जल संसाधन प्रबंधन के लिए ISRO और जल शक्ति मंत्रालय के बीच अहम समझौता

Update: 2026-06-01 10:03 GMT

Delhi दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जल शक्ति मंत्रालय ने सोमवार को देश में जल संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य सैटेलाइट तकनीक और स्पेस-बेस्ड एप्लीकेशन्स का उपयोग कर जल संसाधनों की निगरानी और प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है।

यह समझौता डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय की एक राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान किया गया, जिसमें जल क्षेत्र में रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर विस्तार से चर्चा हुई।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जल संसाधन विभाग मिलकर इस MoU के तहत 24 प्रमुख शोध क्षेत्रों पर काम करेंगे। इनमें जलाशयों की निगरानी, जल विस्तार का आकलन, नदी प्रवाह विश्लेषण, सैटेलाइट आधारित जल गुणवत्ता की जांच और जल निकायों में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक के वितरण का अध्ययन शामिल है।

इस पहल का उद्देश्य देश में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाना है, ताकि जल संकट जैसी समस्याओं से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में जल सुरक्षा एक महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि जल से जुड़ी चुनौतियों का समाधान केवल तकनीक नहीं, बल्कि नवाचार, पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के समन्वय से ही संभव है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की मदद से अब जल संसाधनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और वैज्ञानिक विश्लेषण को और मजबूत किया जाएगा, जिससे नीति निर्माण और जल प्रबंधन में बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे।

इस समझौते को विशेषज्ञों द्वारा एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में देश में जल सुरक्षा और प्रबंधन की दिशा में नई संभावनाएं खोल सकता है।

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