नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के समर्थन में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को बड़ा बयान दिया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ जारी विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन को जनता के गुस्से से पैदा हुआ तूफान बताया। मसूद ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में उठ रही आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने दिल्ली में सोमवार को हुए प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए दावा किया कि लोगों में चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर नाराजगी है।इमरान मसूद ने राहुल गांधी के नेतृत्व और विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन का बचाव करते हुए कहा, "यह राहुल गांधी का तूफान है, वे इसमें उड़ जाएंगे और कल के विरोध-प्रदर्शन ने जनता के गुस्से का स्तर दिखा दिया।उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेता मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
राहुल गांधी के समर्थन में इमरान मसूद का बयान
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहा विरोध-प्रदर्शन केवल राजनीतिक दलों की नाराजगी तक सीमित नहीं है। उन्होंने इसे आम लोगों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया।मसूद के अनुसार, सोमवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन से यह स्पष्ट हुआ कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों में नाराजगी है।उन्होंने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि विपक्ष इन मुद्दों को उठाता रहेगा। हालांकि प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या और उनके विचारों को पूरे देश की जनभावना का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने पहुंचे थे विपक्षी नेता
सोमवार, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के नेताओं और समर्थकों ने दिल्ली में मार्च निकाला था।विपक्षी नेता बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़े थे। मार्च का उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को उठाना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही की मांग करना था।दिल्ली पुलिस ने बिना अनुमति आयोजित मार्च को लेकर दो प्राथमिकी भी दर्ज कीं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग से संबंधित नियमों का उल्लंघन हुआ था।
राहुल गांधी समेत 11 नेताओं ने दाखिल की याचिका
राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और इंडिया गठबंधन के नौ अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की।याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित चुनाव आयोग के फैसलों और कथित अनियमितताओं को चुनौती दी गई है।विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान पात्र नागरिकों के नाम हटाए गए। उनका कहना है कि ऐसी प्रक्रिया से नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।हालांकि चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज कर चुका है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए पुनरीक्षण किया जा रहा है।.
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका में बताईं 14 खामियां
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिका की जांच के दौरान सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने 14 प्रक्रियागत खामियों की पहचान की।इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की अस्पष्ट प्रति, कुछ दस्तावेजों के पन्नों की कमी और नौ याचिकाकर्ताओं के आवश्यक वकालतनामे उपलब्ध नहीं होने जैसी कमियां शामिल थींरजिस्ट्री ने न्यायालय शुल्क में 220 रुपये की कमी भी बताई। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को व्यक्तिगत रूप से प्रतिवादी बनाए जाने पर स्पष्टीकरण मांगा।इन खामियों के कारण मंगलवार को याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी
याचिका की कमियों पर इमरान मसूद ने किया बचाव
इमरान मसूद ने विपक्षी नेताओं की याचिका में सामने आई प्रक्रियागत कमियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों को अधिक महत्व नहीं दिया।उन्होंने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए विरोध-प्रदर्शन को जनता की नाराजगी से जुड़ा बताया।हालांकि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा बताई गई कमियों को दूर करना याचिकाकर्ताओं के लिए आवश्यक है। ये आपत्तियां याचिका की औपचारिक प्रक्रिया से संबंधित हैं और इन्हें मामले के गुण-दोष पर अदालत का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने भी याचिका में प्रक्रियागत कमियां होने की बात स्वीकार की और उन्हें दूर करने की बात कही।
SIR को लेकर जारी है राजनीतिक विवाद
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विवाद बना हुआ है।कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेताओं का आरोप है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। दूसरी ओर, भाजपा और चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।इमरान मसूद के बयान के बाद विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है। फिलहाल याचिका की प्रक्रियागत कमियों को दूर किए जाने और अदालत में अगली सुनवाई पर नजर रहेगी।