विकास, नवाचार, स्टार्टअप तथा तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, सांस्कृतिक क्षेत्र में भी युवा अपनी पहचान बना रहे हैं।उन्होंने अपने पोस्ट के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि देश की युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रिजिजू का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब देश में युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस चल रही है।
रिजीम चेंज' के बयान से बढ़ा राजनीतिक विवाद
दरअसल, हाल के दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इन प्रदर्शनों में शामिल कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से सत्ता परिवर्तन की बात किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया।भाजपा नेताओं का आरोप है कि विपक्ष के कुछ नेता विरोध प्रदर्शनों की आड़ में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विपक्ष का काम सरकार की नीतियों का विरोध करना और लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन के लिए प्रयास करना है।कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी कहा है कि लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार का विरोध करने और चुनाव के माध्यम से सत्ता परिवर्तन की मांग करने का अधिकार है। इस तरह विवाद का प्रमुख मुद्दा यह बन गया है कि 'रिजीम चेंज' के नारों का आशय चुनाव के माध्यम से सरकार बदलना है या किसी असंवैधानिक राजनीतिक बदलाव की मांग करना।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर जोर
भारत में संविधान के तहत सरकार के गठन और परिवर्तन की व्यवस्था निर्धारित है। लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं के चुनावों में जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है। इसके साथ ही संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे अधिकार भी प्रदान करता है।ऐसे में शांतिपूर्ण विरोध और असंवैधानिक गतिविधियों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है। सरकार की आलोचना करना, चुनावी सुधारों की मांग उठाना या लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन की बात करना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है।फिलहाल, किरेन रिजिजू के बयान ने सत्ता परिवर्तन और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। भाजपा और विपक्ष इस मुद्दे पर अलग-अलग तर्क दे रहे हैं। रिजिजू ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि भारत की शासन व्यवस्था जनता के जनादेश से तय होती है और देश के युवाओं को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।