नई दिल्ली। भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक वृद्धि की अगली लहर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भारत की आर्थिक बुनियाद, निजी क्षेत्र की गतिशीलता और तेजी से बढ़ती तकनीकी क्षमताओं का जिक्र करते हुए यह बात कही है। पांच दिवसीय भारत यात्रा के बाद जारी बयान में IMF के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है और IMF इस यात्रा में देश के साथ करीबी सहयोग जारी रखना चाहता है।

IMF अधिकारी ने भारत के अलग-अलग शहरों का दौरा कर सरकार, केंद्रीय बैंक, नीति निर्माताओं, निजी क्षेत्र और दूसरे हितधारकों से बातचीत की। यात्रा में नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई शामिल रहे। इस दौरान उन्होंने कुल 11 स्थानों का दौरा किया और भारतीय अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों को समझने की कोशिश की।

यात्रा पूरी होने के बाद वॉशिंगटन से जारी बयान में IMF अधिकारी ने कहा कि भारत के पास वैश्विक वृद्धि की अगली लहर को आगे बढ़ाने की क्षमता है। उन्होंने मजबूत आर्थिक आधार, गतिशील निजी क्षेत्र और बढ़ती तकनीकी क्षमताओं को भारत की प्रमुख ताकतों के रूप में रेखांकित किया।

मजबूत आर्थिक बुनियाद पर जोर

IMF अधिकारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती को भविष्य की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया। भारत पिछले कुछ वर्षों में दुनिया की प्रमुख तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है। घरेलू मांग, निवेश, सेवा क्षेत्र और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसी गतिविधियां आर्थिक विस्तार में अहम भूमिका निभा रही हैं।

भारत की बड़ी आबादी और घरेलू बाजार भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आधार हैं। बढ़ता शहरीकरण, बुनियादी ढांचे पर निवेश और डिजिटल सेवाओं का विस्तार आर्थिक गतिविधियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।

हालांकि वैश्विक स्तर पर व्यापार तनाव, भू-राजनीतिक परिस्थितियां और वित्तीय बाजारों की अनिश्चितता जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे माहौल में घरेलू आर्थिक मजबूती किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

प्राइवेट सेक्टर की तेजी बनी ताकत

भारत के निजी क्षेत्र की भूमिका को भी IMF अधिकारी ने प्रमुख ताकत के रूप में रेखांकित किया। देश में स्टार्टअप, वित्तीय सेवाएं, सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और डिजिटल कारोबार जैसे क्षेत्रों में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ी है।

निजी निवेश और उद्यमिता रोजगार सृजन के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा नई तकनीक अपनाने और वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी बढ़ाने में भी निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका है।

भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार और डिजिटल प्लेटफॉर्म का तेजी से बढ़ता उपयोग भी आर्थिक बदलाव के प्रमुख पहलुओं में शामिल है।

टेक्नोलॉजी में बढ़ती क्षमता पर नजर

IMF अधिकारी ने भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमताओं को भी वैश्विक आर्थिक वृद्धि में योगदान देने वाली महत्वपूर्ण ताकत बताया। भारत डिजिटल भुगतान, सॉफ्टवेयर सेवाओं और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है।

तकनीक के इस्तेमाल ने वित्तीय सेवाओं से लेकर सरकारी योजनाओं तक कई क्षेत्रों में बदलाव किया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार ने छोटे कारोबारों और उपभोक्ताओं को भी औपचारिक आर्थिक व्यवस्था से जोड़ने में मदद की है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, फिनटेक और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में निवेश आने वाले वर्षों में भारत के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।

सीतारमण और RBI गवर्नर से मुलाकात

भारत यात्रा के दौरान IMF के वरिष्ठ अधिकारी ने वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भारत-IMF सहयोग से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई।

उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा से भी मुलाकात की। केंद्रीय बैंक की भूमिका महंगाई, मौद्रिक नीति, वित्तीय स्थिरता और बैंकिंग व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में IMF और RBI के बीच होने वाली बातचीत वैश्विक तथा घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के आकलन के लिहाज से अहम मानी जाती है।

नीति निर्माण से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी उन्होंने चर्चा की। इन बैठकों के जरिए भारत के विकास मॉडल, सुधारों और भविष्य की आर्थिक प्राथमिकताओं को समझने पर जोर दिया गया।

दिल्ली से चेन्नई तक पांच दिन का दौरा

IMF अधिकारी का डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में यह पहला भारत दौरा था। पांच दिनों की यात्रा में उन्होंने नई दिल्ली के अलावा मुंबई और चेन्नई का भी दौरा किया।

मुंबई देश की वित्तीय राजधानी है और यहां बैंकिंग, पूंजी बाजार तथा कॉर्पोरेट सेक्टर की बड़ी मौजूदगी है। वहीं चेन्नई ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और विनिर्माण के प्रमुख केंद्रों में शामिल है।

अलग-अलग शहरों की यात्रा के जरिए भारतीय अर्थव्यवस्था की विविधता और निजी क्षेत्र की गतिविधियों को करीब से समझने का अवसर मिला।

भारत के साथ सहयोग जारी रखेगा IMF

IMF अधिकारी ने अपने बयान में यह भी कहा कि संस्था भारत के आर्थिक सफर में करीबी सहयोगी बनी रहेगी। IMF अपने सदस्य देशों के साथ आर्थिक निगरानी, नीतिगत सलाह, तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में काम करता है।

भारत IMF का महत्वपूर्ण सदस्य है और वैश्विक आर्थिक मंचों पर उसकी भूमिका बढ़ी है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के कारण भारत की विकास दर का असर वैश्विक वृद्धि के आंकड़ों पर भी पड़ता है।

अवसरों के साथ चुनौतियां भी

भारत की आर्थिक संभावनाओं के साथ कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। तेजी से बढ़ती कामकाजी आबादी के लिए पर्याप्त रोजगार तैयार करना, निजी निवेश को और बढ़ाना, उत्पादकता में सुधार, कौशल विकास और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण रहेगा।

इसी तरह वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और बदलती तकनीक के दौर में भारतीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना भी जरूरी होगा।

फिलहाल IMF के वरिष्ठ अधिकारी की टिप्पणी भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। मजबूत आर्थिक आधार, सक्रिय निजी क्षेत्र और तकनीकी क्षमताओं के बेहतर इस्तेमाल के जरिए भारत वैश्विक वृद्धि में अपना योगदान और बढ़ा सकता है। IMF ने भी संकेत दिया है कि वह इस प्रक्रिया में भारत के साथ सहयोग जारी रखेगा।

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