नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA गठबंधन अपने आंदोलन को और तेज करने की तैयारी में है। नवंबर की शुरुआत में विपक्षी दल विरोध प्रदर्शन का अगला चरण शुरू कर सकते हैं। दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को प्रस्तावित महारैली के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इनमें राष्ट्रीय राजधानी में एक बार फिर बड़े पैमाने पर मार्च निकालना और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के मुद्दे पर प्रतीकात्मक मॉक संसद आयोजित करना शामिल है।
विपक्षी गठबंधन के नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर आंदोलन जारी रहेगा। हालांकि, नवंबर में होने वाले अगले चरण के कार्यक्रमों को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। गठबंधन के शीर्ष नेता विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा कर रहे हैं।
एक नवंबर को रामलीला मैदान में शक्ति प्रदर्शन
दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक नवंबर को होने वाली महारैली विपक्षी गठबंधन के आंदोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। इस रैली में कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
रैली का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग उठाना और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को जनता के सामने रखना है।
दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस को रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने की अनुमति दे दी है। पुलिस की ओर से 25 अक्टूबर से तीन नवंबर तक की अवधि के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया गया है। प्रशासन आयोजकों के साथ सुरक्षा, यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में समन्वय कर रहा है।
दोबारा बड़ा मार्च निकालने की तैयारी
विपक्षी नेताओं के बीच दिल्ली में एक बार फिर व्यापक स्तर पर मार्च आयोजित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो रही है। इससे पहले INDIA गठबंधन के सांसद और नेता चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं।
छह अक्टूबर को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई थी।
इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी थी तथा कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया था। अब विपक्षी दल ऐसे ही बड़े जनसमूह को फिर से सड़कों पर उतारने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
मॉक संसद आयोजित करने का प्रस्ताव
आंदोलन की रणनीति में सबसे चर्चित प्रस्ताव मॉक संसद आयोजित करने का है। इस कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया जा सकता है।
इसका उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के आरोपों और संवैधानिक जवाबदेही के मुद्दे को जनता के सामने रखना होगा।
हालांकि, मॉक संसद की कार्यवाही केवल प्रतीकात्मक होगी। इससे मुख्य चुनाव आयुक्त को कानूनी रूप से पद से नहीं हटाया जा सकता। वास्तविक पदमुक्ति की प्रक्रिया संविधान और संबंधित कानूनों के प्रावधानों के अनुसार संसद में पूरी करनी होती है।
विपक्षी नेताओं की बैठकों में इस प्रस्ताव के साथ अन्य रचनात्मक विरोध कार्यक्रमों पर भी चर्चा की गई है। अभी इन कार्यक्रमों की अंतिम तारीख और स्वरूप तय नहीं किए गए हैं।
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण पर विवाद
विपक्षी दलों के आंदोलन के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर भी है। INDIA गठबंधन के नेताओं ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों में संशोधन और नाम हटाए जाने की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी विपक्ष के इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताती रही है। मतदाता सूची से जुड़े आरोपों और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की अहम भूमिका
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इस अभियान में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। विपक्षी गठबंधन के अन्य दल भी आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए चर्चा कर रहे हैं।
सितंबर के अंत में हुई INDIA गठबंधन की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संयुक्त प्रदर्शन करने और देशभर में आंदोलन चलाने की रणनीति पर सहमति बनी थी।
विपक्षी नेताओं ने साफ किया था कि वे इस मुद्दे को केवल संसद तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि जनता के बीच भी ले जाना चाहते हैं। इसी रणनीति के तहत रैलियों, मार्च और जनसंपर्क कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही है।
छात्र संगठन और सामाजिक संस्थाएं भी होंगी शामिल
एक नवंबर की रैली को व्यापक रूप देने के लिए छात्र संगठनों और नागरिक समाज से जुड़े समूहों को भी साथ लाने की तैयारी है।
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी संकेत दिया है कि प्रस्तावित रैली में छात्र और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
विपक्षी दलों का प्रयास है कि आंदोलन राजनीतिक पार्टियों के कार्यक्रम तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें विभिन्न सामाजिक वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
नवंबर के अंत में भी बड़े कार्यक्रम की योजना
एक नवंबर की रैली के अलावा विपक्ष ने नवंबर के अंतिम सप्ताह के लिए भी आंदोलन की रूपरेखा बनाई है। कांग्रेस की योजना के अनुसार, 25 और 26 नवंबर को दिल्ली के आसपास के विभिन्न स्थानों से छह यात्राएं निकाली जा सकती हैं।
इन यात्राओं को 'चलो दिल्ली' कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत 26 नवंबर, संविधान दिवस पर सभी यात्राओं के दिल्ली पहुंचने की योजना है।
विपक्ष आगामी संसदीय सत्र में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मुद्दा उठाने और उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव लाने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
अब अगले फैसले पर टिकी निगाहें
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के लगातार प्रदर्शनों से चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
एक नवंबर की महारैली के बाद आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ेगा, यह INDIA गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व के फैसले पर निर्भर करेगा। फिलहाल बड़े मार्च, मॉक संसद और अन्य विरोध कार्यक्रमों पर विचार जारी है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि विपक्षी दल अपने आंदोलन को किस रूप में आगे बढ़ाते हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर क्या नई रणनीति अपनाते हैं।