नई दिल्ली: 'गल्फ टुडे' की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्व बैंक के हालिया आकलन से पता चलता है कि केवल 12 वर्षों में लगभग 496 मिलियन (49.6 करोड़) भारतीय गरीबी रेखा से ऊपर आ गए हैं। यह आधुनिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक बदलावों में से एक है। रिपोर्ट में विश्व बैंक के आंकड़ों का हवाला दिया गया है, जो दर्शाते हैं कि 2011-12 और 2023-24 के बीच, विश्व बैंक द्वारा तय की गई 'निम्न-मध्यम आय' गरीबी रेखा (प्रति दिन 4.20 डॉलर) से नीचे रहने वाले भारतीयों का अनुपात 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत रह गया है। 'अत्यधिक गरीबी' (प्रति दिन 3 डॉलर के स्तर पर मापी गई) में और भी बड़ी गिरावट आई है - यह 27.1 प्रतिशत से घटकर मात्र 2.6 प्रतिशत रह गई है।
रिपोर्ट बताती है कि इस प्रगति में कई कारकों का योगदान रहा है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के माध्यम से बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच का विस्तार, आधार से जुड़े प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), रियायती दरों पर खाद्य वितरण, ग्रामीण विद्युतीकरण, स्वच्छता, बुनियादी ढांचे का विकास और डिजिटल कनेक्टिविटी ने परिवारों की सुरक्षा और आर्थिक भागीदारी को मजबूत किया है। कमजोर परिवारों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराने से भी लाखों लोगों को खाद्य असुरक्षा और आर्थिक झटकों से बचने में मदद मिली है।
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत की आर्थिक वृद्धि ने इन उपलब्धियों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया है। निरंतर आर्थिक विकास से बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा के लिए संसाधन जुटते हैं। देश का अनुभव दिखाता है कि विकास तब और अधिक सार्थक हो जाता है, जब इसके लाभ उन समुदायों तक भी पहुंचते हैं जो अब तक विकास की मुख्यधारा से बाहर रहे हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि देश को आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए। विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, लगभग 35 मिलियन (3.5 करोड़) भारतीय अभी भी अत्यधिक गरीबी में जी रहे हैं, जबकि लगभग 232 मिलियन (23.2 करोड़) लोग 4.20 डॉलर की गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं। गरीबी रेखा पार कर लेने मात्र से ही वित्तीय सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल जाती। परिवारों को अभी भी स्वास्थ्य देखभाल के खर्च, शिक्षा, असुरक्षित रोजगार और अपर्याप्त आवास जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए, भारत के सामने अब अगली चुनौती गरीबी उन्मूलन से आगे बढ़कर स्थायी समृद्धि की ओर बढ़ने की है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके लिए उत्पादक रोजगार, मजबूत विनिर्माण क्षेत्र, बेहतर शिक्षा, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं, और महिलाओं तथा युवाओं के लिए अधिक आर्थिक अवसर पैदा करने की आवश्यकता है।
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